- अंबाला के हनुमान मंदिर के सामने दस वर्षों तक भीख मांगने वाले व्यक्ति के पास मौत के बाद लाखों रुपये मिले
- मृतक लेखराज नाम का व्यक्ति ट्राइसाइकिल पर बैठकर भीख मांगता था और उसके पास नकदी एवं बैंक जमा थे
- उसके पास से 66 हजार रुपये नकद और दो अलग-अलग बैंकों में कुल तीन लाख चौंतीस हजार से अधिक रुपये मिले
अंबाला शहर से एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने हर किसी को हैरान कर दिया है. शहर के व्यस्त मंदिरों के बाहर सालों से ट्राइसाइकिल पर बैठकर भीख मांगने वाला एक व्यक्ति जिसे लोग लाचार समझकर चुपचाप कुछ रुपये दे दिया करते थे, उसकी मौत के बाद ऐसा खुलासा हुआ कि हर कोई दंग रह गया. उसकी मौत के बाद उसके पास से हजारों रुपये नकद और बैंक में लाखों रुपये जमा मिले.
बताया जा रहा है कि व्यक्ति की तबीयत काफी समय से खराब थी. हालात बिगड़ने पर सामाजिक संस्था वंदे मातरम दल ने मानवता दिखाते हुए उसे अस्पताल में भर्ती करवाया, लेकिन इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई. लेकिन असली चौंकाने वाली बात तो उसकी मौत के बाद सामने आई. जब उसके सामान की तलाशी ली गई तो उसमें से 66 हजार रुपये नकद बरामद हुए. इतना ही नहीं, जांच में पता चला कि उसके बैंक खाते में लगभग 3 लाख 32 हजार रुपये जमा थे.
10 साल से भीख मांग रहा था व्यक्ति
शहर की सबसे व्यस्त रेलवे रोड पर हनुमान मंदिर के सामने पिछले करीब दस वर्षों से एक ट्राइसाइकिल पर बैठा कमजोर और बुजुर्ग व्यक्ति लोगों की नजरों में रहता था. हाथ में कटोरा लिए वह राहगीरों से भीख मांगता था. ट्राइसाइकिल के पीछे लोहे का एक छोटा ट्रंक बंधा रहता था, जिसमें लोग सिक्के और कभी-कभार नोट भी डाल देते थे. पूरी उम्र यूं ही गुजर गई, लेकिन मौत के बाद उसकी सच्चाई ने सबको चौंका दिया. उसने अपनी जिंदगी भीख मांगते हुए गुजारी लेकिन मौत के बाद पता चला कि वह तो लाखों का मालिक था.
लेखराज नाम का यह व्यक्ति भले ही भीख मांगकर गुजारा करता था, लेकिन उसकी ट्राइसाइकिल की तलाशी लेने पर नोटों की गड्डियां बरामद हुईं. एक गड्डी में 50 हजार रुपये और दूसरी में 16,120 रुपये मिले. इसके अलावा उसके पास दो अलग-अलग बैंकों की पासबुक की प्रतियां भी मिलीं. जांच में सामने आया कि एक खाते में 3.32 लाख रुपये जमा थे, जबकि दूसरे खाते में 434 रुपये थे.
तबीयत खराब थी, 3 दिन चला इलाज लेकिन...
वंदे मातरम दल के सदस्य भरत ने बताया कि 9 फरवरी को तबीयत बिगड़ने पर किसी राहगीर ने हमें सूचना दी. टीम ने मौके पर पहुंचकर उसे सड़क से उठाया और अस्पताल में भर्ती कराया. तीन दिन तक चले इलाज के बाद उसकी अस्पताल में मौत हो गई. महाशिवरात्रि के दिन संगठन की ओर से उसका अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उसका कोई परिजन मौजूद नहीं था.
मौत के बाद क्या-क्या मिला?
पुलिस ने ट्राइसाइकिल से बंधे ट्रंक की जांच की तो उसमें कंबल, छाता, हवा भरने का पंप और दो जोड़ी कपड़ों के साथ नकदी मिली. 500-500 रुपये के नोटों की 50 हजार की गड्डी पर बैंक ऑफ इंडिया की मुहर थी, जो अक्टूबर में निकाले गए थे. इसके अलावा 16,120 रुपये अलग से मिले, जिनमें 500 के 32 नोट और बाकी खुले रुपये थे. यह रकम भी उसी बैंक से निकाली गई थी.
फिर क्यों मांग रहा था भीख?
जिस व्यक्ति को लोग मजबूर और बेसहारा समझ रहे थे, उसके पास लाखों की जमा पूंजी थी. अब सवाल यह उठता है कि आखिर वह व्यक्ति सड़कों पर भीख क्यों मांगता रहा? क्या यह मजबूरी थी, आदत थी या फिर भविष्य के डर से जोड़ी गई रकम?














