Shani Mantra: शनि की ढैय्या और साढ़ेसाती से मुक्ति दिलाते हैं ये मंत्र, जानें कब और कैसे जपें?

Shani Puja Ke Mantra: नवग्रहों में शनि एक ऐसे देवता हैं, जिनकी चर्चा शुरु होते ही अक्सर लोगों का मन किसी अनिष्ट की आशंका से घिर जाता है, लेकिन शनिदेव सिर्फ ढैय्या और साढ़ेसाती से जुड़े कष्ट भर नहीं देते हैं बल्कि कृपायमान हो जाएं तो अपने भक्त रंक से राजा बना देते हैं. शनिवार के दिन किस मंत्र से बरसती है शनिदेव की कृपा, जानने के लिए पढ़ें ये लेख.

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Powerful Shani Mantra: शनि पूजा के मंत्र
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Shani Mantra Remedies: सनातन परंपरा में शनि को न्यायधीश भी कहा जाता है जो व्यक्ति को उसके कर्म के अनुसार फल प्रदान करते हैं. ज्योतिष के अनुसार नवग्रहों में शनिदेव सबसे धीमे चलने वाले ग्रह हैं जो कि एक राशि में ढाई साल तक रहते हैं और इस तरह इन्हें सभी 12 राशियों का चक्कर लगाने में 30 साल लग जाता है. शनि को धैर्य, कर्म, अनुशासन, परिश्रम और सहनशीलता का प्रतीक माना जाता है. हिंदू धर्म में शनिवार का दिन सूर्यपुत्र शनिदेव की पूजा के लिए समर्पित है.

मान्यता है कि इस दिन जो व्यक्ति श्रद्धा और विश्वास के साथ शनिवार के दिन शनि की पूजा में उनके मंत्रों का जप करता है, उस पर शीघ्र ही शनि कृपा बरसती है. जिन मंत्रों के शुभ प्रभाव से शनि की ढैय्या और साढ़ेसाती से जुड़े कष्ट भी शीघ्र ही दूर हो जाते हैं, आइए उनके बारे में विस्तार से जानते हैं.

कहां जपें शनि मंत्र?

Photo: PTI

हिंदू मान्यता के अनुसार शनि पूजा में तन, मन और स्थान की पवित्रता का बहुत ज्यादा महत्व माना गया है. शनिदेव के मंत्र का पुण्यफल पाने के लिए साधक को इसे किसी पवित्र और साफ-सुथरे स्थान पर जपना चाहिए. हिंदू मान्यता के अनुसार शनि मंत्र जाप के लिए सबसे उत्तम शनि धाम या फिर पीपल के वृक्ष के नीचे का स्थान होता है. इसके अलावा आप चाहें तो अपने घर के पूजा स्थान पर सरसों के तेल का दीया जलाने के बाद शनिदेव का ध्यान करते हुए जप सकते हैं. 

शनि मंत्र का जाप कैसे करें?

शनिदेव के मंत्र का जप शाम के समय स्नान-ध्यान के बाद करना चाहिए. शनि मंत्र का जप रुद्राक्ष की माला से नीले रंग अथवा काले आसन पर बैठकर करें.  शनि मंत्र का जप कम से कम 11 माला अवश्य करें. मंत्र जप के दौरान भूलकर अपना ध्यान किसी दूसरी चीज पर न लगाएं. 

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शनिदेव का जप मंत्र 

ॐ शं शनैश्चराय नमः"

ॐ शन्नो देवीरभिष्टय आपो भवन्तु पीतये. 

ॐ ऐं ह्रीं स्त्रीं शनैश्चराय नम:. 

ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः

ॐ शमाग्निभि: करच्छन्न: स्तपंत सूर्य शंवातोवा त्वरपा अपास्निधा:

ॐ भगभवाय विद्महे मृत्युरूपाय धीमहि तन्नो शौरि: प्रचोदयात्.

शनिदेव का प्रार्थना मंत्र

नीलांजनसमाभासं रविपुत्रं यमाग्रजम्.
छायामार्तण्डसम्भूतं तं नमामि शनैश्चरम्.

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सूर्य पुत्रो दीर्घ देहो विशालाक्षः शिवप्रियः. 
मन्दचारः प्रसन्नात्मा पीडां हरतु मे शनिः. 

शनि की पीड़ा से शीघ्र ही मुक्ति दिलाने वाला महामंत्र 

ॐ शन्नोदेवी रभिष्टय आपो भवन्तु पीतये. ॐ शं शनैश्चराय नमः

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.)

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