Gupt Navratri 2026: जिसे शिव भी न तारे, उसे तारती हैं मां तारा, जानें पूजा विधि, मंत्र और महत्व

Maa Tara Ki Puja Vidhi : सनातन परंपरा में 10 महाविद्या में मां तारा को तंत्र की शक्ति के रूप में पूजा जाता है. शक्ति के इस दिव्य रूप की साधना सभी दुखों को तारने वाली देवी के रूप की जाती है. माध मास की गुप्त नवरात्रि पर मां तारा की कैसे करें पूजा? मां तारा की पूजा का मंत्र और जरूरी नियम को जानने के लिए पढ़ें ये लेख. 

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Maa Tara Ki Puja Vidhi: गुप्त नवरात्रि के दूसरे दिन कैसे करें मां तारा की साधना?
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Maa Tara Ki Sadhna Kaise Kare: माघ मास की गुप्त नवरात्रि में दूसरे दिन मां तारा की पूजा का विधान है, जिनकी पूजा करने पर देवी कृपा से बड़े से बड़ा दुख औ कष्ट शीघ्र ही दूर हो जाता है. हिंदू मान्यता के अनुसार मां तारा व्यक्ति को दैहिक, दैविक और भौतिक ताप से तारने वाली मानी गई हैं. मां दुर्गा के इस दिव्य स्वरूप की पूजा करने से व्यक्ति की सभी कामनाएं शीघ्र ही पूरी होती हैं. गुप्त नवरात्रि में आज मां तारा की पूजा कैसे करें? क्या है मां तारा को प्रसन्न करने वाला मंत्र? आइए पूजा विधि से लेकर महाउपाय तक सब कुछ विस्तार से जानते हैं. 

मां तारा की पूजा विधि

गुप्त नवरात्रि के दूसरे दिन मां तारा की पूजा करने के लिए यदि संभव हो तो किसी धर्म-कर्म के मर्मज्ञ के निर्देशन में उनकी पूजा अर्चन करें. मां तारा की पूजा करने से पहले तन और मन से पवित्र हो जाएं फिर उनका ध्यान करते हुए उनका आवाहन करें. इसके बाद उनके चित्र या मूर्ति पर जल अर्पित करें. इसके बाद देवी को लाल चंदन, लाल पुष्प, धूप, दीप, फल, मिष्ठान आदि अर्पित करें. इसके बाद मां तारा को प्रसन्न करने के लिए ॐ ह्रीं स्त्रीं हुं फट् का कम से कम एक माला जप जरूर करें. मान्यता है कि मां तारा की श्रद्धा और विश्वास के साथ साधना करने पर साधक के जीवन से जुड़ी सभी विघ्न बाधाएं दूर होती हैं और सुख-सौभाग्य प्राप्त होता है. 

मां तारा की पूजा का धार्मिक महत्व

हिंदू मान्यता के अनुसार मां तारा जीवन के सभी दुखों को दूर करके सुख, सौभाग्य, धन, वैभव आदि प्रदान करने वाली हैं. मां तारा के आशीर्वाद से व्यक्ति के सभी रोग, शोक दूर हो जाते हैं और साधक सुखी जीवन जीता है. मां तारा की साधना न सिर्फ हिंदू धर्म में बल्कि बुद्ध धर्म में भी की जाती है. मान्यता है कि भगवान बुद्ध ने भी मां तारा की विशेष साधना की थी. 

गुप्त नवरात्रि की साधना के नियम 

  • गुप्त नवरात्रि की साधना करने वाले साधक को प्रतिदिन तन और मन दोनों से पवित्र होकर ही देवी साधना करनी चाहिए.
  • गुप्त नवरात्रि में 10 महाविद्या की साधना करने वाले व्यक्ति को तामसिक चीजों का सेवन भूलकर भी नहीं करना चाहिए और सिर्फ सात्विक आहार ग्रहण करना चाहिए. 
  • साधक को लोगों के साथ बेवजह की बातचीत या वाद-विवाद नहीं करना चाहिए और यदि संभव हो तो कुछ समय का मौन रखते हुए मन में देवी मंत्रों का जप करना चाहिए. 
  • गुप्त नवरात्रि में देवी की साधना करने वाले व्यक्ति को किसी के प्रति ईर्ष्या या द्वेष नहीं रखना चाहिए. 

  • गुप्त नवरात्रि में देवी के पूजा स्थान की पवित्रता बनाए रखें और उसकी प्रतिदिन सफाई करें. पूजा के फूल को प्रतिदिन बदलते रहना चाहिए. 
  • गुप्त नवरात्रि की साधना करने वाले साधक को यदि संस्कृत में मंत्र पढ़ने की दिक्कत हो तो अशुद्ध पढ़ने की बजाय, दुर्गा चालीसा का पाठ, भजन-कीर्तन या माता के जयकारे लगाना चाहिए. 
  • गुप्त नवरात्रि के दौरान देवी के दरबार का दीया नहीं बुझने पाए इसका हमेशा ध्यान रखना चाहिए. 
  • ​यदि संभव हो तो प्रतिदिन एक कन्या का पूजन करना चाहिए या फिर अष्टमी या नवमी जैसी आपकी मान्यता हो उसके हिसाब से कन्याओं का पूजन करके उन्हें अपने सामर्थ्य के अनुसार उपहार देकर आशीर्वाद लेना चाहिए. 

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.)

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