कबाड़ी ने 6 माह बाद लौटाए 15 लाख के गहने, फरीदाबाद के 'खान साहब' की ईमानदारी, परिवार खुशी से फूला न समाया

घटना की शुरुआत पिछले साल जनवरी में हुई थी. फरीदाबाद के रहने वाले अशोक शर्मा अपने परिवार के साथ कुंभ के मेले में घूमने जा रहे थे. घर पीछे से सूना था, इसलिए चोरी के डर से उन्होंने एक अनोखा तरीका अपनाया.

विज्ञापन
Read Time: 3 mins
फटाफट पढ़ें
Summary is AI-generated, newsroom-reviewed
  • फरीदाबाद के कबाड़ व्यापारी खान साहब ने खोए हुए 100 ग्राम सोने के गहने ईमानदारी से वापस लौटाए
  • अशोक शर्मा ने चोरी से बचाने के लिए सोने के गहनों को कबाड़ के बोरे में छिपा दिया था
  • दीपावली की सफाई के दौरान परिवार ने अनजाने में अपने कीमती गहनों को कबाड़ में बेच दिया था
क्या हमारी AI समरी आपके लिए उपयोगी रही?
हमें बताएं।

आज के दौर में जहां लोग छोटी-छोटी चीजों के लिए अपनी नीयत बदल लेते हैं, वहीं हरियाणा के फरीदाबाद से एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने इंसानियत और ईमानदारी पर हमारे भरोसे को और मजबूत कर दिया है. एक कबाड़ व्यापारी 'खान साहब' ने ईमानदारी का परिचय देते हुए एक परिवार के खोए हुए 100 ग्राम सोने के गहने वापस लौटा दिए.

चोरों से बचाने के चक्कर में 'कबाड़' हुआ सोना

घटना की शुरुआत पिछले साल जनवरी में हुई थी. फरीदाबाद के रहने वाले अशोक शर्मा अपने परिवार के साथ कुंभ के मेले में घूमने जा रहे थे. घर पीछे से सूना था, इसलिए चोरी के डर से उन्होंने एक अनोखा तरीका अपनाया. उन्होंने अपने घर का सारा कीमती सोना (करीब 10 तोले) एक पुराने डिब्बे में बंद किया और उसे कबाड़ के बोरे में छिपा दिया, ताकि किसी चोर की नजर उस पर न पड़े.  

दीपावली की सफाई में हुई बड़ी चूक

समय बीतता गया और परिवार वह डिब्बा बोरे में ही भूल गया. दीपावली के मौके पर जब घर की साफ-सफाई हुई, तो अनजाने में उस बोरे को 'कबाड़' समझकर खान साहब के कबाड़ गोदाम में बेच दिया गया. अशोक शर्मा और उनके परिवार को इस बड़ी गलती का अहसास तब हुआ, जब दिवाली पूजन के समय उन्होंने गहनों की तलाश शुरू की. पूरे परिवार के पैरों तले जमीन खिसक गई, क्योंकि जिस सोने को उन्होंने चोरों से बचाने के लिए छिपाया था, उसे वे खुद ही कबाड़ में दे चुके थे.

4 महीने बाद मिला 'ईमानदारी' का फल

करीब 4 महीने की लंबी तलाश और उम्मीद टूटने के बाद, कबाड़ी के मालिक खान साहब ने दरियादिली दिखाई. उन्होंने अपने गोदाम के ढेर सारे कबाड़ के बीच से उस डिब्बे को ढूंढ निकाला. खान साहब ने इसकी सूचना दी और एसीपी (ACP) जितेश मल्होत्रा की मौजूदगी में 15 लाख रुपये कीमत की वह ज्वेलरी अशोक शर्मा और उनके परिवार को सकुशल सौंप दी. ईमानदारी का कोई मजहब नहीं होता. खान साहब के इस कदम ने साबित कर दिया कि नेकदिली किसी भी दीवार से बड़ी होती है." एसीपी जितेश मल्होत्रा ने भी व्यापारी की इस ईमानदारी की सराहना की और इसे समाज के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण बताया.
 

Featured Video Of The Day
Harish Rana Verdict: 13 साल से कोमा में पड़े हरीश को Supreme Court ने दी इच्छामृत्यु की इजाजत | NDTV