June Mahine Me Padosh Vrat Kab Hai: सनातन परंपरा में भगवान शिव को कल्याण का देवता माना जाता है जो सबसे जल्दी प्रसन्न होकर अपने भक्त पर कृपा बरसाते हैं. औढरदानी कहे जाने वाले भगवान भोलेनाथ की तरह उनकी साधना भी बेहद सरल है. हिंदू धर्म में शिव साधना के लिए जिस प्रदोष व्रत का बहुत ज्यादा महत्व माना गया है, वह जून 2026 में कब-कब पड़ेगा? जून महीने में पड़ने वाले प्रदोष व्रत का क्या धार्मिक महत्व है? किस प्रदोष व्रत को करने पर वैवाहिक सुख की प्राप्ति और किस प्रदोष व्रत को करने पर शनि संबंधी दोष दूर होंगे, आइए इसे विस्तार से जानते हैं.
कब पड़ेगा जून महीने का पहला प्रदोष व्रत
हिंदू धर्म में प्रत्येक मास के कृष्णपक्ष और शुक्लपक्ष में पड़ने वाली त्रयोदशी तिथि पर औघड़दानी कहलाने वाले भगवान शंकर के लिए प्रदोष व्रत रखने का विधान है. पंचांग के अनुसार सूर्यास्त और रात्रि का संधिकाल प्रदोष कहलाता है. जिस प्रदोष व्रत को भगवान शिव की पूजा के लिए सबसे उत्तम माना गया है, वह जून महीने में पहली बार 12 तारीख को पड़ेगा. पंचांग के अनुसार ज्येष्ठ मास के कृष्णपक्ष की त्रयोदशी तिथि 12 जून 2026 की शाम 07:36 बजे प्रारंभ होकर अगले दिन 13 जून 2026 की शाम 04:07 बजे तक रहेगी.
ऐसे में यह प्रदोष व्रत 12 जून 2026 को रखा जाएगा. पंचांग के अनुसार 12 मई 2026 को शुक्रवार का दिन रहेगा, इसलिए देवों के देव महादेव से जुड़ा यह व्रत शुक्र प्रदोष व्रत कहलाएगा. भगवान शिव संग माता पार्वती की पूजा के लिए जिस शुक्र प्रदोष व्रत को सबसे उत्तम माना जाता है, उसकी प्रदोषकाल की पूजा सायंकाल 07:36 से रात्रि 09:20 बजे तक की जा सकेगी.
शुक्र प्रदोष व्रत का धार्मिक महत्व
हिंदू मान्यता के अनुसार शुक्रवार के दिन पड़ने वाले शुक्र प्रदोष व्रत को विधि-विधान से करने पर साधक को शिव कृपा से जीवन से सभी सुख भोगने का सौभाग्य प्राप्त होता है. शुक्र प्रदोष व्रत के पुण्य प्रभाव से व्यक्ति के जीवन हमेशा धन-संपदा बनी रहती है और वह सुखी वैवाहिक जीवन जीता है. हिंदू मान्यता के अनुसार शुक्र प्रदोष व्रत महिलाओं के लिए विशेष कल्याणकारी माना गया है.
कब पड़ेगा जून महीने का दूसरा प्रदोष व्रत
भगवान शिव की कृपा और समस्त कामनाओं को पूरा करने वाली पावन त्रयोदशी तिथि मई महीने में दूसरी बार ज्येष्ठ मास के शुक्लपक्ष में पड़ेगी. पंचांग के अनुसार ज्येष्ठ मास के शुक्लपक्ष की यह त्रयोदशी तिथि 26 जून 2026 को प्रारंभ होकर 28 जून 2026 को पूर्वाह्न 00:43 बजे तक रहेगी. यह व्रत शनिवार के दिन पड़ेगा, इसलिए इसे शनि प्रदोष व्रत के नाम से जाना जाएगा.
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हिंदू मान्यता के अनुसार शनि प्रदोष व्रत को करने पर न सिर्फ भगवान शिव का विशेष आशीर्वाद प्राप्त होता है, बल्कि कुंडली में स्थित शनि से जुड़े दोष भी दूर होते हैं. पंचांग के अनुसार शनि प्रदोष व्रत वाले दिन शिव पूजन के लिए सबसे उत्तम माना जाने वाला प्रदोष काल सायंकाल 07:23 से रात्रि 09:23 बजे तक रहेगा.
शनि प्रदोष व्रत का धार्मिक महत्व
हिंदू मान्यता के अनुसार भगवान शिव को शनिदेव का गुरु माना जाता है. ऐसे में शनि प्रदोष व्रत को विधि-विधान से करने पर साधक के जीवन में आ रही शनि संबंधित बाधाएं दूर होती हैं. इस व्रत के पुण्यप्रभाव से कुंडली में स्थित शनि दोष दूर होता और सुख-सौभाग्य की प्राप्ति होती है.














