Haryana News: अगर आपकी उम्र 18 से 45 साल के बीच है, तो हरियाणा विधानसभा (Rajasthan Assembly) से आई यह खबर आपकी नींद उड़ाने के लिए काफी है. पिछले 6 सालों (जनवरी 2020 से जनवरी 2026) के भीतर प्रदेश के 17,973 युवाओं की मौत सिर्फ दिल का दौरा (Heart Attack) पड़ने से हुई है.
हर रोज 8 युवाओं की मौत
बुधवार को सदन में कांग्रेस नेता के सवाल के जवाब में सरकार ने जो डेटा रखा, उसने फिट दिखने वाले युवाओं की सेहत पर बड़ा सवालिया निशान लगा दिया है. आंकड़ों का गणित देखें तो हरियाणा में हर रोज औसतन 8 युवाओं का दिल धड़कना बंद हो रहा है. सबसे डरावनी बात यह है कि 2020 के मुकाबले 2025 तक आते-आते यह मौत का आंकड़ा 35% तक बढ़ गया है.
साल-दर-साल बढ़ता ग्राफ
सरकारी रिपोर्ट के अनुसार, 2020 के बाद से मौतों का सिलसिला थमा नहीं है:-
| साल | मृतकों की संख्या |
| 2020 | 2,394 मौतें |
| 2021 | 3,188 मौतें (कोविड का चरम काल) |
| 2022 | 2,796 मौतें |
| 2023 | 2,886 मौतें |
| 2024 | 3,063 मौतें |
| 2025 | 3,255 मौतें |
| जनवरी 2026 | मात्र 31 दिनों में 391 युवाओं ने दम तोड़ा |
यमुनानगर में 'डेथ रेट' सबसे ज्यादा
जिलों के आंकड़ों ने विशेषज्ञों को भी उलझा दिया है. यमुनानगर में पिछले 6 साल में कुल 2,400 से ज्यादा युवाओं की जान गई, जबकि रोहतक में यह संख्या मात्र 201 रही. वहीं, प्रदेश की हाई-टेक सिटी गुरुग्राम में कुल 594 युवाओं की मौत रिकॉर्ड की गई. आखिर एक ही राज्य के अलग-अलग जिलों में इतना बड़ा अंतर क्यों है, इसका जवाब फिलहाल किसी के पास नहीं है.
कोविड और वैक्सीन पर रहस्य बरकरार
विधानसभा में जब यह पूछा गया कि क्या इन 18,000 मौतों का कोई संबंध कोविड-19 संक्रमण या वैक्सीन से है, तो सरकार का जवाब और भी चौंकाने वाला था. सदन को बताया गया कि इस दिशा में अब तक कोई भी वैज्ञानिक अध्ययन या सर्वे नहीं कराया गया है. यानी, 18 हजार मौतों के बाद भी यह रहस्य बना हुआ है कि आखिर हरियाणा का युवा इतनी बेरहमी से 'साइलेंट अटैक' का शिकार क्यों हो रहा है?
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