Dadi Nani Ke Nuskhe: सर्दियों में क्यों फूलती है सांस, जानिए दादी-नानी के नुस्खे जो दिलाएंगे राहत

Dadi Nani Ke Nuskhe: सांस फूलना सिर्फ कमजोरी का लक्षण नहीं है, बल्कि कई गंभीर बीमारियों का संकेत है. सर्दियों में सांस फूलने की परेशानी सबसे ज्यादा होती है. आइए जानते हैं कुछ पुराने और कारगर नुस्खे जो इस समस्या का समाधान कर सकते हैं.

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Dadi Nani Ke Nuskhe: सांस फूलने पर करें ये देसी उपाय.

Dadi Nani Ke Nuskhe: आज की जीवनशैली में सीढ़ियों की जगह लिफ्ट और पार्क की जगह जिम ने ले ली है. अगर थोड़ा दूर चलना हो तो कई विकल्प उपलब्ध होते हैं. कम चलने की आदत कई बार परेशान करती है और थोड़ा सा चलने या सीढ़ियों पर चढ़ने पर ही सांस फूलने लगती है.  ऐसे में दादी-नानी के बताए कुछ देसी नुस्खे आपके काम आ सकते हैं. 

सर्दियों में सांस क्यों फूलती है?

सांस फूलना सिर्फ कमजोरी का लक्षण नहीं है, बल्कि कई गंभीर बीमारियों का संकेत है. सर्दियों में सांस फूलने की परेशानी सबसे ज्यादा होती है.

सर्दियों में दिल, फेफड़ों या रक्त में ऑक्सीजन की कमी होती है. वातावरण में मौजूद ठंडी हवा फेफड़ों और रक्त वाहिकाओं को सिकुड़ने का काम करती है, जिससे चलते-चलते गले में रूखापन, हांफना और थकान महसूस होने लगती है, लेकिन ये कमजोर दिल, फेफड़ों की कमजोरी और थायरॉयड का असंतुलन दिखाता है. कभी-कभी ये लक्षण खून की कमी की तरफ भी इशारा करते हैं. अगर आप भी इस परेशानी से जूझ रहे हैं तो आयुर्वेद में उसके उपाय भी बताए गए हैं.

तुलसी और लौंग का काढ़ा

सर्दियों में तुलसी और लौंग का काढ़ा का सेवन करने से आराम मिलेगा. सुबह के समय तुलसी, अदरक और लौंग का काढ़ा बनाकर लिया जाए तो फेफड़ों की सिकुड़न कम होती है और ऑक्सीजन का प्रवाह तेज होता है, जिससे फेफड़े सही तरीके से काम करना शुरू कर देते हैं.

मेथी और गुड़

इसके अलावा, रात में भिगोई मेथी सुबह गुड़ के साथ लेने से भी फायदा मिलता है. ये मिश्रण फेफड़ों को मजबूती प्रदान करता है और सर्द हवा भी फेफड़ों को नुकसान नहीं पहुंचा पाती.

शहद और अदरक

भारी और तला-भूना, मसालेदार खाना भी डायाफ्राम और फेफड़ों पर नकारात्मक असर डालती है. तला-भूना खाने से पेट और डायाफ्राम पर असर पड़ता है और डायाफ्राम फेफडों को संकुचित करने का काम करता है. इसलिए सात्विक भोजन और कम मसालेदार भोजन करना चाहिए. इसके अलावा शहद और अदरक के रस का सेवन भी किया जा सकता है. इससे कफ कम होगा और सांस लेने में परेशानी कम होगी.

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नियमित रूप से प्राणायाम

फेफड़ों को मजबूत बनाने और हार्मोन को संतुलित करने के लिए रोजाना नियमित रूप से प्राणायाम करना भी जरूरी है. रोजाना सुबह अनुलोम-विलोम, भ्रामरी और डीप ब्रीदिंग का अभ्यास करें. इससे शरीर में ऑक्सीजन लेवल बढ़ाता है, श्वसन नलिकाएं शांत रहती है और फेफड़ों की क्षमता बढ़ती है.

गुनगुना पानी 

साथ ही कोशिश करें कि पूरे दिन गुनगुना पानी पीएं. इससे फेफड़ों में होना वाला संक्रमण कम होता है.

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(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)

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