Health Sector Budget 2026: यूनियन बजट 2026 को लेकर हेल्थ सेक्टर से लगातार प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं. इस बार बजट में अस्पतालों की इमारतें खड़ी करने से आगे बढ़कर जमीनी स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने पर जोर दिया गया है. इसी संदर्भ में देश के जाने-माने कार्डियोलॉजिस्ट एक्सपर्ट और डॉक्टर नरेश त्रेहान, जो मेदांता हॉस्पिटल के मैनेजिंग डायरेक्टर हैं, ने इस बजट को डाउन-अप बजट फॉर हेल्थकेयर बताया है. उनका कहना है कि यह बजट ऊपर से नीचे नहीं, बल्कि नीचे से ऊपर यानी गांव, जिला और फिर राष्ट्रीय स्तर तक स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने की सोच पर आधारित है. यही वजह है कि यह बजट लंबे समय में देश की हेल्थकेयर सिस्टम को स्थायी मजबूती दे सकता है.
जमीनी स्तर पर हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर पर फोकस
डॉ. नरेश त्रेहन के अनुसार, बजट का सबसे अहम पहलू यह है कि इसमें ग्राउंड लेवल इंफ्रास्ट्रक्चर को प्राथमिकता दी गई है. जिला स्तर पर क्रिटिकल केयर की क्षमता बढ़ाने की बात की गई है, ताकि गंभीर मरीजों को बड़े शहरों तक रेफर करने की मजबूरी कम हो. इससे न सिर्फ इलाज समय पर मिलेगा, बल्कि मरीजों और उनके परिवारों पर आर्थिक बोझ भी घटेगा.
PM आत्मनिर्भर स्वास्थ्य कार्यक्रम के लिए 64,000 करोड़ रुपये
डॉ. त्रेहन ने बजट की एक और बड़ी घोषणा की ओर ध्यान दिलाया, पीएमआत्मनिर्भर स्वास्थ्य कार्यक्रम के लिए 64,000 करोड़ रुपये का प्रावधान. उन्होंने इसे हेल्थकेयर डिलीवरी सिस्टम की ट्विन सिस्टर बताया. उनका कहना है कि सिर्फ अस्पताल बना देना ही काफी नहीं होता, बल्कि उनके आसपास सिविक सुविधाएं, सपोर्ट सिस्टम और बुनियादी ढांचा भी उतना ही जरूरी होता है, खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में.
ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था को मिलेगा सहारा
इस बजट का उद्देश्य ग्रामीण सेक्टर में स्वास्थ्य सेवाओं की कमी को दूर करना है. बेहतर सड़कें, बिजली, पानी और मेडिकल सपोर्ट सिस्टम के बिना हेल्थकेयर पूरी तरह प्रभावी नहीं हो सकता. आत्मनिर्भर स्वास्थ्य कार्यक्रम के जरिए इन कमियों को भरने की कोशिश की गई है.
क्यों खास है यह डाउन-अप अप्रोच?
डॉ. नरेश त्रेहन के मुताबिक, जब जिला और गांव स्तर पर मजबूत स्वास्थ्य सुविधाएं होंगी, तभी राष्ट्रीय स्तर पर हेल्थ सिस्टम मजबूत माना जाएगा. यही वजह है कि इस बजट को सिर्फ खर्च का दस्तावेज नहीं, बल्कि दीर्घकालिक हेल्थ प्लान कहा जा सकता है.
कुल मिलाकर, यूनियन बजट 2026 हेल्थ सेक्टर के लिए एक संरचनात्मक सुधार की दिशा में कदम है. डॉ. नरेश त्रेहन की राय यह संकेत देती है कि यह बजट दिखावे से ज्यादा जमीनी हकीकत बदलने की कोशिश करता है. अगर इन योजनाओं को सही तरीके से लागू किया गया, तो आने वाले सालों में भारत की स्वास्थ्य व्यवस्था कहीं ज्यादा सशक्त और संतुलित नजर आ सकती है.
(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)














