Powerful Mantra for Sakat Chauth Puja 2026: हिंदू धर्म में किसी भी देवी या देवता की पूजा में मंत्रों का बहुत ज्यादा महत्व माना गया है. मान्यता है कि इन मंत्रों के शुभ प्रभाव से न सिर्फ कष्ट और तमाम तरह की बाधाएं दूर होती हैं, बल्कि आराध्य देवता का आशीर्वाद भी बरसता है. सनातन परंपरा में प्रत्येक देवी देवता के लिए अलग-अलग मंत्रों को जपने का विधान है. यदि हम बात करें सकट पूजा की तो आज रिद्धि-सिद्धि के दाता भगवान श्री गणेश और मन के कारक माने जाने वाले चंद्र देवता की पूजा करने पर सुख-सौभाग्य के साथ संतान की लंबी आयु का आशीर्वाद प्राप्त होता है. आइए श्री लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत (Sanskrit) विश्वविद्यालय के पौरोहित विभाग के प्रोफेसर रामराज उपाध्याय से जानते हैं कि आखिर किन मंत्रों के जाप से गणपति और चंद्र देवता का आशीर्वाद बरसता है.
भगवान श्री गणेश जी का ध्यान करने का मंत्र
गजाननं भूतगणादिसेवितं कपित्थजम्बूफलचारूभक्षणम्,
उमासुतं शोकविनाशकारकं नमामि विघ्नेश्वर पाद पंकजम्.
भगवान गणेश जी का आवाहन करने का मंत्र
गणानां त्वा गणपतिं हवामहे प्रियाणां त्वा प्रियपतिं हवामहे निधीनां त्वा निधिपतिं हवामहे वसो मम. आहमजानि गर्भधमा त्वमजासि गर्भधम्.
(यजुर्वेद 23/19)
भगवान गणेश जी का जप मंत्र
- ॐ गणेशाय नमः
- ॐ गं गणपतये नमः
- ॐ लम्बोदराय नमः
- ॐ एकदन्ताय विद्धमहे, वक्रतुण्डाय धीमहि, तन्नो दन्ति प्रचोदयात्॥
चंद्र देवता का आवाहन करने का मंत्र
चंद्रोदय के समय अर्ध्य देने से पहले सफेद पुष्प और अक्षत तथा थोड़ा सा जल हाथ में लेकर यह मंत्र पढ़ें -
ॐ इमं देवा असपत्नं सुवध्यं महते क्षत्राय,
महते ज्यैष्ठ्याय महते जानराज्यायेन्द्रस्येन्द्रियाय.
इमममुष्य पुत्रममुष्यै पुत्रमस्यै विश एष वोऽमी,
राजा सोमोऽस्माकं ब्राह्मणानां राजा.
चंद्र देवता प्रार्थना मंत्र
दधिशंखतुषाराभं निशानाथं सोमवाहयाम्यहम्,
ज्योत्स्नापतिं निशानाथं सोममावाहयाम्यहम्.
चंद्र देवता का जप मंत्र
- ॐ सों सोमाय नमः.
- ॐ चं चंद्रमस्यै नम:
- ॐ श्रां श्रीं श्रौं सः चन्द्रमसे नमः.
सकट चौथ पर कैसे जपें मंत्र
सकट चौथ पर गणपति या चंद्र देवता के मंत्र को जपने से पूर्व तन और मन से पवित्र हो जाएं. यदि आप गणपति का मंत्र जप करने जा रहे हों तो उसके लिए लाल रंग के आसन पर बैठकर उनके मंत्र का जप रुद्राक्ष की माला से जपें, लेकिन यदि आप चंद्र देवता के मंत्र का जप करने जा रहे हैं तो सफेद रंग के आसन पर बैठकर मोती या रुद्राक्ष की माला से जप करें. मंत्र को हमेशा अपने मन में बोलें और माला को गोमुखी में रखकर ही जप करें. मंत्र जप करते समय अपने आराध्य देवता का ध्यान करें और बिल्कुल भी क्रोध न करें.
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.)














