Vaikasi Visakam: वैकासी विसाकम 2026 कब है? जानें सही तारीख, रीति-रिवाज और महत्व

Vaikasi Visakam: वैकासी विशाकम शनिवार, 30 मई 2026 को मनाया जाएगा. यह दक्षिण भारत, विशेषकर तमिलनाडु में भगवान कार्तिकेय का जन्मदिन माना जाता है. इस दिन विशेष पूजा, अनुष्ठान और कावड़ी यात्राएं की जाती हैं.

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Vaikasi Visakam 2026

Vaikasi Visakam 2026: वैकासी विसाकम एक खास त्योहार है. यह तमिल महीने 'वैकासी' (मई-जून) में विशाखा नक्षत्र के दौरान मनाया जाने वाला एक प्रमुख तमिल हिंदू त्योहार है, जो भगवान मुरुगन यानी कार्तिकेय की जयंती के रूप में मनाया जाता है. तमिल कैलेंडर के अनुसार, इस दिन को भगवान मुरुगन के जन्मदिन के रूप में भी मनाया जाता है. यह त्योहार उस दिन मनाया जाता है जब विसाकम नक्षत्र (Visakam Nakshatra) पड़ता है. यह नक्षत्र वैकासी महीने में आता है, जो तमिल कैलेंडर का एक महत्वपूर्ण महीना है.

Vaikasi Visakam 2026 कब है?

  • विसाकम नक्षत्र शुरू होगा- 29 मई 2026, सुबह 10:38 बजे
  • विसाकम नक्षत्र समाप्त होगा- 30 मई 2026, दोपहर 1:20 बजे

Vaikasi Visakam का महत्व

हिंदू शास्त्रों के अनुसार, Vaikasi Visakam तमिल लोगों के लिए बहुत खास त्योहार है. इस दिन को भगवान मुरुगन के जन्मदिवस के रूप में मनाया जाता है. दक्षिण भारत में लोग इस त्योहार को बहुत धूमधाम और उत्साह के साथ मनाते हैं. मान्यता है कि इसी शुभ दिन पर भगवान मुरुगन, जिन्हें कार्तिकेय भी कहा जाता है, का जन्म हुआ था. वे भगवान शिव और माता पार्वती के पुत्र हैं. भगवान मुरुगन को प्राचीन तमिल लोगों का मुख्य देवता भी माना जाता है. पौराणिक कथाओं के अनुसार, उनका जन्म पूर्णिमा के दिन और विशाखा नक्षत्र (Visakam Nakshatra) में हुआ था. भगवान मुरुगन को एक महान योद्धा माना जाता है और वे साहस, निडरता और वीरता का प्रतीक हैं.

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Vaikasi Visakam 2026 कैसे मनाया जाता है?

दक्षिण भारत में यह त्योहार बहुत धूमधाम से मनाया जाता है. लोग अपने घरों को फूलों से सजाते हैं, रंगोली बनाते हैं और मंदिर जाकर भगवान कार्तिकेय की पूजा करते हैं. यह दिन अच्छाई की बुराई पर जीत का प्रतीक माना जाता है.

  • भक्त मंदिरों में जाकर भगवान मुरुगन का अभिषेक करते हैं, जिसमें पंचामृत चढ़ाया जाता है.
  • भगवान को नारियल और मिठाई का भोग लगाया जाता है.
  • हवन और यज्ञ किए जाते हैं और वैदिक मंत्रों का जाप किया जाता है.
  • कई लोग इस दिन व्रत भी रखते हैं और शाम को सात्विक भोजन करके व्रत खोलते हैं.
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