lenskart controversy News: सूरत में Lenskart के ड्रेस कोड को लेकर शुरू हुआ विवाद अब सड़कों तक पहुंचने के साथ ही यह मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है. दरअसल, सरथाणा जकातनाका इलाके में स्थित Lenskart के स्टोर पर सोमवार को राष्ट्रीय बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने पहुंचकर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया. इन कार्यकर्ताओं ने कंपनी की कथित गाइडलाइन को हिंदू धार्मिक आस्था के खिलाफ बताते हुए नारेबाजी की. इसके बाद स्टोर के ग्लास पर स्वस्तिक का चिन्ह बनाया और फिर वहां मौजूद कर्मचारियों के माथे पर तिलक लगाकर विरोध दर्ज कराया. प्रदर्शनकारियों का कहना है कि किसी भी कंपनी को कर्मचारियों की धार्मिक पहचान और आस्था में हस्तक्षेप करने का अधिकार नहीं है.
दरअसल, यह पूरा विवाद उस समय शुरू हुआ, जब Lenskart की ‘एम्प्लॉयी ग्रूमिंग पॉलिसी' का एक दस्तावेज सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होने लगा. इस दस्तावेज में कथित तौर पर कर्मचारियों को बिंदी, तिलक जैसे धार्मिक प्रतीकों को पहनने से रोकने की बात कही गई थी, जिसके बाद लोगों में आक्रोश फैल गया. सोशल मीडिया पर कंपनी की आलोचना होने लगी और इसे धार्मिक स्वतंत्रता पर हमला बताया गया. विवाद बढ़ता देख कंपनी ने सफाई देते हुए माफी मांगी और नई गाइडलाइन जारी करने की बात कही, लेकिन इसके बावजूद विरोध थमता नजर नहीं आ रहा है.
कंपनी पर लगाए जा रहे हैं इस तरह के आरोप
इस पूरे मामले ने तब और गंभीर रूप ले लिया, जब सूरत के रहने वाले युवक झील वघासिया ने कंपनी पर गंभीर आरोप लगाए. झील वघासिया का दावा है कि उन्हें केवल तिलक और शिखा रखने की वजह से नौकरी से वंचित कर दिया गया. उन्होंने बताया कि उन्हें Lenskart की ओर से नौकरी के लिए कॉल आया था और उन्होंने सूरत के वेसु इलाके में इंटरव्यू भी दिया था, जहां उन्हें किसी भी तरह की धार्मिक पाबंदी के बारे में नहीं बताया गया, लेकिन जब वह मुंबई के ट्रेनिंग सेंटर पहुंचे, तो वहां कंपनी के अधिकारियों ने उन्हें साफ तौर पर कह दिया कि अगर उन्हें नौकरी जारी रखनी है, तो उन्हें तिलक हटाना होगा और शिखा कटवानी होगी.
झील वघासिया के अनुसार, उन्होंने कंपनी को समझाने की कोशिश की कि तिलक और शिखा उनकी धार्मिक पहचान और आस्था का हिस्सा है. इससे उनके काम पर कोई असर नहीं पड़ता है, लेकिन कंपनी के अधिकारियों ने उनकी एक नहीं सुनी और यहां तक कह दिया कि यदि उन्होंने इन धार्मिक प्रतीकों को नहीं हटाया, तो उन्हें नौकरी नहीं दी जाएगी. इतना ही नहीं, उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उनके हाथ पर बने धार्मिक टैटू को हटाने तक की बात कही गई. अंततः अपनी आस्था के साथ समझौता करने से इनकार करने पर उन्हें ट्रेनिंग सेंटर से बाहर कर दिया गया.
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इस कथित आरोप के बाद राष्ट्रीय बजरंग दल के कार्यकर्ता सक्रिय हो गए और उन्होंने सूरत में विरोध प्रदर्शन कर कंपनी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया. कार्यकर्ताओं ने मांग की है कि कंपनी सार्वजनिक रूप से माफी मांगे और भविष्य में ऐसी किसी भी गाइडलाइन को लागू न करने का स्पष्ट आश्वासन दे. फिलहाल, यह मामला धार्मिक स्वतंत्रता और कॉर्पोरेट नियमों के बीच टकराव का प्रतीक बनता जा रहा है, जिस पर अब व्यापक बहस छिड़ गई है.














