Sakat Chauth 2024: पंचांग के अनुसार, माघ मास की चतुर्थी तिथि पर सकट चौथ का व्रत रखा जाता है. इस दिन भगवान गणेश (Lord Ganesha) के लिए महिलाएं व्रत रखती हैं और पूजा-आराधना करती हैं. कहते हैं गणपति बप्पा की पूजा करने से और सकट चौथ का व्रत रखने से जीवन में खुशहाली आती है और कष्टों से मुक्ति मिल जाती है. इस दिन भगवान को तिल और कुटा से बना भोग चढ़ाया जाता है और प्रसाद के रूप में वितरित किया जाता है. जानिए जनवरी के महीने में किस दिन रखा जाएगा सकट चौथ का व्रत.
सकट चौथ कब है | Sakat Chauth Date
इस साल पंचांग के अनुसार, माघ मास की चतुर्थी तिथि 29 जनवरी, 2024 को सुबह 6 बजकर 10 मिनट से शुरू हो रही है और इसका समापन अगले दिन 30 जनवरी की सुबह 8 बजकर 54 पर हो जाएगा. इस चलते 29 जनवरी के दिन ही सकट चौथ का व्रत (Sakat Chauth Vrat) रखा जाएगा.
-
पीएम मोदी के ग्लोबल विजन से लेकर RBI गवर्नर के बड़े बयान तक, अखबारों के फ्रंट पेज पर छाया NDTV समिट -
'भारतीय दयालु, ईमानदार और बुद्धिमान होते हैं', खामेनेई ने अपने प्रतिनिधि को भारत भेजते समय क्या कहा था? -
NDTV WORLD SUMMIT 2026 : कृति सेनन को बिकिनी सीन करने में क्यों लगे 12 साल? -
ब्रिटेन के हरियाणवी मेयर तुषार कुमार ने बताया कैसे गरीबों की मदद ने जिताया चुनाव -
टैक्स सिर्फ कमाई पर लगे, पूरी रकम पर नहीं..."F&O ट्रेडर्स के नुकसान पर बोले Zerodha को-फाउंडर निखिल कामत -
जिस शशि थरूर को सुनती है पूरी दुनिया, संसद में वह किसे सुनना पसंद करते हैं? खुद खोला राज -
AI से बुलेट ट्रेन तक... अश्विनी वैष्णव ने बताया भारत का फ्यूचर प्लान -
NDTV World Summit 2026: वेजिटेरियन खिलाड़ियों को कौन सी दिक्कतें होती हैं? Savita, Neeru ने बताया -
NDTV World Summit 2026 के मंच पर भारत की 'गोल्डन गर्ल्स' ने बताया जीत का मंत्रा! | Asian Games 2026 -
NDTV World Summit 2026: Lovlina Borgohain ने बताया जीवन का सबसे बड़ा चैलेंज! क्यों लगने लगे ठहाके?
सकट चौथ के व्रत में शाम के समय चंद्रोदय के बाद पूजा की जाती है. इस दिन चंद्रोदय का समय रात 8 बजकर 41 मिनट बताया जा रहा है.
सकट चौथ की पूजाकहते हैं सकट चौथ के दिन गणपति बप्पा की पूजा करने पर कोई खाली हाथ नहीं रहता है. गणपति बप्पा से इस दिन संतान की दीर्घायु का वरदान मांग जा सकता है. इस दिन निर्जला व्रत रखा जाता है और पूरे मनोभाव से पूजा की जाती है.
सकट चौथ के दिन मान्यतानुसार, सुबह उठकर स्नान किया जाता है और स्वच्छ वस्त्र धारण किए जाते हैं. इस दिन लाल रंग के कपड़े पहनना भी अच्छा माना जाता है. दिनभर उपवास रखने के बाद शाम के समय पूजा की जाती है. पूजा में भगवान गणेश के मंत्रों का जाप करके उनके समक्ष दुर्वा अर्पित की जाती है. गणपति बप्पा को लड्डू. तिल और गुड़ से बना भोग भी अर्पित करते हैं. गणेश आरती की जाती है, चंद्रमा को अर्घ्य दिया जाता है और फिर पूजा संपन्न होती है.
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.)
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं