Sankashti Chaturthi Moon Rise Time: भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी आज, जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और चंद्रोदय का समय

भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी का मुहूर्त शुक्रवार की शाम को 7 बजकर 53 मिनट पर होगा और अगले दिन, 7 मार्च, शनिवार को शाम 7 बजकर 17 मिनट तक रहेगा. इस व्रत में चंद्रोदय की स्थिति को महत्ता दी जाती है, ऐसे में साल 2026 में भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी का व्रत आज यानी 6 मार्च, शुक्रवार को रखा जाएगा.

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कब रखा जाएगा भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी का व्रत?

Sankashti Chaturthi Moon Rise Time: चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी का व्रत रखा जाता है. यह दिन भगवान गणेश की पूजा के लिए विशेष रूप से शुभ माना जाता है. मान्यता है कि इस दिन सच्चे मन से गणेश जी की पूजा करने और व्रत रखने से जीवन की परेशानियां दूर होती हैं और सुख-समृद्धि प्राप्त होती है.

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कब रखा जाएगा भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी का व्रत?

भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी का मुहूर्त शुक्रवार की शाम को 7 बजकर 53 मिनट पर होगा और अगले दिन, 7 मार्च, शनिवार को शाम 7 बजकर 17 मिनट तक रहेगा. इस व्रत में चंद्रोदय की स्थिति को महत्ता दी जाती है, ऐसे में साल 2026 में भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी का व्रत आज यानी 6 मार्च, शुक्रवार को रखा जाएगा.

चंद्रोदय का समय 

भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी के व्रत में चंद्रमा का विशेष महत्व होता है, क्योंकि व्रत का पारण चंद्रमा के दर्शन के बाद ही किया जाता है. द्रिक पंचांग के अनुसार, चन्द्रोदय शाम 9 बजकर 14 मिनट पर होगा. इस समय चंद्र दर्शन कर पूजा करने के बाद व्रत खोला जा सकता है.

व्रत और पूजा विधि
  • सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ-सुथरे कपड़े पहनें. 
  • इसके बाद भगवान गणेश का स्मरण करते हुए व्रत का संकल्प लें. 
  • पूजा के लिए घर के मंदिर या किसी साफ जगह पर एक चौकी रखें और उस पर लाल या पीला कपड़ा बिछाएं. फिर उस पर गणेश जी की मूर्ति या चित्र स्थापित करें.
  • पूजा शुरू करने से पहले गंगाजल से स्थान को शुद्ध कर लें. 
  • इसके बाद भगवान गणेश को फूल, माला, रोली और दूर्वा अर्पित करें. 
  • गणेश जी को मोदक या लड्डू का भोग लगाना बहुत शुभ माना जाता है. 
  • इसके बाद धूप और घी का दीपक जलाकर भगवान गणेश की पूजा करें और श्रद्धा के साथ मंत्रों का जाप करें.
  • पूजा के बाद संकष्टी चतुर्थी की व्रत कथा पढ़ना या सुनना भी शुभ माना जाता है. अंत में गणेश जी की आरती करें और पूरे दिन व्रत रखें.
चंद्रमा की पूजा कैसे करें?
  • शाम के समय चंद्रमा के उदय होने का इंतजार करें. 
  • चंद्रमा दिखाई देने पर एक लोटे में जल और थोड़ा दूध मिलाकर अर्घ्य दें. 
  • इसके साथ ही चावल, फूल और प्रसाद अर्पित करें. 
  • इसके बाद चंद्रमा और भगवान गणेश की आरती करें.

पूजा पूरी होने के बाद प्रसाद ग्रहण करके व्रत का पारण किया जाता है. मान्यता है सच्छी श्रद्धा के साथ भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी का व्रत करने से भगवान गणेश की कृपा प्राप्त होती है और जीवन में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं.

Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.
 

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