कर्नाटक के इस मंदिर में दान ने तोड़ा र‍िकॉर्ड, भक्‍तों ने दिया लाखों का सोना और रुपया, ग‍िनने में लग गए 4 द‍िन

कर्नाटक के उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र में स्थित प्रसिद्ध श्री रेणुका येल्लम्मा मंदिर में इस बार 3.07 करोड़ रुपये का भारी दान संग्रह हुआ है. मंदिर की दान पेटियों से प्राप्त इस राशि की गणना पिछले सप्ताह शुरू होकर इस सप्ताह संपन्न हुई.

विज्ञापन
Read Time: 3 mins
कर्नाटक के इस मंदिर में हुआ करोड़ों का दान

Shri Renuka Yellamma Temple: कर्नाटक के उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र में स्थित प्रसिद्ध श्री रेणुका येल्लम्मा मंदिर में इस बार 3.07 करोड़ रुपये का भारी दान संग्रह हुआ है. मंदिर की दान पेटियों से प्राप्त इस राशि की गणना पिछले सप्ताह शुरू होकर इस सप्ताह संपन्न हुई. इस दान संग्रह की सबसे उल्लेखनीय बात यह रही कि नकद राशि की तुलना में श्रद्धालुओं द्वारा अर्पित किए गए सोने और चांदी के आभूषणों की मात्रा कहीं अधिक है.

कितना है मंदिर का कुल दान ?

श्री रेणुका येल्लम्मा मंदिर में दान की गिनती 9 मार्च को शुरू हुई और 12 मार्च तक चली. इस दौरान मंदिर का कुल दान 3.07 करोड़ रुपये पाया गया, जिसमें 2.78 करोड़ रुपये नकद, 16.16 लाख रुपये मूल्य के 100 ग्राम सोने के आभूषण और 12.35 लाख रुपये मूल्य के 4 किलो 547 ग्राम चांदी के आभूषण शामिल हैं. दान की गिनती को मंदिर के कर्मचारियों और छात्रों ने मिलकर मंदिर प्रशासन की निगरानी और गुप्त तरीके से पूरा किया.

यह भी पढ़ें: Papmochani Ekadashi 2026: पापमोचनी एकादशी पर करें ये 4 उपाय, ज्योतिषाचार्य ने बताया वैवाहिक जीवन और करियर की समस्याओं से मिलेगा छुटकारा

श्री रेणुका येल्लम्मा मंदिर का महत्व?

बता दें कि भगवान विष्णु के छठे अवतार भगवान परशुराम की माता के रूप में पूजी जाने वाली मां रेणुका येल्लम्मा कर्नाटक का प्रसिद्ध मंदिर है और सिर्फ देश से ही नहीं, बल्कि विदेश से भी भक्त मां का आशीर्वाद लेने के लिए पहुंचते हैं. यहां जगतजननी को येल्लम्मा कहकर पुकारा जाता है, जो पूरे जगत का पालन पोषण करती है.

मंदिर का निर्माण रायबाग के राजा बोमाप्पा ने 1514 में करवाया था. मंदिर का बनाव दक्षिण भारतीय शैली का उत्कृष्ट उदाहरण है, जिसमें चालुक्य, राष्ट्रकूट और द्रविड़ शैलियों तीनों शैलियों का अंश देखने को मिलता है. मंदिर की दीवारों पर जटिल नक्काशी की गई है और मंदिर में एक पवित्र जल स्रोत है. माना जाता है कि पवित्र जल स्रोत भक्तों के शारीरिक और मानसिक विकारों को दूर करता है. भक्त इस पवित्र जल को अपने साथ घर भी लेकर जाते हैं.

Advertisement

गर्भगृह में मौजूद मां की प्रतिमा भी अद्भुत है, जिसे स्वयंभू माना जाता है. प्रतिमा के हाथ बिना अस्त्र के ऊपर की तरफ उठे हैं. ऐसा लगता है कि मां खुद भक्तों को साक्षात आशीर्वाद दे रही हैं. मंदिर में दिसंबर के महीने में मां को प्रसन्न करने के लिए धार्मिक मेला लगता है, जिसमें लाखों की संख्या में भक्त विदेशों से भी आते हैं.

Featured Video Of The Day
NDTV Creators Manch 2026 पर दिखेंगे Prasoon Joshi, लिरिक्स लीजेंड CBFC चेयरमैन की धमाकेदार एंट्री
Topics mentioned in this article