Basant Panchami 2026: मां सरस्वती का महामंत्र, जिसे जपने से बढ़ेगी बुद्धि और समय पर काम आएगा ज्ञान

Saraswati Mantra: जीवन में हर किसी की ख्वाहिश होती है कि उसकी संतान को अच्छी शिक्षा मिले और वह हर परीक्षा-प्रतियोगिता में सफल रहे. यदि आप भी चाहते हैं कि आपकी संतान की खूब तरक्की हो और वह जीवन की हर परीक्षा में कामयाब रहे तो आज बंसत पंचमी की पूजा के दौरान उससे मां सरस्वती के मंत्र का जप जरूर कराएं. 

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Basant Panchami 2026: मां सरस्वती का महामंत्र
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Saraswati Puja Mantra: आज माघ मास के शुक्लपक्ष की पंचमी पर पूरे देश भर में बसंत पंचमी का महापर्व मनाया जा रहा है. यह पर्व विद्या, वाणी और कला की देवी मां सरस्वती की पूजा के लिए अत्यंत ही शुभ और फलदायी माना गया है. हिंदू मान्यता के अनुसार इस दिन विधि-विधान से भगवती मां सरस्वती की पूजा करने पर पूरे साल उनका आशीर्वाद बना रहता है और साधक को शिक्षा, संगीत, कला और करियर आदि में मनचाही सफलता प्राप्त होती है. हिंदू मान्यता के अनुसार यदि किसी देवी-देवता के मंत्र को पूरी श्रद्धा और विश्वास के साथ पढ़ा जाए तो उसका शीघ्र ही पुण्यफल प्राप्त होता है. आइए हंसवाहिनी मां सरस्वती की पूजा के सरल एवं सिद्ध मंत्र तथा प्रार्थना के बारे में विस्तार से जानते हैं. 

मां महासरस्वती का ध्यान मंत्र

घण्टाशूलहलानि शंखमुसले चक्रं धनु: सायकं,
हस्ताब्जैर्दधतीं धनान्तविलसच्छीतांशु तुल्यप्रभाम्. 
गौरीदेह समुद्भवां त्रिनयनामाधारभूताम्महा
म्पूर्वामत्र सरस्वतीमनुभजे शुम्भादिदैत्यार्दिनीम्.. 

मां सरस्वती का प्रार्थना मंत्र

या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता.
या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना.
या ब्रह्माच्युतशंकरप्रभृतिभिर्देवैः सदा वन्दिता.
सा मां पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्यापहा.

मां सरस्वती की पूजा के जप मंत्र 

ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः

ॐ ऐं महासरस्वत्यै नमः.

ॐ ऐं ह्रीं क्लीं महासरस्वती देव्यै नमः

सरस्वती नमस्तुभ्यं वरदे कामरुपिणि. 
विद्यारंभं करिष्यामि सिद्धिर्भवतु मे सदा..

या देवी सर्वभूतेषु विद्यारूपेण संस्थिता.
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः.

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ॐ अर्हं मुख कमल वासिनी पापात्म क्षयम्कारी
वद वद वाग्वादिनी सरस्वती ऐं ह्रीं नमः स्वाहा.

ॐ ऐं वाग्देव्यै विद्महे कामराजाय धीमहि.
तन्नो देवी प्रचोदयात्.

सरस्वती मंत्र जप के नियम

हिंदू मान्यता के अनुसार मां सरस्वती के मंत्र को जपने के लिए हमेशा स्वच्छ और पवित्र स्थान का चयन करना चाहिए. वास्तु के अनुसार सरस्वती पूजा और मंत्र का जप हमेशा घर के ईशान कोण में उत्तर या पूर्व दिशा की ओर मुख करके करना चाहिए. इसी प्रकार जप हमेशा एक निश्चित समय पर एक अनुपात में करना चाहिए. जप को हमेंशा न्यूनतम से अधिकतम की ओर आगे बढ़ाना चाहिए. मंत्र का उच्चारण शुद्ध रूप से करना चाहिए और इसे जपते समय क्रोध या ईर्ष्या नहीं करनी चाहिए. 

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मां सरस्वती के मंत्र जप का लाभ 

हिंदू मान्यता के अनुसार विद्या की देवी मां सरस्वती की पूजा के दौरान इन मंत्रों का जप करने पर साधक एकाग्र मन से अध्ययन, संगीत साधना आदि कार्य को करता है, जिसके कारण उसके कार्य में रचनात्मकता आती है और वह जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में सफल होता है. मान्यता है कि मां सरस्वती के मंत्र जप से साधक की स्मरण शक्ति बढ़ती है और प्रत्येक कार्य को बेहतर तरीके से करता है. 

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.)

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