मार्च महीने में इस तारीख को रखा जाएगा गणगौर का व्रत, यहां जानिए महत्व, पूजा विधि और मुहूर्त

वैसे यह व्रत एक दिन का होता है, लेकिन राजस्थान कई हिस्सों में यह पर्व के रूप में 16 से 18 दिन तक चलता है. ऐसे में आइए जानते हैं गणगौर की पूजा कब है, इसके नियम और महत्व...

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मार्च महीने में इस तारीख को रखा जाएगा गणगौर का व्रत, यहां जानिए महत्व, पूजा विधि और मुहूर्त
मान्यतानुसार, इस फल को नियमपूर्वक करने से अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होती है.

Gangaur vrat 2025 : हिन्दू धर्म में गणगौर व्रत का वशेष महत्व है. इसे तृतीया तीज के रूप में भी जाना जाता है. यह व्रत भी सुहाग की लंबी आयु और मनचाहा वर पाने के लिए रखा जाता है. इसमें देवी गौरी और भगवान शंकर की पूजा की जाती है. वैसे यह व्रत एक दिन का होता है, लेकिन राजस्थान के कई हिस्सों में यह पर्व के रूप में 16 से 18 दिन तक चलता है. ऐसे में आइए जानते हैं गणगौर की पूजा कब है, इसकी विधि और महत्व...

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गणगौर व्रत कब है - Gangaur vrat kab hai

यह व्रत चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है. ऐसे में शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि की शुरूआत 31 मार्च, प्रातः 9 बजकर 11 मिनट पर होगी, जिसका समापन 1 अप्रैल, प्रातः 5 बजकर 42 मिनट पर. उदयातिथि पड़ने के कारण यह पर्व 31 मार्च को रखा जाएगा. यह पर्व  मुख्य रूप से हरियाणा, राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश सहित देश के विभिन्न क्षेत्रों में मनाया जाता है. 

गणगौर पूजा का महत्व- Gangaur vrat significnace

मान्यतानुसार, इस फल को नियमपूर्वक करने से अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होती है. साथ ही कुंआरी लड़कियों को मनचाहा वर मिलता है. इसके अलावा भगवान शिव और माता पार्वती का आशीर्वाद प्राप्त होता है.

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गणगौर पूजा विधि - Gangaur vrat puja vidhi

- गणगौर व्रत के दिन सुबह स्नान करके साफ कपड़े धारण कर लीजिए, इसके बाद आप माता पार्वती और भगवान शंकर का ध्यान करके व्रत का संकल्प लीजिए. 

- इसके बाद पूजा घर में गंगाजल छिड़कर शुद्ध कर लीजिए. अब आप पूजा की चौकी पर लाल वस्त्र बिछाएं. इसके बाद माता पार्वती और भगवान शंकर की प्रतिमा स्थापित करें.

- अब आप देवी मां को सिंगार के सामान अर्पित करिए. अब आप चंदन, अक्षत, रोली, और कुमकुम लगाएं. इसके साथ ही, उन्हें दूर्वा भी चढ़ाइए.

- माता-पार्वती और भगवान शिव के समक्ष धूप दीप जलाएं. साथ ही उन्हें चूरमे का भोग लगाएं. 

- अब आप एक थाली में चांदी का सिक्का, सुपारी, पान, दूध, दही, गंगाजल, हल्दी, कुमकुम और दुर्वा डालकर सुहाग के लिए जल तैयार कर लीजिए. 

- अंत में आप इस जल को माता-पार्वती और भगवान शिव को छिड़कें और फिर घर के सदस्यों पर. 

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.)

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