Hanuman Jayanti 2025 Drongiri Parvat: हिंदू धर्म में हनुमान जी एक ऐसे देवता हैं जो चिरंजीवी माने जाते हैं. हिंदू मान्यता के अनुसार भगवान श्री राम जब पृथ्वी लोक को छोड़कर जाने लगे तो उन्होंने हनुमान जी को कलयुग में धर्म की रक्षा और लोक कल्याण के लिए हनुमान जी को जिम्मेदारी सौंप गये. तब से लेकर आज तक शक्ति और भक्ति के देवता हनुमान जी को जीवित मानते हुए हर सनातनी देश के कोने-कोने में उनकी साधना-आराधना करता है, लेकिन इससे परे उत्तराखंड में एक ऐसा भी स्थान है, जहां पर न तो कोई हनुमत धाम है और न ही वहां के लोग उनकी पूजा करते हैं? आइए जानते हैं कि आखिर उत्तराखंड के एक गांव में बजरंगी की पूजा क्यों नहीं होती है?
इस गांव में क्यों नहीं है हनुमान का मंदिर?
देवभूमि कहलाने वाले उत्तराखंड स्थित हिमालय की ऊंची चोटियों के बीच एक द्रोणगिरि गांव हैं, जहां जाने पर आपको न तो आपको हनुमान जी का मंदिर दिखाई देगा और न ही उनको मानने वाले भक्त, क्योंकि यहां के लोगों की पवनपुत्र हनुमान से सदियों से नाराजगी चली आ रही है. उत्तराखंड के चमोली जिले में स्थित द्रोणगिरि पर्वत के पास गांव में रहने वाले लोग की हनुमान जी की नाराजगी का संबंध रामायण काल की घटना से जुड़ा हुआ है.
मान्यता है कि लंका में युद्ध के दौरान जब प्रभु श्री राम के अनुज लक्ष्मण मूर्छित हो गये तो उनकी मूर्छा को दूर करने के लिए लंका के राज वैद्य सुषेण को बुलाया गया. जिनकी सलाह पर हनुमान जी को हिमालय पर्वत से संजीवनी बूटी को लाने के लिए भेजा गया. मान्यता है कि जब हनुमान जी संजीवनी बूटी लेने के लिए द्रोणगिरि पर्वत पहुंचे तो वह उसे नहीं पहचान पाए.
ऐसे में उन्होंने द्रोणगिरि पर्वत का एक पूरा हिस्सा ही उठा कर अपने साथ ले गये. स्थानीय लोग इसी बात से तबसे हनुमान जी से नाराज चले आ रहे हैं क्योंकि उनका तर्क है कि बजरंगबली बगैर उनके ग्राम देवी की इजाजत के पहाड़ के उस पवित्र टुकड़े को उठा कर ले गये. गौरतलब है कि यहां पर अधिकांश लोग देवी के उपासक हैं.
इस कारण नहीं पूजे जाते हैं हनुमान
उत्तराखंड स्थित बद्रीनाथ धाम के पूर्व धर्माधिकारी पं. भुवन चंद्र उनियाल कहते हैं कि जिस द्रोणगिरि पर्वत के एक हिस्से को हनुमान जी उठाकर ले गये थे, वह आज का खाली स्थान आज भी देखा जा सकता है. उनके अनुसार इस स्थान पर लोग छह महीने ही रहते हैं और सर्दियां आते ही वहां का क्षेत्र बर्फ से ढंक जाता है और लोग जोशीमठ, नंद प्रयाग, कर्ण प्रयाग आदि क्षेत्रों में अलग-अलग स्थानों पर रहने के लिए चले जाते हैं.
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पं. भुवन चंद्र उनियाल के स्थानीय लोग द्रोणगिरि गांव में जब 6 महीने रहते हैं तो वहां पर हनुमान जी की पूजा नहीं करते हैं, लेकिन जब वे अन्य क्षेत्रों में जाकर रहते हैं तो वहां पर राम दरबार के साथ हनुमान जी की पूजा सामान्य रूप से करते हैं. उनके मुताबिक स्थानीय लोगों की नाराजगी इस हद तक है कि यहां पर रामलीला भी नहीं होती है. उनके अनुसार जब कभी भी रामलीला करने का प्रयास किया गया तो वहां पर कोई न कोई अनहोनी हो गई.
स्थानीय लोगों की आस्था लौकिक देवता के मुकाबले द्रोणगिरि पर्वत पर ज्यादा है. वे उसे लोक देवता के रूप में पूजते हैं और उनका मानना है कि आज भी द्रोणगिरि पर्वत हनुमान जी द्वारा उसके एक हिस्से को ले जाने के कारण नाराज है और ऐसे में यदि किसी ने हनुमान जी की पूजा की तो वहां पर विप्लव यानि बड़ी आपदा आ सकती है.
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.)














