श्री हनुमान चालीसा | Hanuman Chalisa Full Lyrics in Hindi

Hanuman Jayanti 2026: हनुमान जयंती आज यानी 2 अप्रैल को मनाई जा रही है. मान्यता है कि आज के दिन सच्चे मन से हनुमान चालीसा का पाठ करने से भय, संकट और रोगों से मुक्ति मिलती है. साथ ही, व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और आत्मविश्वास का संचार होता है.

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Hanuman Chalisa in Hindi: श्री हनुमान चालीसा

Hanuman Chalisa Full Lyrics in Hindi: आज का दिन भक्तों के लिए विशेष आस्था और श्रद्धा से भरा हुआ है. गुरुवार, 3 अप्रैल को पूरे देश में हनुमान जयंती का पर्व बड़े उत्साह के साथ मनाया जा रहा है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, चैत्र मास की पूर्णिमा तिथि को अंजनी पुत्र हनुमान का जन्म हुआ था. इस साल चैत्र पूर्णिमा तिथि 1 अप्रैल 2026 की सुबह 7:06 बजे शुरू हुई थी और इसका समापन 2 अप्रैल 2026 को सुबह 7:41 बजे होगा. उदया तिथि के अनुसार हनुमान जयंती आज यानी 2 अप्रैल को मनाई जा रही है.

हनुमान जयंती के अवसर पर भक्त सुबह जल्दी उठकर स्नान करते हैं और व्रत रखकर भगवान हनुमान की पूजा-अर्चना करते हैं. मंदिरों में विशेष सजावट की जाती है और भक्तों की लंबी कतारें देखने को मिलती हैं. इस दिन हनुमान जी को सिंदूर, चमेली का तेल, गुड़-चना और लड्डू अर्पित किए जाते हैं. मान्यता है कि हनुमान जी को चोला चढ़ाने से जीवन के कष्ट दूर होते हैं और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है. इसके अलावा हनुमान चालीसा का पाठ इस दिन विशेष फलदायी माना जाता है. मान्यता है कि सच्चे मन से हनुमान चालीसा का पाठ करने से भय, संकट और रोगों से मुक्ति मिलती है. साथ ही, व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और आत्मविश्वास का संचार होता है. ऐसे में पूजा के बाद आप यहां से हनुमान चालीसा पढ़ सकते हैं. 

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श्री हनुमान चालीसा | Hanuman Chalisa Full Lyrics in Hindi 

श्रीगुरु चरन सरोज रज , निजमन मुकुरु सुधारि।

बरनउं रघुबर बिमल जसु, जो दायक फल चारि।।

बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन-कुमार।

बल बुधि बिद्या देहु मोहिं, हरहु कलेस बिकार।।

जय हनुमान ज्ञान गुन सागर।

जय कपीस तिहुं लोक उजागर।।

राम दूत अतुलित बल धामा।

अंजनि-पुत्र पवनसुत नामा।।

महाबीर बिक्रम बजरंगी।

कुमति निवार सुमति के संगी।।

कंचन बरन बिराज सुबेसा।

कानन कुण्डल कुँचित केसा।।

हाथ बज्र औ ध्वजा बिराजे।

कांधे मूंज जनेउ साजे।।

शंकर सुवन केसरी नंदन।

तेज प्रताप महा जग वंदन।।

बिद्यावान गुनी अति चातुर।

काज करिबे को आतुर।।

प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया।

राम लखन सीता मन बसिया।।

सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा।

बिकट रूप धरि लंक जरावा।।

भीम रूप धरि असुर संहारे।

रामचन्द्र के काज संवारे।।

लाय सजीवन लखन जियाये।

श्री रघुबीर हरषि उर लाये।।

रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई।

तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई।।

सहस बदन तुम्हरो जस गावैं।

अस कहि श्रीपति कण्ठ लगावैं।।

सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा।

नारद सारद सहित अहीसा।।

जम कुबेर दिगपाल जहां ते।

कबि कोबिद कहि सके कहां ते।।

तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा।

राम मिलाय राज पद दीन्हा।।

तुम्हरो मंत्र बिभीषन माना।

लंकेश्वर भए सब जग जाना।।

जुग सहस्र जोजन पर भानु।

लील्यो ताहि मधुर फल जानू।।

प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं।

जलधि लांघि गये अचरज नाहीं।।

दुर्गम काज जगत के जेते।

सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते।।

राम दुआरे तुम रखवारे।

होत न आज्ञा बिनु पैसारे।।

ब सुख लहै तुम्हारी सरना।

तुम रच्छक काहू को डर ना।।

आपन तेज सम्हारो आपै।

तीनों लोक हांक तें कांपै।।

भूतपिसाच निकट नहिं आवै।

महाबीर जब नाम सुनावै।।

नासै रोग हरे सब पीरा।

जपत निरन्तर हनुमत बीरा।।

संकट तें हनुमान छुड़ावै।

मन क्रम बचन ध्यान जो लावै।।

सब पर राम तपस्वी राजा।

तिन के काज सकल तुम साजा।।

और मनोरथ जो कोई लावै।

सोई अमित जीवन फल पावै।।

चारों जुग परताप तुम्हारा।

है परसिद्ध जगत उजियारा।।

साधु संत के तुम रखवारे।।

असुर निकन्दन राम दुलारे।।

अष्टसिद्धि नौ निधि के दाता।

अस बर दीन जानकी माता।।

राम रसायन तुम्हरे पासा।

सदा रहो रघुपति के दासा।।

तुह्मरे भजन राम को पावै।

जनम जनम के दुख बिसरावै।।

अंत काल रघुबर पुर जाई।

जहां जन्म हरिभक्त कहाई।।

और देवता चित्त न धरई।

हनुमत सेइ सर्ब सुख करई।।

संकट कटै मिटै सब पीरा।

जो सुमिरै हनुमत बलबीरा।।

जय जय जय हनुमान गोसाईं।

कृपा करहु गुरुदेव की नाईं।।

जो सत बार पाठ कर कोई।

छूटहि बन्दि महा सुख होई।।

जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा।

होय सिद्धि साखी गौरीसा।।

तुलसीदास सदा हरि चेरा।

कीजै नाथ हृदय महं डेरा।।

दोहा

पवनतनय संकट हरन, मंगल मूरति रूप।

राम लखन सीता सहित, हृदय बसहु सुर भूप।।

पवन तनय संकट हरन, मंगल मूरति रूप.

राम लखन सीता सहित, हृदय बसहु सुर भूप॥

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.)


 

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