Sheetala Ashtami 2025: शीतला अष्टमी पर करें ये 3 काम, मिलेगा माता का आशीर्वाद, घर आएगी खुशहाली

Sheetala Ashtami Date: शीतला अष्टमी पर मान्यतानुसार शीतला माता की पूजा की जाती है. जानिए मार्च में किस दिन है शीतला अष्टमी और किस तरह पाई जा सकती है शीतला माता की कृपा. 

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Basoda Kab Hai: शीतला अष्टमी को बसौड़ा, बूढ़ा बसौड़ा और बसियौरा भी कहा जाता है. 

Sheetala Ashtami 2025: पंचांग के अनुसार, कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि पर शीतला अष्टमी का व्रत रखा जाता है. शीतला अष्टमी की विशेष धार्मिक मान्यता होती है. इसे अलग-अलग स्थानीय भाषाओं में अलग-अलग नाम से पुकारा जाता है. कहीं शीतला अष्टमी को बसौड़ा (Basoda) कहते हैं तो कहीं बूढ़ा बसौड़ा और बसियौरा के नाम से इस व्रत को जानते हैं. माना जाता है कि शीतला अष्टमी का व्रत करने पर संतान की सेहत अच्छी रहती है, घर-परिवार में खुशहाली आती है, रोगों से मुक्ति मिलती है और शीतला माता अपनी कृपादृष्टि भक्तों पर बनाए रखती हैं. ऐसे में यहां जानिए इस साल मार्च में किस दिन रखा जा रहा है शीतला अष्टमी का व्रत और किस तरह शीतला अष्टमी के कुछ उपाय (Sheetala Ashtami Upay) माता शीतला को कर सकते हैं प्रसन्न. 

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कब है शीतला अष्टमी | Sheetala Ashtami Date | Kab Hai Sheetala Ashtami 

शीतला अष्टमी इस साल 22 मार्च के दिन मनाई जा रही है. पंचांग के अनुसार, चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि 22 मार्च से शुरू होगी और इस तिथि का समापन अगले दिन 23 मार्च की सुबह 5 बजकर 23 मिनट पर हो जाएगा. उदया तिथि को ध्यान में रखते हुए 22 मार्च, शनिवार के दिन शीतला अष्टमी का व्रत रखा जाएगा और शीतला माता की पूजा होगी. 

शीतला अष्टमी की पूजा का शुभ मुहूर्त 

22 मार्च, शनिवार के दिन शीतला अष्टमी या बसौड़ा का व्रत रखा जाएगा. इस दिन पूजा का शुभ मुहूर्त (Puja Shubh Muhurt) सुबह 6 बजकर 16 मिनट पर शुरू होगा इसका समापन शाम 6 बजकर 26 मिनट पर हो जाएगा. शीतला अष्टमी की पूजा में एक दिन पहले बने बासी खाने का भोग लगाया जाता है और इसे प्रसाद में खाते हैं इसीलिए इसे बसौड़ा के नाम से जाना जाता है. 

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शीतला अष्टमी के उपाय 
  • मान्यतानुसार शीतला माता (Sheetala Mata) पर पूजा के दौरान लाल रंग की वस्तुएं अर्पित करना शुभ माना जाता है. लाल फूल, श्रृंगार की सामग्री और लाल वस्तुएं माता के समक्ष रखने पर सौभाग्य की प्राप्ति होती है. 
  • शीतला माता की पूजा के पश्चात गौमाता को संतान के नाम का प्रसाद खिलाया जा सकता है. इससे संतान को शीतला माता का आशीर्वाद मिलता है. 
  • बसौड़ा के दिन संतान की खुशहाली के लिए “शीतले त्वं जगन्माता शीतले त्वं जगत्पिता. शीतले त्वं जगद्धात्री शीतलायै नमो नमः.” मंत्र का 21 बार जाप करना शुभ होता है. 

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.)

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