Magh Purnima 2021: इस दिन है माघ पूर्णिमा, जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और क्या है इसका महत्व ?

Magh Purnima 2021: हिन्दू धर्म में पूर्णिमा तिथि का विशेष महत्व होता है. कहा जाता है कि इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करने, दान और ध्यान करने से पुण्य फलों की प्राप्ति होती है.

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Magh Purnima 2021: इस दिन है माघ पूर्णिमा, जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और क्या है इसका महत्व ?

Magh Purnima 2021: हिन्दू धर्म में पूर्णिमा तिथि का विशेष महत्व होता है. कहा जाता है कि इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करने, दान और ध्यान करने से पुण्य फलों की प्राप्ति होती है. वैसे तो साल में 12 पूर्णिमा तिथियां होती हैं, जिसमें पूर्ण चंद्रोदय होता है लेकिन माघ महीने की पूर्णिमा का अपना अलग महत्व है. माघ महीने की पूर्णिमा को माघ पूर्णिमा (Magh Purnima) के नाम से भी जाना जाता है. इस दिन लोग पवित्र नदियों और मुख्य रूप से गंगा नदी में स्नान करते हैं. साथ ही इस दिन भगवान विष्णु की पूजा की जाती है. ॐ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जप करना चाहिए.

कब है माघ पूर्णिमा ?

हिन्दू मान्यतानुसार पूर्णिमा तिथि को बेहद शुभ माना जाता है. हर मास के शुक्ल पक्ष की अंतिम तिथि को पूर्णिमा तिथि होती है और उसी तिथि से नए माह की शुरुआत होती है. इस साल माघ मास की पूर्णिमा 27 फरवरी 2021 (शनिवार) को है. इस दिन दान पुण्य और स्नान करने का विशेष महत्व होता है. कहा जाता है कि माघी पूर्णिमा या माघ पूर्णिमा के दिन चन्द्रमा अपनी पूर्ण कलाओं के साथ उदित होता है.

माघ पूर्णिमा का शुभ मुहूर्त

माघ पूर्णिमा के दिन शुभ मुहूर्त में पूजन और ईश्वर का ध्यान करना अति उत्तम माना जाता है. इस साल माघ पूर्णिमा का शुभ मुहूर्त इस प्रकार है-

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पूर्णिमा तिथि आरंभ- 26 फरवरी 2021 (शुक्रवार) को दोपहर 03 बजकर 49 मिनट से.

पूर्णिमा तिथि समाप्त- 27 फरवरी 2021 (शनिवार) दोपहर 01 बजकर 46 मिनट तक.

उदया तिथि 27 फरवरी को है, इसलिए इस दिन मुख्य रूप से पूर्णिमा तिथि मनाई जाएगी और इसी दिन नदियों में स्नान से पुण्य की प्राप्ति होगी. जो पूर्णिमा व्रत रखकर चन्द्रमा को अर्घ्य देते हैं, उन्हें पूर्णिमा व्रत 26 फरवरी 2021 शुक्रवार को ही रखना चाहिए और भगवान सत्य नारायण की पूजा कथा भी 26 फरवरी को ही करनी चाहिए. किन्तु पूर्णिमा का पुण्यकाल का स्नान 27 फरवरी को करना चाहिए.

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क्यों शुभ माना जाता है पवित्र नदियों में स्नान ?

कहा जाता है कि इस दिन पवित्र नदी जैसे गंगा में स्नान करने से और दान पुण्य करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है. इसी वजह से माघ पूर्णिमा के दिन काशी, प्रयागराज और हरिद्वार जैसे तीर्थ स्थानों में स्नान करने का विशेष महत्व बताया गया है. हिन्दू मान्यता के अनुसार माघ पूर्णिमा पर स्नान करने वाले लोगों पर भगवान विष्णु मुख्य रूप से प्रसन्न होते हैं और उन्हें सुख सौभाग्य और धन-संतान तथा मोक्ष प्रदान करते हैं.

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माघ पूर्णिमा व्रत कथा

एक पौराणिक कथा के अनुसार, कांतिका नगर में धनेश्वर नाम का ब्राह्मण निवास करता था. वह अपना जीवन निर्वाह दान पर करता था. ब्राह्मण और उसकी पत्नी के कोई संतान नहीं थी. एक दिन उसकी पत्नी नगर में भिक्षा मांगने गई, लेकिन सभी ने उसे बांझ कहकर भिक्षा देने से इनकार कर दिया. तब किसी ने उससे 16 दिन तक मां काली की पूजा करने को कहा, उसके कहे अनुसार ब्राह्मण दंपत्ति ने ऐसा ही किया. उनकी आराधना से प्रसन्न होकर 16 दिन बाद मां काली प्रकट हुई. मां काली ने ब्राह्मण की पत्नी को गर्भवती होने का वरदान दिया और कहा, कि अपने सामर्थ्य के अनुसार प्रत्येक पूर्णिमा को तुम दीपक जलाओ. इस तरह हर पूर्णिमा के दिन तक दीपक बढ़ाती जाना जब तक कम से कम 32 दीपक न हो जाएं.

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ब्राह्मण ने अपनी पत्नी को पूजा के लिए पेड़ से आम का कच्चा फल तोड़कर दिया. उसकी पत्नी ने पूजा की और फलस्वरूप वह गर्भवती हो गई. प्रत्येक पूर्णिमा को वह मां काली के कहे अनुसार दीपक जलाती रही. मां काली की कृपा से उनके घर एक पुत्र ने जन्म लिया, जिसका नाम देवदास रखा. देवदास जब बड़ा हुआ तो उसे अपने मामा के साथ पढ़ने के लिए काशी भेजा गया. काशी में उन दोनों के साथ एक दुर्घटना घटी जिसके कारण धोखे से देवदास का विवाह हो गया. देवदास ने कहा कि वह अल्पायु है परंतु फिर भी जबरन उसका विवाह करवा दिया गया. कुछ समय बाद काल उसके प्राण लेने आया लेकिन ब्राह्मण दंपत्ति ने पूर्णिमा का व्रत रखा था, इसलिए काल उसका कुछ बिगाड़ नहीं पाया. तभी से कहा जाता है कि पूर्णिमा के दिन व्रत करने से संकट से मुक्ति मिलती है और सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं.

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