Vrat kaise rakhe: व्रत का पूरा पुण्यफल पाना है तो जान लीजिए जानें पूजा से लेकर पारण तक के सभी जरूरी नियम

Vrat Ke Niyam: हिंदू धर्म में तमाम तरह के देवी-देवताओं को प्रसन्न करने के लिए व्रत का विधान है. इसमे अपने आराध्य की पूजा के साथ उपवास की पंरपरा सदियों से चली आ रही है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस व्रत को सफल बनाने और उसका पुण्यफल पाने के लिए कुछेक नियमों का पालन करना बेहद जरूरी माना गया है, यदि नहीं तो जानने के लिए जरूर पढ़ें ये लेख.

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Vrat Kaise karte Hain: व्रत रखने की विधि एवं नियम
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Hindu vrat rules and rituals: सनातन परंपरा में सुख और सौभाग्य की मनोकामना को पूरा करने के लिए 33 कोटि देवी-देवताओं की पूजा की जाती है. अपने आराध्य को प्रसन्न करके मनचाहा वरदान पाने के लिए लोग अलग-अलग प्रकार से जप-तप और व्रत करते हैं. यदि बात करें ईश्वर के लिए रखे जाने वाले व्रत और उपवास की तो इसके लिए हिंदू धर्म में कुछेक नियम बताए गये हैं, ​जिसकी अनदेखी करने वाले व्यक्ति को संबंधित देवी देवता का आशीर्वाद या फिर कहें व्रत का पुण्यफल नहीं प्राप्त होता है. यदि आपको भी लगता है कि लंबे समय से किये जा रहे व्रत को अब तक कोई पुण्यफल नहीं प्राप्त हो पाया है तो आपको उसे सफल बनाने के लिए नीचे दिये गये नियमों को जरूर फॉलों करना चाहिए. 

व्रत क्यों रखा जाता है?

हिंदू धर्म में तमाम तीज-त्योहार और देवी-देवताओं से जुड़ी जयंती और शुभ दिनों में रखे जाने वाले व्रत का बहुत ज्यादा महत्व माना गया है. जप और तप की तरह व्रत भी ईश्वरीय कृपा पाने का एक माध्यम माना गया है. जिसके करने पर व्यक्ति तन और मन से शुद्ध होकर अपनी इंद्रियों को काबू करने का प्रयास करता है. व्रत के पुण्य प्रभाव से साधक को सुख-सौभाग्य और संबंधित देवी या देवता का आशीर्वाद प्राप्त होता है. व्रत न सिर्फ आस्था बल्कि सेहत की दृष्टि से भी अच्छा माना गया है. 

व्रत रखने के नियम क्या हैं?

  • सनातन परंपरा में व्रत पापों से मुक्ति और पुण्य की प्राप्ति की कामना के लिए किया जाता है. जिसे शारीरिक एवं मानसिक रूप से सक्षम होने पर ही पूरी आस्था और विश्वास के साथ करना चाहिए. 
  • हिंदू मान्यता के अनुसार किसी भी देवी-देवता या फिर ग्रह विशेष के लिए व्रत की हमेशा शुभ समय में शुरुआत करना चाहिए. 
  • व्रत को प्रारंभ करने से पहले सबसे पहले तन और मन से पवित्र होना चाहिए फिर स्वच्छ वस्त्र धारण करने के बाद अपने आराध्य की मूर्ति या चित्र के सामने खडत्रे होकर अथवा संबंधित देवी-देवता का ध्यान करते हुए उनके व्रत को विधि-विधान और नियम-संयम के साथ करने का संकल्प करना चाहिए. 
  • हिंदू मान्यता के अनुसार व्रत वाले दिन अपने आराध्य देवी या देवता को उनकी प्रिय वस्तुएं, प्रिय रंग के पुष्प, फल, वस्त्र और प्रिय पेड़ों के पत्ते-पत्तियां अर्पित करनी चाहिए. 
  • हिंदू मान्यता के अनुसार किसी भी व्रत में की जाने वाली पूजा में कथा को कहने और उसे श्रद्धापूर्वक सुनने का बहुत महत्व माना गया है. ऐसे में व्रत की पूजा के दौरान संबंधित देवी-देवता की गुणगान करने वाली कथा और आरती अवश्य कहें. 
  • व्रत की पूजा करने के बाद अपने से बड़ों का पैर छूकर आशीर्वाद अवश्य लेना चाहिए. 
  • हिंदू मान्यता के अनुसार व्रत वाले दिन व्यक्ति को पूरी तरह से ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए. इस नियम की अनदेखी करने पर व्रत का पुण्यफल नहीं प्राप्त होता है. 
  • हिंदू मान्यता के अनुसार व्रत में व्यक्ति को अन्न का सेवन नहीं करना चाहिए बल्कि इसकी जगह दूध, दही, फल, जल, आदि का सेवन करना चाहिए. 
  • हिंदू मान्यता के अनुसार संबंधित देवी-देवता या ग्रह विशेष का व्रत के लिए निषेध की गई वस्तु का सेवन भूलकर भी नहीं करना चाहिए. जैसे शुक्रवार के व्रत में खट्टी चीजों का सेवन नहीं किया जाता है तो वहीं एकादशी व्रत में भूलकर भी चावल का सेवन नहीं किया जाता है. 
  • व्रत वाले दिन भूलकर भी दिन में नहीं सोना चाहिए. हिंदू मान्यता के अनुसार दिन में सोने से व्रत का पुण्यफल समाप्त हो जाता है. 
  • हिंदू मान्यता के अनुसार व्रत करने वाले व्यक्ति को भूलकर भी क्रोध, ईर्ष्या, चुगली, निंदा आदि कार्य नहीं करना चाहिए.
  • व्रत वाले दिन खाली समय में संबंधित देवी या देवता से जुड़े मंत्रों का जप, भजन, कीर्तन या फिर मौन रहकर ध्यान करना चाहिए. 

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  • व्रत की सफलता और उसका पुण्यलाभ पाने के लिए व्यक्ति को अपने सामर्थ्य के अनुसार संबंधित देवी-देवता की प्रिय चीजों का दान किसी जरूरतमंद व्यक्ति या फिर मंदिर के पुजारी को दान करना चाहिए. 
  • हिंदू मान्यता के अनुसार व्रत वाले दिन किसी दूसरे व्यक्ति के द्वारा दिया गया अन्न या फल आदि का सेवन करने से बचना चाहिए. हिंदू मान्यता के अनुसार यदि आप ऐसा करते हैं तो उसका पुण्यफल दूसरे व्यक्ति को प्राप्त होता है. 
  • व्रत को नियमपूर्वक करने की तरह उसका नियम के साथ पारण करना भी जरूरी माना गया है. ऐसे में व्रत का पारण हमेशा शुभ मुहूर्त में सही तरीके से सात्विक भोजन आदि ग्रहण करके करना चाहिए.

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.)

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