Blue Sapphire: हिंदू ज्योतिष में रत्नों का विशेष महत्व माना गया है. इनमें नीलम को सबसे प्रभावशाली और तेज असर करने वाला रत्न कहा जाता है. मान्यता है कि यह रत्न शनि ग्रह को मजबूत करता है और व्यक्ति के जीवन में बड़ा बदलाव ला सकता है. सही तरीके से पहना जाए तो यह व्यक्ति को ऊंचाइयों तक पहुंचा सकता है, वहीं गलत तरीके से पहनने पर नुकसान भी दे सकता है. इसलिए इसे धारण करने से पहले पूरी जानकारी होना जरूरी है. आइए ज्योतिषाचार्य डॉक्टर गौरव कुमार दीक्षित से जानते हैं नीलम की अंगूठी किसे पहननी चाहिए और इसके नियम क्या हैं.
किन लोगों को पहनना चाहिए नीलम?
डॉक्टर गौरव कुमार दीक्षित बताते हैं, नीलम मुख्य रूप से मकर और कुंभ राशि के लोगों के लिए शुभ माना जाता है. इन राशियों के स्वामी शनि देव हैं, इसलिए यह रत्न उनके लिए विशेष लाभकारी होता है. इसके अलावा यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में शनि की स्थिति अच्छी हो, तो मिथुन, कन्या और तुला राशि वाले भी इसे पहन सकते हैं. हालांकि, बिना कुंडली जांच के इसे पहनना उचित नहीं माना जाता.
नीलम धारण करने के लिए समय और विधि का विशेष ध्यान रखना चाहिए. इसे शनिवार के दिन, खासकर शुक्ल पक्ष के पहले शनिवार को सूर्यास्त के बाद पहनना सबसे शुभ माना जाता है. अंगूठी चांदी या पंचधातु की होनी चाहिए और इसे सीधे हाथ की मध्यमा उंगली में पहना जाता है. पहनने से पहले अंगूठी को गंगाजल, गोमूत्र और कच्चे दूध से शुद्ध करना चाहिए. इसके बाद शनि देव का ध्यान करके इसे धारण करें.
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ज्योतिषाचार्य कहते हैं, नीलम को धारण करने से जीवन में सकारात्मक बदलाव देखने को मिलते हैं. यह धन-संपत्ति में वृद्धि, नौकरी और व्यापार में तरक्की दिलाने में सहायक माना जाता है. जिन लोगों पर शनि की साढ़ेसाती या ढैया चल रही हो, उनके लिए यह विशेष राहत देने वाला रत्न है. सही तरीके से पहनने पर ये रंक को भी राजा बना सकता है.
इन बातों का रखें घ्याननीलम बहुत तेज असर करने वाला रत्न है, इसलिए इसे पहनने से पहले किसी अनुभवी ज्योतिषी से सलाह जरूर लें. अगर इसे पहनने के बाद किसी तरह की परेशानी महसूस हो, तो तुरंत इसे उतार देना चाहिए. हमेशा शुद्ध और असली नीलम ही धारण करें, क्योंकि नकली रत्न का कोई लाभ नहीं मिलता.














