Parshuram Jayanti 2026 Significance: सनातन परंपरा में वैशाख मास के शुक्लपक्ष की तृतीया तिथि का बहुत ज्यादा महत्व माना जाता है क्योंकि इसी दिन भगवान परशुराम की जयंती मनाई जाती है. हिंदू मान्यता के अनुसार उन्हें भगवान विष्णु का छठा अवतार माना जाता है, जो कि पृथ्वी पर अन्याय और अधर्म का नाश करने के लिए त्रेतायुग में अवतरित हुए थे. ज्ञान, तप और शक्ति के प्रतीक माने जाने वाले भगवान परशुराम अष्टचिरंजीवी में से एक हैं और हर युग में पृथ्वी पर मौजूद रहते हैं. आइए महादेव के परम भक्त, तपोनिष्ठ और पितृभक्त कहलाने वाले भगवान परशुराम के जीवन के से जुड़ी 10 बड़ी बातों के बारे में जानते हैं.
1. पौराणिक कथाओं के अनुसार भगवान परशुराम के पिता का नाम जमदग्नि और माता का नाम रेणुका था. मान्यता है कि एक बार उनकी मां से अनजाने में कोई अपराध हो गया, जिससे नाराज होकर उनके पिता जमदग्नि ने पहले उनके भाईयों को वध करने को कहा. जब उनके भाईयों ने मना कर दिया तो उनके पिता ने उनकी विचार शक्ति ही छीन ली. इसके बाद उन्होंने यह कार्य भगवान परशुराम को सौंपा तो उन्होंने बगैर एक पल बिताए अपनी मां का सिर काट दिया था. जिससे प्रसन्न होकर उनके पिता ने 3 वरदान मांगने को कहा. तब उन्होंने सबसे पहले अपनी मां को जीवित करने और फिर अपने भाईयों को ठीक करने फिर को कहा. अंत में उन्होंने अपने लिए लंबी आयु और अजेय रहने का वरदान मांगा.
2. भगवान परशुराम का वास्तविक नाम राम था, लेकिन जब उन्होंने देवों के देव महादेव से मिले परशु को धारण किया तो उन्हें परशुराम के नाम से जाना गया.
3. हिंदू मान्यता के अनुसार निर्बलों के रक्षक माने जाने वाले भगवान परशुराम का अवतार पृथ्वी पर अधर्म और दुष्टों का अंत करने के लिए हुआ था.
4. पौराणिक कथा के अनुसार पितृभक्त कहलाने वाले भगवान परशुराम ने 21 बार अत्याचारी क्षत्रियों का संहार कर पृथ्वी पर धर्म को स्थापित किया.
5. आजीवन ब्रह्मचारी रहे भगवान परशुराम को ज्ञान, शक्ति और अनुशासन का प्रतीक माना जाता है.
6. हिंदू मान्यता के अनुसार चिरंजीवी माने जाने वाले भगवान परशुराम हर युग में पृथ्वी पर मौजूद रहते हैं.
7. हिंदू मान्यता के अनुसार रामायण काल में भगवान परशुराम हिमालय पर्वत पर चले गये थे लेकिन आज भी वे अपनी मां रेणुका से जुड़े पावन धाम जो कि हिमाचल के सिरमौर जिला में रेणुका झील के पास स्थित है, वहां जरूर आते हैं.
8. पौराणिक मान्यता के अनुसार एक बार भगवान परशुराम भगवान शिव से मिलने कैलाश धाम पहुंचे तो उन्हें गणपति ने मिलने से रोक दिया. जिससे नाराज होकर उन्होंने अपने फरसे से उनके एक दांत को तोड़ दिया. मान्यता है कि तभी से गणपति को एकदंत कहा जाने लगा.
9. भगवान परशुराम शस्त्र विद्या के परम गुरु माने जाते हैं, जिन्होंने भीष्म पितामह, द्रोणाचार्य और कर्ण जैसे योद्धाओं को अस्त्र चलाने की शिक्षा दी थी.
10. हिंदू मान्यता के अनुसार जब कलयुग में कल्कि अवतार होगा तो भगवान परशुराम उन्हें शस्त्र और शास्त्र दोनों की शिक्षा प्रदान करेंगे.
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.)














