Jhulelal Jayanti 2026 Kab Hai: हिंदू नवसंवत्सर और गुड़ी पड़वा के दूसरे दिन यानि चैत्र मास के शुक्लपक्ष की द्वितीया को चेटी चंड का पर्व मनाया जाता है. चेटी चंड के पावन पर्व को सिंधी समाज संत झूलेलाल के जन्मोत्सव के रूप में मनाते हैं. संत झूलेलाल जिन्हें उडेरोलाल भी कहा जाता है, उन्हें 'समुद्र का रक्षक' और सिंधी समाज का संरक्षक क्यों कहा जाता है? चेटी चंड का यह पावन पर्व इस साल कब मनाया जाएगा? आइए इसकी सही तारीख और धार्मिक महत्व को विस्तार से जानते हैं.
चेटी चंड का शुभ मुहूर्त
पंचांग के अनुसार इस साल सिंधी नववर्ष यानि चेटीचंड का पावन पर्व चैत्र मास के शुक्लपक्ष की द्वितीया तिथि यानि 20 मार्च 2026, शुक्रवार को मनाया जाएगा. पंचांग के अनुसार चेटी चंड की पूजा का शुभ मुहूर्त इस दिन सायंकाल 06:32 से लेकर 07:59 बजे तक रहेगा. इसी दिन सिन्धियों के संरक्षक माने जाने वाले झूलेलाल देवता की जयंती मनाई जाएगी.
संत झूलेलाल से जुड़ी कथा
मान्यता है कि एक समय सिंध क्षेत्र में मिरखशाह नाम के शासक ने लोगों का जबरदस्ती धर्म परिवर्तन करवाने का आदेश दे दिया. इसके बाद वहां पर रहने वाले सिंधियों ने नदी के पास जल देवता की प्रार्थना शुरु कर दी. मान्यता है कि 40 दिनों के बाद उस नदी से एक देवता प्रकट हुए, जिन्होंने उनकी रक्षा का वचन देते हुए कहा कि अत्याचार मिरखशाह से बचाने के लिए नसरपुर नाम के स्थान पर एक दिव्य शिशु का जन्म होगा.
चूंकि इस दिव्य शिशु यानि झूलेलाल का जन्म जल देवता के आशीर्वाद से हुआ था इसलिए उसे वरुण देवता का अवतार माना गया है. संत झूलेलाल को उडेरोलाल के नाम से भी जाना जाता है. मान्यता है कि सिंधी समुदाय अपनी समुद्री यात्रा अन्य जल से जुड़ी यात्रा को सफल और सुरक्षित बनाने के लिए भगवान झूलेलाल की विशेष पूजा किया करता था.
चेटी चंड से जुड़ी 5 बड़ी बातें
- चेटी चंड का पर्व सिन्धी समाज के संरक्षक भगवान झूलेलाल के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है.
- संत झूलेलाल को वरुण देवता का अवतार माना जाता है. इस दिन सिंधी समाज जल के देवता वरुण की विशेष पूजा-अर्चना करते हैं.
- चेटी चंड वाले दिन बहिराणा साहिब की परंपरा निभाई जाती है, जिसके तहत लोग एक बर्तन में चीनी, फल, इलायची, सूखे मेवे, मिश्री और दीया जलाकर रखते हैं और उसे किसी पवित्र जल स्रोत जैसे झील या नदी आदि में जाकर विसर्जित करते हैं.
- चेटीचंड पर्व से पूर्व सिंधी समाज से जुड़े लोग 40 दिनों का 'चालीहो' व्रत करते हैं और सात्विक जीवन जीते हुए जमीन पर सोते हैं.
- चेटीचंड पर्व पर सिंधी समाज के लोग अपने घरों में विशेष रूप से मीठे चावल और 'छोले' बनाते हैं. इस दिन लोगों को प्रसाद के रूप में मिश्री और मेवा बांटने की परंपरा भी है.
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.)














