Yashoda Jayanti 2026 Kab Hai: हिंदू धर्म में जिस मां यशोदा के बगैर कृष्ण कथा अधूरी मानी जाती है, उनकी जयंती हर साल फाल्गुन मास के कृष्णपक्ष की षष्ठी तिथि पर मनाई जाती है. इस पावन पर्व संबंध मां की उस ममता और वात्सल्य सुख से है जो मां यशोदा ने भगवान श्री कृष्ण का लालन-पालन करके प्राप्त किया था. हिंदू मान्यता के अनुसार यशोदा जयंती के दिन विधि-विधान से भगवान माता यशोदा और भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप की पूजा करने पर विवाहित स्त्रियों की सूनी गोद भरती है. यशोदा जयंती के दिन रखे जाने वाले जिस व्रत से संतान सुख की प्राप्ति होती है, आइए उसके बारे में विस्तार से जानते हैं.
यशोदा जयंती कब है?
पंचांग के अनुसार जिस फाल्गुन मास के कृष्णपक्ष की षष्ठी तिथि को यशोदा जयंती के नाम से जाना जाता है, वह इस साल 07 फरवरी 2026, शनिवार के दिन पूर्वाह्न 01:18 बजे प्रारंभ होकर अगले दिन 08 फरवरी 2026 को पूर्वाह्न 02:54 बजे समाप्त होगी. ऐसे में उदया तिथि के अनुसार यशोदा जयंती का व्रत और पूजन 07 फरवरी 2026 को किया जाएगा.
यशोदा जयंती की पूजा विधि
यशोदा जयंती की पूजा करने के लिए प्रात:काल सूर्योदय से पहले उठकर स्नान-ध्यान करने के बाद तन और मन से पवित्र हो जाना चाहिए. इसके बाद मां यशोदा का आशीर्वाद पाने के लिए विधि-विधान से व्रत करने का संकल्प करना चाहिए. इसके बाद अपने पूजा घर या फिर घर के ईशान कोण में मां यशोदा और भगवान श्री कृष्ण के चित्र या मूर्ति को एक चौकी पर पीला कपड़ा बिछाकर रखें.
फिर गंगाजल या फिर शुद्ध जल छिड़क कर रोली, चंदन, हल्दी, धूप, दीप, फल, तुलसी दल, मिष्ठान आदि भगवान श्री कृष्ण और मां यशोदा को अर्पित करें. इसके भगवान श्री कृष्ण को विशेष रूप से माखन मिश्री का भोग लगाएं और उनके मंत्र का जप या फिर गोपाल सहस्त्रनाम का पाठ करें. पूजा के अंत में मां यशोदा और भगवान श्री कृष्ण की आरती करें और सभी को प्रसाद बांटकर स्वयं भी ग्रहण करें. यशोदा जयंती के दिन व्रत करने वाली महिला को नियम-संयम का पालन करते हुए फलाहार करना चाहिए.
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यशोदा जयंती का धार्मिक महत्व
यशोदा जयंती का व्रत महिलाएं भगवान श्री कृष्ण जैसी गुणी संतान की प्राप्ति और मां यशोदा जैसा वात्सल्य सुख पाने के लिए करती हैं. हिंदू मान्यता के अनुसार यशोदा जयंती पर विधि-विधान से पूजा करने पर न सिर्फ संतान प्राप्ति में आ रही बाधाएं दूर होती हैं बल्कि जिन लोगों की संतान होती है, उसका सुख-सौभाग्य बढ़ता है.
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.)














