Somnath Amrit Mahotsav: सोमनाथ की 75वीं वर्षगांठ का आज ऐतिहासिक समारोह, जानिए इस मंदिर का इतिहास

Somnath Mandir Ithihas: इस साल सोमनाथ मंदिर पर हुए पहले हमले के 1,000 साल और इसके पुनर्निर्माण के बाद दोबारा उद्घाटन के 75 साल पूरे होने पर ऐतिहासिक समारोह 'सोमनाथ स्वाभिमान पर्व' का आयोजन किया जा रहा है. इसी कड़ी में आज हम आपको सोमनाथ मंदिर का इतिहास बताने जा रहे हैं. आइए जानते हैं...

विज्ञापन
Read Time: 3 mins
सोमनाथ मंदिर का इतिहास

Somnath Temple History: गुजरात के सौराष्ट्र क्षेत्र में स्थित सोमनाथ मंदिर को भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में पहला ज्योतिर्लिंग माना जाता है. यह स्थान सिर्फ एक मंदिर नहीं, बल्कि आस्था और विश्वास का बड़ा केंद्र है, जहां हर साल देशभर से लाखों श्रद्धालु दर्शन करने पहुंचते हैं.  इस साल मंदिर पर हुए पहले हमले के 1,000 साल और इसके पुनर्निर्माण के बाद दोबारा उद्घाटन के 75 साल पूरे होने पर ऐतिहासिक समारोह 'सोमनाथ स्वाभिमान पर्व' का आयोजन किया जा रहा है. इस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी शामिल होंगे. साथ ही पीएम मोदी 'विशेष महा पूजा', 'कुंभाभिषेक' और 'ध्वजारोहण' समारोह में भी भाग लेंगे. इसी कड़ी में आज हम आपको सोमनाथ मंदिर का इतिहास बताने जा रहे हैं. आइए जानते हैं...

यह भी पढ़ें: Mangal Gochar 2026: मेष के मंगल गोचर से बनने वाला पंचमहापुरुष और राजयोग आखिर किन राशियों की पलटेगा किस्मत?

सोमनाथ मंदिर का इतिहास

श्री सोमनाथ महादेव को पहला आदि ज्योतिर्लिंग माना जाता है और यह वही पवित्र स्थान है, जहां चंद्रमा ने भगवान शिव की तपस्या कर उनका आशीर्वाद लिया था. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, चंद्र देव का विवाह दक्ष प्रजापति की 27 बेटियों से हुआ था, लेकिन वे रोहिणी को अधिक प्रेम देते थे, जिससे दुखी होकर दक्ष ने उन्हें श्राप दे दिया और उनकी रोशनी खत्म होने लगी. प्रजापिता ब्रह्मा की सलाह पर चंद्रमा प्रभास तीर्थ पहुंचे और भगवान शिव की घोर भक्ति की. चंद्रमा की तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें श्राप से मुक्ति दी.

Photo Credit: Facebook@Shree Somnath Temple Live Darshan - Faceboo

 मान्यता है कि पहले चंद्रमा ने सोने का, फिर रावण ने चांदी का और बाद में भगवान श्रीकृष्ण ने चंदन की लकड़ी से सोमनाथ मंदिर का निर्माण कराया. शास्त्रों के अनुसार, सोमनाथ ज्योतिर्लिंग की प्राण-प्रतिष्ठा त्रेता युग में हुई थी और यह मंदिर प्राचीन काल से आज तक लाखों श्रद्धालुओं के लिए आस्था और प्रेरणा का प्रतीक रहा है.

भगवान कृष्ण से भी कनेक्शन

सोमनाथ में स्थित हरि-हर तीर्थधाम वह पवित्र स्थान है, जहां भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी निजधाम प्रस्थान लीला दिखाई थी. मान्यता है कि जिस जगह भगवान श्रीकृष्ण को एक शिकारी के तीर से चोट लगी थी, उसे भालका तीर्थ कहा जाता है. तीर लगने के बाद भगवान श्रीकृष्ण हिरन, कपिला और सरस्वती नदियों के पवित्र संगम स्थल पर पहुंचे, जहां इन नदियों का मिलन समुद्र से होता है. इसके बाद भगवान श्रीकृष्ण ने हिरन नदी के शांत और पवित्र तट पर अपनी दिव्य देह त्याग कर निजधाम को प्रस्थान किया, जिससे यह स्थान श्रद्धालुओं के लिए बेहद पूजनीय माना जाता है.

यह भी पढ़ें: Bahuchara Mata: कहां है किन्नरों की कुलदेवी का मंदिर, जानें इनकी पूजा का महत्व और पौराणिक कथा

Featured Video Of The Day
Yogi Cabinet Expansion 2026: कैबिनेट विस्तार से CM योगी ने कैसे साधे सारे समीकरण? UP News
Topics mentioned in this article