राष्ट्रपति भवन में पुतिन के लिए खास डिनर: अचारी बैंगन से केसर पुलाव तक जानिए क्यों खास था ये मेन्यू

राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के सम्मान में राष्ट्रपति भवन में आयोजित स्पेशल डिनर में भारत के पारंपरिक व्यंजनों की ऐसी थाली परोसी गई, जिसमें स्वाद, संस्कृति और मौसम की महक एक साथ सजी थी.

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रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को परोसे गए ये खास व्यंजन.

Putin Dinner: रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के सम्मान में आयोजित भव्य स्टेट बैंक्वेट में, राष्ट्रपति भवन ने भारत की पाक-परंपरा और क्षेत्रीय विविधता की झलक देने वाला एक शानदार मेन्यू पेश किया था. जिसमें प्रमुख रूप से अचारी बैगन और केसर पुलाव जैसे अन्य कई भारतीय व्यंजन भी शामिल किए गए थे. इस थाली में स्वाद, संस्कृति और मौसम की महक एक साथ सजी हुई थी. इस डिनर में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अलावा कई दूसरे मंत्री भी शामिल थे. यह डिनर इस दोस्ताना दौरे का एक हिस्सा था, जो 25 साल पुरानी भारत–रूस रणनीतिक साझेदारी को समर्पित है. तो चलिए जानते हैं कि पुतिन को भारतीय थाली में और क्या-क्या परोसा गया था.

इस थाली में सहजन के पत्तों और मूंग दाल से बना हल्का पौष्टिक सूप  मुरुंगेलाई चारू सूप था, वहीं एपेटाइजर में कश्मीर से लेकर पूर्वोत्तर तक की झलक शामिल थी पटाखेदार वेज झोल मोमो, काले चने के शिकम्पुरी कबाब, और कश्मीरी मशरूम डिशेस (गुच्ची मोरेल्स) खास चटनी के साथ परोसे गए थे.

बात करें मेन कोर्स की तो इसमें अचारी बैंगन, जाफरानी पनीर रोल (केसरिया पनीर), पालक–मेथी–मटर का साग, तंदूरी भरवां आलू, पीली दाल तड़का और रोटियो में लच्छा पराठा, मगज नान, मिस्सी रोटी आदि शामिल थे. और सबसे खास था ड्राई-फ्रूट और केसर पुलाव, जो थाली की शाही पहचान था.

इसके साथ ही मिठाई में बादाम का हलवा और केसर-पिस्ता कुल्फी और फ्रेश फ्रूट्स दिए गए थे. इस पूरे मेन्यू में हर व्यंजन ने भारत की पाक-संस्कृति, मसालों और क्षेत्रीय विविधता की झलक दिखाई दे रही है.

यह डिनर सिर्फ एक स्वागत भोज नहीं था बल्कि ये एक संदेश भी था. इस डिनर के जरिए भारत ने दिखाया कि उनकी संस्कृति और पाक परंपरा कितनी समृद्ध और अलग-अलग प्रकार की है. यह मेन्यू इस बात को दर्शाता था कि कश्मीर हो या दक्षिण भारत, भारतीय भोजन में हर हिस्से की एक अलग पहचान है.

क्या कहना चाहता है ये डिनर?

राष्ट्रपति भवन में पुतिन के लिए तैयार किए गए इस शाही मेन्यू में भारतीय पाक विरासत और भारत की क्षेत्रीय विविधता को एक साथ दिखाया गया था. ऐसे मौके यह याद दिलाते हैं कि खाना सिर्फ पेट भरने का जरिया नहीं, बल्कि बातचीत का एक माध्यम भी हो सकता है.

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(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)

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