Shani Devta Aur Laxmi ji Ki katha: सनातन परंपरा में शनि देवता को कर्मफल का दाता या फिर न्याय का देवता माना गया है. जो आम इंसान से लेकर देवताओं तक को उनके किए गये कर्मों का फल प्रदान करते हैं. एक बार धन की देवी माता लक्ष्मी और शनि देवता के बीच इस बात को लेकर तकरार शुरू हो गई कि उन दोनों में से आखिर कौन बड़ा है. धन की देवी खुद को श्रेष्ठ बताते हुए तर्क दे रही थीं कि दुनिया में उनकी वजह से खुशहाली आती है और लोगों की जरूरतें पूरी होती हैं तो शनिदेव का कहना था कि आपके कारण लोग माया के चक्कर में पड़ते हैं और गलत रास्ते पर निकल जाते हैं.
तब माता लक्ष्मी ने शनिदेव से कहा कि आप लोगों के मन में अपना डर पैदा करते हैं तो इस पर शनि देवता ने कहा कि आप गलत और सही दोनों व्यक्ति के यहां अपनी कृपा बरसाती हैं और किसी के साथ लंबे समय तक नहीं रहती हैं. तब लक्ष्मी जी ने कहा कि जो लोग मुझे अपने पास बुलाने के लिए श्रद्धापूर्वक प्रार्थना करते हैं, मैं उनके पास जाती हूं, जबकि लोग आपसे हमेशा डरते हैं और जाने के लिए प्रार्थना करते हैं. तब शनिदेव ने कहा जो लोग गलत रास्ते पर चले जाते हैं, उन्हें ठीक करके सही रास्ते पर लाना मेरी जिम्मेदारी है.
ब्रह्मा और विष्णु भी नहीं कर पाए फैसला
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इसके बाद जब दोनों के बीच यह फैसला नहीं हो पाया कि उनमें से कौन बड़ा है तो वे भगवान ब्रह्मा जी के पास गये। शनिदेव और लक्ष्मी जी ने उनसे कहा कि हे भगवन! आप बताइये कि हम दोनों में कौन बड़ा है? यह सवाल सुनते ही ब्रह्मा जी धर्मसंकट में पड़ गये. उन्होंने तुरंत युक्ति निकाली और कहा कि ये फैसला तो श्री हरि ही कर सकते हैं. इसके बाद वे तीनों जगत के पालनहार भगवान श्री विष्णु के पास पहुंच गये. भगवान विष्णु के सामने जैसे ही यह सवाल आया, उन्होंने बड़ी समझदारी से इसका हल निकालने के लिए देवर्षि नारद की तरफ इशारा करते हुए कहा कि अब तो इसका उत्तर नारद मुनि ही देंगे. नारद मुनि के सामने जब यह यक्ष प्रश्न आया तो वे सन्न रह गये. बाद में उन्होने खुद को संभालते हुए कहा बड़ी समझदारी के साथ कुछ ऐसा जवाब दिया कि धन की देवी मां लक्ष्मी और शनिदेव दोनों लाजवाब हो गये.
तब देवर्षि नारद ने दिया ये बड़ा तर्क
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देवर्षि नारद ने कहा कि हे माता लक्ष्मी और शनिदेव! आप दोनों ही महान हैं. देवी आप जब किसी की तरफ जब जाती हैं तो तो महान होती हैं, आपके शुभ प्रभाव से वह बड़ा आदमी बन जाता है लेकिन जब आप उसके पास से जाती हैं तो वह अपनी स्थिति से कमतर होता चला जाता है. फिर देवर्षि नारद ने शनि देवता से कहा - हे शनिदेव! आप जब आप ढाई साल या साढ़े सात साल बाद किसी की जिंदगी से निकलकर जाते हैं तब आप महान होते हैं, लेकिन जब आप किसी के जीवन में प्रवेश करते हैं तो आप उतने महान नहीं होते हैं क्योंकि आपके आते ही इंसान कमतर होने लगता है. ऐसे में मेरी दृष्टि में आप दोनों ही महान या फिर कहें बड़े हैं. देवर्षि नारद की बात सुनकर दोनों संतुष्ट हुए और प्रसन्न होकर अपने धाम को चले गये.
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.)














