गुरु पूर्णिमा पर हरिद्वार की हर की पौड़ी पर पवित्र स्नान के लिए उमड़े श्रद्धालु

गुरु पूर्णिमा, जिसे आषाढ़ पूर्णिमा और व्यास पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है के दिन स्नान और दान करना बहुत शुभ माना जाता है. ऐसे में गुरुवार को गुरु पूर्णिमा के अवसर पर हर की पौड़ी स्थित गंगा नदी में पवित्र स्नान के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु उमड़े. 

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आपको बता दें कि गुरु पूर्णिमा के अवसर पर गुरुवार को तड़के उज्जैन के महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर में भी पवित्र भस्म आरती की गई.

Guru purnima 2025 : सांसारिक जीवन में गुरु का विशेष महत्व है, इसलिए भारतीय संस्कृति में गुरु को ईश्वर से भी अधिक महत्वपूर्ण माना जाता है. यह त्यौहार न केवल हिंदुओं द्वारा, बल्कि जैन, बौद्ध और सिख धर्मावलंबियों द्वारा भी मनाया जाता है. गुरु पूर्णिमा, जिसे आषाढ़ पूर्णिमा और व्यास पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है के दिन स्नान और दान करना बहुत शुभ माना जाता है. ऐसे में गुरुवार को गुरु पूर्णिमा के अवसर पर हर की पौड़ी स्थित गंगा नदी में पवित्र स्नान के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु उमड़े. 

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इस दौरान पवित्र स्नान के लिए हरिद्वार पहुंचे राहुल ने एएनआई से कहा, "मैं बहुत उत्साहित हूं और माहौल भी बहुत अच्छा है. मैं यहां गंगा में पवित्र स्नान करने आया हूं और अपनी कांवड़ यात्रा भी शुरू करूंगा. मैंने गंगा मां से प्रार्थना की है कि वह मुझे मेरी पढ़ाई में सफलता प्रदान करें."

जबकि दिल्ली से हरिद्वार पहुंची सुमन ने कहा, "आज का दिन बहुत शुभ है और यहां की व्यवस्थाएं बहुत अच्छी हैं, मैंने तो बस भगवान से यही प्रार्थना की थी कि वे हमारा ध्यान रखें."

वहीं स्नान के लिए दिल्ली से आए एक अन्य श्रद्धालु सतीश कुमार ने कहा, "मैं कल अपनी कांवड़ यात्रा शुरू करूंगा और यह मेरी 26वीं कांवड़ यात्रा होगी. मैं बहुत उत्साहित और खुश हूं."

पवित्र स्नान के बाद, भक्त मंदिर में दर्शन करते हैं. जिन लोगों ने अपने गुरु से दीक्षा ली है और गुरु मंत्र प्राप्त किया है, वे आज अपने गुरु के पास जाकर उनकी पूजा करेंगे.

सदियों पहले कबीर दास द्वारा रचित यह पंक्ति, "गुरु गोविंद दोनों खड़े, काके लागू पाए बलिहारी, गुरु आपने गोविंद दियो बताए," गुरु की महिमा को उजागर करती है, जो आज भी प्रासंगिक है.

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मान्यता है कि गुरु पूर्णिमा पर गुरुओं का सम्मान करने से जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आते हैं. वाराणसी में इस दिन गुरु मंत्र ग्रहण करने की भी परंपरा है. इस दिन हजारों लोग अपने पूज्य गुरुओं के दर्शन करते हैं और अपनी क्षमतानुसार उन्हें उपहार भेंट करते हैं.

आपको बता दें कि गुरु पूर्णिमा के अवसर पर गुरुवार को तड़के उज्जैन के महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर में भी पवित्र भस्म आरती की गई, जिसको देखने के लिए बड़ी संख्या में भक्त एकत्रित हुए. मंदिर भगवान शिव और आध्यात्मिक गुरुओं की पूजा के प्रतीक मंत्रोच्चार और आध्यात्मिक उत्साह से गूंज उठा. आज आषाढ़ मास का अंत और सावन मास का प्रारंभ भी है. आज से कांवड़ यात्रा भी शुरू होगी.

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(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.)

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