सावन का महीना भगवान शिव और माता पार्वती की भक्ति के लिए विशेष माना जाता है. मान्यता है कि इस पूरे महीने में शिव-पार्वती की पूजा करने से भक्तों को विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है. वहीं सावन के मंगलवार का भी खास महत्व माना जाता है. इस दिन सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र, सुखी वैवाहिक जीवन और अखंड सौभाग्य की कामना से मंगला गौरी व्रत रखती हैं. आज सावन का आखिरी मंगला गौरी व्रत है. ऐसे में भक्त विधि-विधान से मां गौरी और भगवान शिव की पूजा कर उनका आशीर्वाद ले सकते हैं. आइए जानते हैं मंगला गौरी व्रत के दिन मां गौरी की पूजा कैसे करें, साथ ही जानेंगे आज पूजा के लिए शुभ मुहूर्त क्या रहेगा-
ऐसे करें मां गौरी की पूजा
- मंगला गौरी व्रत के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें.
- इसके बाद मन में मां गौरी का ध्यान करके व्रत का संकल्प लें.
- पूजा की जगह को साफ कर गंगाजल का छिड़काव कर शुद्ध कर लें.
- पूजा के लिए लकड़ी की चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाएं. इसके बाद उस पर माता पार्वती और भगवान शिव की तस्वीर या प्रतिमा स्थापित करें.
- भगवान के सामने आटे से बना चौमुखी दीपक जलाएं.
- मां गौरी को लाल वस्त्र अर्पित करें और श्रद्धा के साथ शिव-पार्वती की पूजा करें.
- पूजा के दौरान मां गौरी के मंत्रों का जाप करें.
- देवी को फल, फूल, पान, सुपारी, इलायची, लौंग, लड्डू समेत पूजा की अन्य सामग्री चढ़ाएं.
- इसके बाद मंगला गौरी व्रत की कथा का पाठ करें.
- क्योंकि यह सावन का आखिरी मंगला गौरी व्रत है, इसलिए मां गौरी को 16 श्रृंगार की सामग्री जरूर अर्पित करें.
- इसके साथ 16 फूल, 16 फल और 16 मोदक या लड्डू भी चढ़ाएं.
- पूजा पूरी होने के बाद भगवान शिव और मां गौरी की आरती करें.
दान का भी है विशेष महत्व
आज पूजा के बाद आप अपने सामर्थ्य के अनुसार जरूरतमंद लोगों को धन, अन्न या उपयोगी सामान का दान कर सकते हैं. धार्मिक मान्यता के अनुसार, दान-पुण्य से पूजा का महत्व और बढ़ जाता है.
आज अभिजित मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 3 मिनट से 12 बजकर 54 मिनट तक रहेगा. वहीं, अमृत काल दोपहर 3 बजकर 48 मिनट से शाम 5 बजकर 33 मिनट तक रहेगा. इन शुभ समय में मां गौरी और भगवान शिव की पूजा करना मंगलकारी माना जाता है.
मां गौरी की आरतीजय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी।
तुमको निशदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवरी।।
ॐ जय अम्बे गौरी।।
मांग सिंदूर विराजत, टीको मृगमद को।
उज्ज्वल से दोउ नैना, चंद्रवदन नीको ॥।
ॐ जय अम्बे गौरी।।
कनक समान कलेवर, रक्ताम्बर राजै।
रक्तपुष्प गल माला, कंठन पर साजै॥
ॐ जय अम्बे गौरी।।
केहरि वाहन राजत, खड्ग खप्पर धारी।
सुर-नर-मुनिजन सेवत, तिनके दुखहारी।।
ॐ जय अम्बे गौरी।।
कानन कुण्डल शोभित, नासाग्रे मोती।
कोटिक चंद्र दिवाकर, सम राजत ज्योती।।
ॐ जय अम्बे गौरी।।
शुंभ-निशुंभ बिदारे, महिषासुर घाती।
धूम्र विलोचन नैना, निशदिन मदमाती॥
ॐ जय अम्बे गौरी।।
चण्ड-मुण्ड संहारे, शोणित बीज हरे।
मधु-कैटभ दोउ मारे, सुर भयहीन करे॥
ॐ जय अम्बे गौरी।।
ब्रह्माणी, रूद्राणी, तुम कमला रानी।
आगम निगम बखानी, तुम शिव पटरानी।।
ॐ जय अम्बे गौरी।।
चौंसठ योगिनी मंगल गावत, नृत्य करत भैरों।
बाजत ताल मृदंगा, अरू बाजत डमरू ॥
ॐ जय अम्बे गौरी।।
तुम ही जग की माता, तुम ही हो भरता,
भक्तन की दुख हरता, सुख संपति करता॥
ॐ जय अम्बे गौरी।।
भुजा चार अति शोभित, वर मुद्रा धारी।
मनवांछित फल पावत, सेवत नर नारी॥
ॐ जय अम्बे गौरी।।
कंचन थाल विराजत, अगर कपूर बाती।
श्रीमालकेतु में राजत, कोटि रतन ज्योती।।
ॐ जय अम्बे गौरी।।
श्री अंबेजी की आरती, जो कोइ नर गावे।
कहत शिवानंद स्वामी, सुख-संपत्ति पावे ॥
ॐ जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी।।
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.)
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