करीब 100 साल के नादर सिंह की जिंदगी का सबसे बड़ा दर्द आज भी अधूरा है. पाकिस्तान से भारत आने के बाद उन्होंने पूरी उम्र इस उम्मीद में गुजार दी कि एक दिन उन्हें उनका हक मिलेगा, लेकिन उम्र के इस आखिरी पड़ाव में भी उनकी पेंशन का मामला अटका हुआ है.
नादर सिंह बताते हैं कि आजादी से पहले उनका परिवार पाकिस्तान के ख्याली नेकी गांव में रहता था. बंटवारे के समय उन्हें भारत आने के लिए कहा गया था. परिवार को भरोसा दिया गया था कि यहां रहने के लिए जमीन और दूसरी सुविधाएं दी जाएंगी. इसके बाद वे जहाज के जरिए भारत आए और हिसार में बस गए. उनका कहना है कि आज तक उन्हें वह सुविधाएं नहीं मिलीं जिनका वादा किया गया था.
उम्र के इस पड़ाव पर भी हक की तलाश
नादर सिंह आज अपनी पेंशन से जुड़े काम के लिए हिसार पहुंचे थे. उन्होंने बताया कि अब उनकी उम्र इतनी अधिक हो चुकी है कि कई बार उन्हें खाना-पीना तक याद नहीं रहता. जब वह अधिकारियों से मिलने पहुंचे तो उन्हें बताया गया कि उनका क्षेत्र अब फतेहाबाद जिले में आता है. नादर सिंह का कहना है कि सरकार उनके पुराने रिकॉर्ड की जांच करें और उन्हें उनका हक दिलाए.
बेटे ने सुनाई पिता के संघर्ष की कहानी
नादर सिंह के बेटे सरूप सिंह ने बताया कि उनके पिता स्वतंत्रता सेनानी रहे हैं. पाकिस्तान से आने के बाद उन्होंने भारत में अपनी पहचान और जरूरी दस्तावेज बनवाए थे. परिवार के कुछ रिश्तेदार अलवर में रहते थे, जहां उनके कई महत्वपूर्ण दस्तावेज रखे हुए थे. सरूप सिंह के मुताबिक, एक आगजनी की घटना में ये दस्तावेज जलकर नष्ट हो गए. इसके बाद परिवार दस्तावेजों की प्रतियां लेकर वर्षों से सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहा है.
सम्मान मिला, लेकिन पेंशन नहीं
परिवार का कहना है कि फतेहाबाद में नादर सिंह के नाम का सम्मान किया जाता है. उनके नाम की नेम प्लेट भी लगाई गई है, लेकिन पेंशन का मामला अब तक हल नहीं हुआ. सरूप सिंह ने बताया कि उनके पिता जीवनभर आवेदन देते रहे. हर बार उन्हें उम्मीद होती थी कि पेंशन शुरू हो जाएगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ. करीब दो साल पहले फिर से पूरी फाइल तैयार कर जमा कराई गई थी.
रिकॉर्ड नहीं मिलने से अटका मामला
परिवार के अनुसार फतेहाबाद में अधिकारियों ने सभी दस्तावेज तैयार कर चंडीगढ़ भेजे थे. कुछ महीने बाद जवाब मिला कि पुराने रिकॉर्ड में नादर सिंह का नाम नहीं मिल रहा है. इसी वजह से मामला आगे नहीं बढ़ पाया. अब परिवार प्रशासन और सरकार से मांग कर रहा है कि पुराने रिकॉर्ड की दोबारा जांच की जाए और लंबित पेंशन मामले का जल्द समाधान किया जाए.
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