आज शनिवार के दिन जरूर पढ़ें शनि चालीसा, शनिदेव बरसाएंगे कृपा

अगर आप भी शनिवार के दिन शनिदेव की पूजा करते हैं, तो पूजा के दौरान यहां से पढ़कर संपूर्ण शनि चालीसा का पाठ कर सकते हैं-

विज्ञापन
Read Time: 4 mins
यहां पढ़ें संपूर्ण शनि चालीसा
(Photo Credit: NDTV)

हिंदू धर्म में शनिवार का दिन शनिदेव की पूजा और आराधना के लिए समर्पित माना जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शनिदेव न्याय और कर्मफल के देवता हैं. वे व्यक्ति को उसके अच्छे और बुरे कर्मों का फल देते हैं. शनिवार के दिन सच्चे मन से शनिदेव की पूजा-अर्चना करने से जीवन में आने वाली बाधाएं धीरे-धीरे दूर होने लगती हैं और सुख-समृद्धि का मार्ग प्रशस्त होता है. खासकर आज के दिन शनि चालीसा का पाठ करना विशेष रूप से लाभकारी माना जाता है. माना जाता है कि इससे शनिदेव प्रसन्न होते हैं और भक्तों पर अपनी कृपा बनाए रखते हैं. ऐसे में अगर आप भी शनिवार के दिन शनिदेव की पूजा करते हैं, तो शनि चालीसा का पाठ जरूर कर सकते हैं. 

यहां पढ़ें संपूर्ण शनि चालीसा 

                       ॥ दोहा ।।

जय-जय श्री शनिदेव प्रभु, सुनहु विनय महराज।
करहुं कृपा हे रवि तनय, राखहु जन की लाज।।

जय जय श्री शनिदेव प्रभु, सुनहु विनय महाराज।
करहु कृपा हे रवि तनय, राखहु जन की लाज ।।

                  ॥ चौपाई ॥

जयति जयति शनिदेव दयाला। करत सदा भक्तन प्रतिपाला ॥
चारि भुजा, तनु श्याम विराजै। माथे रतन मुकुट छवि छाजै।।

परम विशाल मनोहर भाला। टेढ़ी दृष्टि भृकुटि विकराला॥
कुण्डल श्रवन चमाचम चमके। हिये माल मुक्तन मणि दमकै॥

कर में गदा त्रिशूल कुठारा। पल बिच करैं अरिहिं संहारा॥
पिंगल, कृष्णो, छाया, नन्दन । यम, कोणस्थ, रौद्र, दुःख भंजन ।।

सौरी, मन्द शनी दश नामा। भानु पुत्र पूजहिं सब कामा॥
जापर प्रभु प्रसन्न हवैं जाहीं। रंकहुं राव करैं क्षण माहीं।।

पर्वतहू तृण होइ निहारत। तृणहू को पर्वत करि डारत ॥
राज मिलत वन रामहिं दीन्हयो। कैकेइहुँ की मति हरि लीन्हयो।।

वनहुं में मृग कपट दिखाई। मातु जानकी गई चुराई॥
लषणहिं शक्ति विकल करिडारा। मचिगा दल में हाहाकारा ॥

रावण की गति-मति बौराई। रामचन्द्र सों बैर बढ़ाई॥
दियो कीट करि कंचन लंका। बजि बजरंग बीर की डंका।।

नृप विक्रम पर तुहि पगु धारा। चित्र मयूर निगलि गै हारा।।
हार नौलखा लाग्यो चोरी। हाथ पैर डरवायो तोरी।।

भारी दशा निकृष्ट दिखायो। तेलहिं घर कोल्हू चलवायो॥
विनय राग दीपक महँ कीन्हयों। तब प्रसन्न प्रभु ह्वै सुख दीन्हयों।।

हरिश्चन्द्र नृप नारि बिकानी। आपहुं भरे डोम घर पानी॥
तैसे नल पर दशा सिरानी। भूंजी-मीन कूद गई पानी॥

श्री शंकरहिं गह्यो जब जाई। पारवती को सती कराई॥
तनिक विकलोकत ही करि रीसा। नभ उड़ि गतो गौरिसुत सीसा।

पाण्डव पर भै दशा तुम्हारी। बची द्रोपदी होति उधारी।।
कौरव के भी गति मति मारयो। युद्ध महाभारत करि डारयो ॥

रवि कहँ मुख महँ धरि तत्काला। लेकर कूदि परयो पाताला॥
शेष देव-लखि विनती लाई। रवि को मुख ते दियो छुड़ाई॥

वाहन प्रभु के सात सुजाना। जग दिग्गज गर्दभ मृग स्वाना ।
जम्बुक सिह आदि नख धारी। सो फल ज्योतिष कहत पुकारी।।

गज वाहन लक्ष्मी गृह आवैं। हय ते सुख सम्पत्ति उपजावै॥
गर्दभ हानि करै बहु काजा। सिह सिद्ध्कर राज समाजा॥

जम्बुक बुद्धि नष्ट कर डारै। मृग दे कष्ट प्राण संहारै॥
जब आवहिं स्वान सवारी। चोरी आदि होय डर भारी।।

तैसहि चारि चरण यह नामा। स्वर्ण लौह चाँदी अरु तामा ॥
लौह चरण पर जब प्रभु आवैं। धन जन सम्पत्ति नष्ट करावैं॥

Advertisement

समता ताम्र रजत शुभकारी। स्वर्ण सर्वसुख मंगल भारी।।
जो यह शनि चरित्र नित गावै। कबहुं न दशा निकृष्ट सतावै॥

अद्भुत नाथ दिखावैं लीला। करैं शत्रु के नशि बलि ढीला।।
जो पण्डित सुयोग्य बुलवाई। विधिवत शनि ग्रह शांति कराई॥

पीपल जल शनि दिवस चढ़ावत । दीप दान दै बहु सुख पावत ॥
कहत राम सुन्दर प्रभु दासा । शनि सुमिरत सुख होत प्रकाशा ।
                      
          ॥ दोहा ॥

पाठ शनिश्चर देव को, की हों 'भक्त' तैयार।
करत पाठ चालीस दिन, हो भवसागर पार ॥

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.)

यह भी पढ़ें- जितिया व्रत 2026: आज रखा जाएगा जीवित्पुत्रिका व्रत, जानें विधि, पूजा का शुभ समय, व्रत के दौरान क्या करें-क्या नहीं

Advertisement
Featured Video Of The Day
Flydubai Pilot News: Cockpit में Co-Pilot का हमला, आतंक के किसी पुराने ब्लूप्रिंट की नई कॉपी?

Topics mentioned in this article
Shani Chalisa
Faith News