Papmochani Ekadashi 2026: एकादशी के दिन बाल धोना सही या गलत? जानें शास्त्रों के नियम

Papmochani Ekadashi 2026: पापमोचनी एकादशी 2026 पर क्या बाल धोना चाहिए? जानिए शास्त्रों के अनुसार एकादशी के दिन बाल धोने के नियम, इसका धार्मिक कारण और सही तरीका.

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पापमोचनी एकादशी 2026: क्या इस दिन सिर धोना चाहिए? शास्त्रों में क्या लिखा है

Papmochani Ekadashi 2026: हिंदू धर्म में एकादशी व्रत को बेहद पवित्र और महत्वपूर्ण माना गया है. माना जाता है कि इस दिन व्रत रखने और पूजा करने से व्यक्ति के पापों का नाश होता है और भगवान का आशीर्वाद मिलता है. साल 2026 में पापमोचनी एकादशी 15 मार्च को मनाई जाएगी. लेकिन, इस दिन को लेकर कई लोगों के मन में यह सवाल होता है कि क्या एकादशी के दिन बाल धोना चाहिए या नहीं. अक्सर घर के बड़े-बुजुर्ग इस दिन बाल धोने या नाखून काटने से मना करते हैं.

एकादशी के दिन बाल क्यों नहीं धोने चाहिए

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, एकादशी का दिन मन और शरीर की शुद्धि के लिए माना जाता है. इस दिन बाल न धोने के पीछे कुछ खास कारण बताए गए हैं.

1. अहिंसा का पालन

मान्यता है कि जब हम सिर धोते हैं तो पानी के साथ सिर पर मौजूद सूक्ष्म जीवों की अनजाने में मृत्यु हो सकती है. एकादशी व्रत में अहिंसा का पालन करना जरूरी माना जाता है. इसलिए किसी भी प्रकार की जीव-हत्या से बचने के लिए इस दिन बाल धोने से परहेज करने की सलाह दी जाती है.

2. भक्ति और संयम का दिन

एकादशी का दिन मुख्य रूप से भगवान विष्णु की भक्ति और पूजा के लिए समर्पित होता है. इस दिन बाहरी सजावट और शारीरिक श्रृंगार से ज्यादा ध्यान पूजा-पाठ, व्रत और नाम-जप पर देने की सलाह दी जाती है. इसलिए बाल धोना या सौंदर्य प्रसाधनों का उपयोग करना इस दिन उचित नहीं माना जाता.

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अगर बाल धोना बहुत जरूरी हो तो क्या करें

धार्मिक नियम लोगों को कठिनाई में डालने के लिए नहीं होते, बल्कि अनुशासित जीवन जीने का मार्ग बताते हैं. अगर किसी कारण से बाल धोना जरूरी हो, तो बेहतर है कि एकादशी से एक दिन पहले यानी दशमी तिथि पर ही बाल धो लें. इससे एकादशी के दिन नियमों का पालन भी हो जाएगा और आप साफ-सफाई के साथ पूजा भी कर पाएंगे.

शास्त्रों में क्या कहा गया है

धार्मिक ग्रंथों में भी एकादशी के नियमों का उल्लेख मिलता है. पद्म पुराण के क्रियायोगसार खंड में बताया गया है कि एकादशी के दिन व्रती को दातुन और बाल धोने से बचना चाहिए. वहीं, विष्णु पुराण के अनुसार इस दिन संयम और सात्विक जीवन का पालन करना बहुत जरूरी है. मान्यता है कि जो व्यक्ति इस दिन श्रद्धा और नियमों के साथ व्रत करता है, उसे ही व्रत का पूरा फल मिलता है.

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(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.)

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