मेडिकल साइंस की बड़ी कामयाबी, मृत डोनर से यूटरस ट्रांसप्लांट के बाद महिला ने दिया बच्चे को जन्म

यूके के केंट में रहने वाली ग्रेस बेल जन्म से ही बिना काम करने वाले गर्भ (non-viable womb) के पैदा हुई थीं. ग्रेस को एक मृत महिला डोनर से गर्भ ट्रांसप्लांट किया गया.

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ऑक्सफोर्ड और लंदन की मेडिकल टीमों ने मिलकर यह ऐतिहासिक ऑपरेशन सफलतापूर्वक पूरा किया.

मेडिकल साइंस की दुनिया से आई एक खबर ने पूरी दुनिया को चौंका दिया है. ब्रिटेन में पहली बार एक बच्चे का जन्म ऐसे गर्भ से हुआ है, जिसे एक मृत महिला डोनर से ट्रांसप्लांट किया गया था. 10 हफ्ते के इस नन्हे बच्चे का नाम ह्यूगो है और उसका जन्म सिर्फ एक परिवार की खुशी नहीं, बल्कि विज्ञान की बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है. यह कहानी है उम्मीद, हिम्मत और नई तकनीक और ताकत की, जिसने नामुमकिन को मुमकिन बना दिया.

मां बनने का सपना जो अधूरा था

यूके के केंट में रहने वाली ग्रेस बेल जन्म से ही बिना काम करने वाले गर्भ (non-viable womb) के पैदा हुई थीं. मेडिकल भाषा में इसे ऐसी स्थिति कहा जाता है, जिसमें यूटरस मौजूद नहीं होता या ठीक से विकसित नहीं हुआ होता. इस वजह से डॉक्टरों ने उन्हें साफ कहा था कि उनके लिए प्राकृतिक रूप से मां बन पाना लगभग असंभव है. लेकिन ग्रेस ने उम्मीद नहीं छोड़ी. कई सालों की कोशिशों और मेडिकल एडवाइज के बाद उन्हें एक नई संभावना दिखाई दी गर्भ ट्रांसप्लांट की.

मृत डोनर से हुआ गर्भ ट्रांसप्लांट

ग्रेस को एक मृत महिला डोनर से यूटरस ट्रांसप्लांट किया गया. यह एक जटिल और जोखिम भरी सर्जरी होती है, जिसमें डॉक्टर पूरी सावधानी और विशेषज्ञता के साथ गर्भ को ट्रांसप्लांट करते हैं.

ऑक्सफोर्ड और लंदन की मेडिकल टीमों ने मिलकर यह ऐतिहासिक ऑपरेशन सफलतापूर्वक पूरा किया. ट्रांसप्लांट के बाद डॉक्टरों ने लगातार मॉनिटरिंग की और सुनिश्चित किया कि शरीर नए अंग को स्वीकार कर ले.

कुछ समय बाद, ग्रेस गर्भवती हुईं और सुरक्षित तरीके से बेटे ह्यूगो को जन्म दिया. यह ब्रिटेन में पहली ऐसी घटना है, जिसने मेडिकल इतिहास में नया अध्याय जोड़ दिया.

'जैसे किसी सपने से जागी हूं'

ग्रेस ने भावुक होकर कहा, "सुबह उठकर जब मैंने उसका छोटा सा चेहरा देखा, तो लगा जैसे मैं किसी सपने से जाग रही हूं." उनके पार्टनर स्टीव पॉवेल ने भी डोनर और उनके परिवार के प्रति आभार व्यक्त किया. उन्होंने कहा कि डोनर की दयालु और निस्वार्थ भावना के कारण ही उनका परिवार पूरा हो सका.

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डॉक्टरों ने कहा एक खास पल

डॉक्टरों ने इस जन्म को एक खास और ऐतिहासिक पल बताया. उनका कहना है कि यह उपलब्धि उन हजारों महिलाओं के लिए उम्मीद की किरण है, जो बिना गर्भ के जन्म लेती हैं या किसी बीमारी के कारण मां नहीं बन पातीं. गर्भ ट्रांसप्लांट अभी भी एक नई और जटिल प्रक्रिया है, लेकिन इस सफलता ने दिखा दिया है कि सही तकनीक और एक्सपर्ट टीम के साथ यह संभव है.

यह घटना सिर्फ एक परिवार की कहानी नहीं, बल्कि उन सभी महिलाओं के लिए आशा का संदेश है, जो मातृत्व का सपना देखती हैं. मेडिकल साइंस लगातार नई सीमाएं तोड़ रहा है. ह्यूगो का जन्म यह साबित करता है कि विज्ञान और इंसानी संवेदनाएं मिलकर चमत्कार कर सकती हैं.

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(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)

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