हनुमान जयंती पर भक्ति का महाआयोजन, 1.25 करोड़ बार गूंजी हनुमान चालीसा

रावतपुरा देवस्थानम और श्री हनुमान टेकरी मंदिर का इतिहास प्राचीन है और इनका संबंध महाभारत काल से जोड़ा जाता है. श्री हनुमान टेकरी मंदिर में 1200 साल पुरानी दक्षिणमुखी हनुमान प्रतिमा स्थापित है, जिसे साधना और तपस्या का प्रमुख केंद्र माना जाता है.

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श्री हनुमान टेकरी मंदिर का संबंध महाभारत काल से जुड़ा हुआ है.
फाइल फोटो

Hanuman Chalisa  : हनुमान जयंती के मौके पर मध्य प्रदेश में भक्ति का अद्भुत नजारा देखने को मिला. भिंड के लहार स्थित रावतपुरा देवस्थानम और गुना के श्री हनुमान टेकरी मंदिर में हजारों श्रद्धालु जुटे. खास बात यह रही कि यहां देशभर से आए श्रद्धालुओं ने सामूहिक रूप से हनुमान चालीसा का पाठ किया. इसके अलावा पूरे इलाके के अनेक मंदिर और घरों में भी इसी तरह के पाठ का लक्ष्य रखा गया था. आयोजकों का दावा है कि इस दौरान हजारों-लाखों श्रद्धालुओं के मुख से 1.25 करोड़ से भी ज्यादा बार हनुमान चालीसा का पाठ किया गया. कुल मिलाकर पूरे इलाके के वातावरण में ही हनुमान चालीसा रच-बस सी गई.

महाभिषेक से महाआरती तक, पूरे दिन हुए अनुष्ठान

हनुमान जयंती के अवसर पर सुबह 4 बजे महाभिषेक के साथ कार्यक्रमों की शुरुआत हुई. इसके बाद विशेष महाआरती की गई. सुबह 8:30 बजे श्री हनुमत लक्ष्यार्चन में एक लाख केले, फल-फूल और अन्य पूजन सामग्री अर्पित की गई. दिन में सुंदरकांड पाठ हुआ, जबकि शाम 7 बजे मां राजराजेश्वरी द्वादश लक्ष्यार्चन (12 लाख अर्पण) के साथ विशेष पूजा संपन्न हुई.

इसके साथ ही भक्तों के लिए बड़े स्तर पर प्रसाद की भी व्यवस्था की गई. करीब 1.25 लाख लड्डुओं का प्रसाद तैयार कर श्रद्धालुओं में बांटा गया. दिनभर चले भंडारे में हजारों लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया. मंदिर परिसर में भक्ति और उत्साह का माहौल बना रहा.

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दोनों मंदिरों का है प्राचीन महत्व

माना जाता है कि रावतपुरा देवस्थानम और श्री हनुमान टेकरी मंदिर का इतिहास प्राचीन है और इनका संबंध महाभारत काल से जोड़ा जाता है. गुना से करीब 5 किलोमीटर दूर स्थित हनुमान टेकरी मंदिर में 1200 साल पुरानी दक्षिणमुखी हनुमान प्रतिमा स्थापित है, जिसे साधना और तपस्या का प्रमुख केंद्र माना जाता है.

गोस्वामी तुलसीदास रचित हनुमान चालीसा की महिमा सनातन परंपरा में गहराई से रची-बसी है. माना जाता है कि इसके पाठ से आत्मविश्वास बढ़ता है और मन को शांति मिलती है. यही वजह है कि हनुमान जयंती जैसे अवसर पर घरों से लेकर मंदिरों तक इसका सामूहिक पाठ देखने को मिलता है. मध्य प्रदेश में इस बार हुआ यह आयोजन भी उसी आस्था और परंपरा का सशक्त उदाहरण बनकर सामने आया, जहां भक्ति के साथ-साथ लोगों की भागीदारी ने इसे विशेष बना दिया.

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