मिडिल एज में छोटी-छोटी बातें भूलना पड़ सकता है भारी, कहीं ये Alzheimer’s Disease के शुरुआती संकेत तो नहीं?

अल्जाइमर में दिमाग में एमाइलॉइड-बीटा प्लाक और टाउ टेंगल्स का असामान्य जमाव पाया जाता है, जो धीरे-धीरे मेमोरी और सोचने-समझने की क्षमता को प्रभावित करता है. अभी तक इसका पक्का कारण और इलाज स्पष्ट नहीं है. लेकिन, एक नई उम्मीद सामने आई है सीखते रहने की आदत.

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छोटी-छोटी बातें भूलना क्या अल्जाइमर के लक्षण हैं?

आज की भागती-दौड़ती जिंदगी में भूलना आम बात है, लेकिन जब यह रोजमर्रा के काम को प्रभावित करने लगे या फिर अपनों के चेहरे और घर का रास्ता भूलने जैसी चीजों तक पहुंच जाए, तो इसे हल्के में लेना सही नहीं है. अल्जाइमर सिर्फ उम्र बढ़ने का असर नहीं है, बल्कि यह एक ऐसी बीमारी है जो धीरे-धीरे दिमाग की कोशिकाओं को कमजोर करती है.  अक्सर लोग इसे सामान्य समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन इसकी शुरुआती चेतावनियां सालों पहले ही दिखने लगती हैं. अगर समय रहते इसे पहचाना जाए और जीवनशैली में बदलाव किया जाए तो इस बीमारी की रफ्तार को काफी हद तक धीमा किया जा सकता है.

अल्जाइमर का संबंध सीधे दिमाग से है. दिमाग हमारे शरीर के सभी अंगों के कामकाज को नियंत्रित करता है. आजकल कम उम्र में भी लोग भूलने की समस्या से जूझ रहे हैं. इस बीमारी के होने के पीछे हाई ब्लड प्रेशर, हाई कोलेस्ट्रॉल, तनाव, खराब खानपान और नींद की कमी जैसे कई कारण हैं. फरवरी में वाशिंगटन यूनिवर्सिटी की रिसर्च में खुलासा हुआ कि एक सिंपल ब्लड टेस्ट से अल्जाइमर के शुरुआती लक्षण तीन‑चार साल पहले ही पता लगाए जा सकते हैं और इसे सही डाइट, व्यायाम और लाइफस्टाइल अपनाकर रोकना संभव है.

अल्जाइमर के शुरुआती संकेत

अल्जाइमर के शुरुआती चेतावनी संकेतों में रोजमर्रा की चीजें भूल जाना, जान-पहचान वालों के नाम याद न रहना, अचानक कोई काम याद न आना, और दिनचर्या में उलझन होना शामिल हैं. उम्र बढ़ने पर हल्की भूलने की समस्या सामान्य है, लेकिन अगर यह मिडिल एज में शुरू हो जाए तो यह धीरे-धीरे गंभीर रूप ले सकता है. शुरुआती पहचान से ही सावधानी बरतना जरूरी है. ब्लड टेस्ट और नियमित चेकअप इसे समय रहते रोकने में मदद कर सकते हैं.

बचाव के तरीके 

डाइट इस बीमारी में बेहद अहम है. हरी सब्जियां, बेरी, ड्राई फ्रूट्स, अनाज और ऑलिव ऑयल को अपनी डाइट में शामिल करें. नियमित व्यायाम करें, वॉकिंग या एरोबिक एक्टिविटी दिमाग में ब्लड फ्लो को बढ़ाता है और न्यूरॉन्स को मजबूत करता है.

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दिमाग को एक्टिव रखना भी उतना ही जरूरी है. पजल्स, पढ़ाई, नई चीजें सीखना और म्यूजिक सुनना दिमाग के कनेक्शन को मजबूत करता है. म्यूजिक सुनने से डिमेंशिया का रिस्क 39 प्रतिशत तक कम हो सकता है. दोस्तों और परिवार के साथ बातचीत करना और सोशल इंटरेक्शन बनाए रखना भी जरूरी है, क्योंकि अकेलापन इस बीमारी को बढ़ावा देता है.

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इसके अलावा, दिल की सेहत और दिमाग का संबंध गहरा है. ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल और डायबिटीज को नियंत्रित करके अल्जाइमर का खतरा कम किया जा सकता है. नींद पर्याप्त लेना भी जरूरी है.

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(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)

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