Chaitra Navratri 2026: नवरात्रि की पूजा में माता रानी को कौन सा फल नहीं चढ़ाना चाहिए? ज्योतिषाचार्य से जान लें

Chaitra Navratri 2026: धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कुछ फल ऐसे भी हैं जिन्हें नवरात्रि में चढ़ाना वर्जित माना गया है. आइए ज्योतिषाचार्य से जानते हैं नवरात्रि के नौ दिन में माता रानी को कौन से फल नहीं चढ़ाना चाहिए.

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नवरात्रि में माता रानी को ये फल चढ़ाने से बचें

Chaitra Navratri 2026: चैत्र नवरात्रि का पावन पर्व श्रद्धा और भक्ति का प्रतीक माना जाता है. इन नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की जाती है. हर दिन का अपना विशेष महत्व होता है और भक्त पूरे मन से माता रानी की आराधना करते हैं. पूजा के दौरान मां को फल, मिठाई और अन्य चीजों का भोग लगाया जाता है, लेकिन धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कुछ फल ऐसे भी हैं जिन्हें नवरात्रि में चढ़ाना वर्जित माना गया है. आइए ज्योतिषाचार्य से जानते हैं नवरात्रि के नौ दिन में माता रानी को कौन से फल नहीं चढ़ाना चाहिए.

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नवरात्रि में माता रानी को ये फल चढ़ाने से बचें

इसे लेकर NDTV संग हुई खास बातचीत के दौरान ज्योतिषाचार्य डॉक्टर गौरव कुमार दीक्षित ने बताया, नवरात्रि के दौरान माता रानी को कुछ खास फलों का भोग नहीं लगाना चाहिए. इनमें नींबू, इमली, अनानास, सूखा नारियल, अंजीर और नाशपाती शामिल हैं. माना जाता है कि ये फल तासीर में खट्टे या भारी होते हैं, जो पूजा की शुद्धता और सात्विकता के अनुकूल नहीं होते. इसलिए व्रत रखने वाले लोगों को भी इन फलों का सेवन करने से बचना चाहिए.

इसके अलावा, पूजा में कभी भी सड़े-गले, कटे हुए या बासी फल नहीं चढ़ाने चाहिए. माता रानी को हमेशा ताजे और साफ फल ही अर्पित करने चाहिए. अगर आप फल काटकर चढ़ाते हैं, तो यह भी उचित नहीं माना जाता. फल हमेशा पूरे और ताजे होने चाहिए.

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इस दिन तुलसी अर्पित करने से भी बचें

ज्योतिषाचार्य आगे बताते हैं, जिस दिन मां के चंडिका स्वरूप की पूजा की जाती है, उस दिन तुलसी के पत्ते अर्पित नहीं किए जाते. आमतौर पर तुलसी को बहुत पवित्र माना जाता है, लेकिन इस विशेष दिन पर इसका प्रयोग वर्जित होता है.

नवरात्रि के दौरान आप सेब, केला, अनार, अंगूर, नारियल (ताजा) जैसे फल माता को चढ़ा सकते हैं. ये फल सात्विक और शुभ माने जाते हैं. साथ ही, साफ-सफाई, नियम और सच्ची श्रद्धा का पालन करना भी बहुत जरूरी है. ज्योतिषाचार्य कहते हैं, नवरात्रि केवल पूजा का ही नहीं बल्कि आत्मशुद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का भी पर्व है. सही नियमों का पालन करके और सच्चे मन से माता की भक्ति करने से जीवन में सुख-समृद्धि और शांति बनी रहती है.

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