Ekadashi vrat katha : पापमोचनी एकादशी हिंदू धर्म में बेहद पवित्र और फलदायी मानी जाती है. साल 2026 में पापमोचनी एकादशी का व्रत 15 मार्च, रविवार को रखा जाएगा, जबकि इसका पारण 16 मार्च को किया जाएगा. एकादशी के दिन भगवान विष्णु की पूजा का विशेष महत्व होता है, लेकिन इस दिन तुलसी का महत्व और भी बढ़ जाता है. धार्मिक मान्यता है कि तुलसी भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय है, इसी कारण उसे हरिप्रिया भी कहा जाता है. ऐसे में अगर भक्त इस दिन श्रद्धा से तुलसी चालीसा का पाठ करते हैं, तो उन्हें प्रभु श्रीहरि विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होने की मान्यता है और जीवन में सुख-समृद्धि आने की कामना की जाती है.
14 या 15 मार्च, कब है पापमोचनी एकादशी? जानें सही तिथि, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि
क्यों खास मानी जाती है पापमोचनी एकादशी
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पापमोचनी एकादशी आत्मशुद्धि और भक्ति का प्रतीक मानी जाती है. ऐसा कहा जाता है कि इस दिन भगवान विष्णु की पूजा करने से मन को शांति मिलती है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा आती है. कई लोग पूरे दिन व्रत रखते हैं और विष्णु सहस्रनाम या भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप करते हैं. श्रद्धा और विश्वास के साथ किया गया ये व्रत व्यक्ति को आध्यात्मिक रूप से मजबूत बनाने में मदद करता है.
इस दिन तुलसी का क्यों है खास महत्व
भगवान विष्णु की पूजा में तुलसी का विशेष स्थान माना जाता है. विष्णु पूजा में तुलसी अर्पित किए बिना पूजा अधूरी मानी जाती है. इसलिए पापमोचनी एकादशी के दिन तुलसी की पूजा और तुलसी चालीसा का पाठ करना बहुत शुभ कहा जाता है. धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन तुलसी के सामने दीपक जलाकर भगवान विष्णु का स्मरण करने से सकारात्मक ऊर्जा मिलती है और जीवन की कई परेशानियां दूर हो सकती हैं.
श्री तुलसी चालीसा
श्री तुलसी महारानी, करूं विनय सिरनाय।
जो मम हो संकट विकट, दीजै मात नशाय।।
(चौपाई)
नमो नमो तुलसी महारानी, महिमा अमित न जाय बखानी।
दियो विष्णु तुमको सनमाना, जग में छायो सुयश महाना।।
विष्णुप्रिया जय जयति भवानि, तिहूँ लोक की हो सुखखानी।
भगवत पूजा कर जो कोई, बिना तुम्हारे सफल न होई।।
जिन घर तव नहिं होय निवासा, उस पर करहिं विष्णु नहिं बासा।
करे सदा जो तव नित सुमिरन, तेहिके काज होय सब पूरन।।
कातिक मास महात्म तुम्हारा, ताको जानत सब संसारा।
तव पूजन जो करैं कुंवारी, पावै सुन्दर वर सुकुमारी।।
कर जो पूजन नितप्रति नारी, सुख सम्पत्ति से होय सुखारी।
वृद्धा नारी करै जो पूजन, मिले भक्ति होवै पुलकित मन।।
श्रद्धा से पूजै जो कोई, भवनिधि से तर जावै सोई।
कथा भागवत यज्ञ करावै, तुम बिन नहीं सफलता पावै।।
छायो तब प्रताप जगभारी, ध्यावत तुमहिं सकल चितधारी।
तुम्हीं मात यंत्रन तंत्रन, सकल काज सिधि होवै क्षण में।।
औषधि रूप आप हो माता, सब जग में तव यश विख्याता।
देव रिषी मुनि औ तपधारी, करत सदा तव जय जयकारी।।
वेद पुरानन तव यश गाया, महिमा अगम पार नहिं पाया।
नमो नमो जै जै सुखकारनि, नमो नमो जै दुखनिवारनि।।
नमो नमो सुखसम्पति देनी, नमो नमो अघ काटन छेनी।
नमो नमो भक्तन दुःख हरनी, नमो नमो दुष्टन मद छेनी।।
नमो नमो भव पार उतारनि, नमो नमो परलोक सुधारनि।
नमो नमो निज भक्त उबारनि, नमो नमो जनकाज संवारनि।।
नमो नमो जय कुमति नशावनि, नमो नमो सुख उपजावनि।
जयति जयति जय तुलसीमाई, ध्याऊँ तुमको शीश नवाई।।
निजजन जानि मोहि अपनाओ, बिगड़े कारज आप बनाओ।
करूँ विनय मैं मात तुम्हारी, पूरण आशा करहु हमारी।।
शरण चरण कर जोरि मनाऊं, निशदिन तेरे ही गुण गाऊं।
करहु मात यह अब मोपर दाया, निर्मल होय सकल ममकाया।।
मंगू मात यह बर दीजै, सकल मनोरथ पूर्ण कीजै।
जनूं नहिं कुछ नेम अचारा, छमहु मात अपराध हमारा।।
बरह मास करै जो पूजा, ता सम जग में और न दूजा।
प्रथमहि गंगाजल मंगवावे, फिर सुन्दर स्नान करावे।।
चन्दन अक्षत पुष्प् चढ़ावे, धूप दीप नैवेद्य लगावे।
करे आचमन गंगा जल से, ध्यान करे हृदय निर्मल से।।
पाठ करे फिर चालीसा की, अस्तुति करे मात तुलसा की।
यह विधि पूजा करे हमेशा, ताके तन नहिं रहै क्लेशा।।
करै मास कार्तिक का साधन, सोवे नित पवित्र सिध हुई जाहीं।
है यह कथा महा सुखदाई, पढ़े सुने सो भव तर जाई।।
(दोहा)
तुलसी मैया तुम कल्याणी, तुम्हरी महिमा सब जग जानी।
भाव ना तुझे माँ नित नित ध्यावे, गा गाकर मां तुझे रिझावे।।
यह श्री तुलसी चालीसा
पाठ करे जो कोय।
गोविन्द सो फल पावही जो मन इच्छा होय।।














