Amalaki Ekadashi Ka Dharmik Mahatva: सनातन परंपरा में प्रत्येक मास के कृष्णपक्ष और शुक्लपक्ष में पड़ने वाली एकादशी तिथि को भगवान विष्णु की पूजा एवं व्रत के लिए अत्यधिक शुभ और फलदायी माना गया है. इस पावन तिथि का महत्व तब और बढ़ जाता है, जब यह फाल्गुन मास के शुकलपक्ष में पड़ती है और आमलकी एकादशी या फिर रंगभरी एकादशी आदि के नामों से जानी जाती है. हिंदू मान्यता के अनुसार आमलकी एकादशी व्रत का क्या धार्मिक महत्व है? आमलकी एकादशी व्रत वाले दिन किस विधि से भगवान विष्णु की पूजा करनी चाहिए? आमलकी एकादशी पर आंवला के पेड़ और उसके फल की पूजा का क्या महत्व है? आइए इस पावन व्रत से जुड़ी 5 बड़ी बातों को विस्तार से जानते हैं.
शुभ समय में करें आमलकी एकादशी व्रत की पूजा
सनातन परंपरा पूजा-पाठ और महत्वपूर्ण कार्यों को शुभ समय में किए जाने की परंपरा है. ऐसे में आमलकी एकादशी व्रत की पूजा भी आपको सही तारीख और शुभ समय में करनी चाहिए. पंचांग के अनुसार आमलकी एकादशी का व्रत 27 फरवरी 2026 को रखा जाएगा और इसका पारण अगले दिन यानि 28 फरवरी 2027 की सुबह 06:47 से 09:06 बजे के बीच होगा.
आमलकी एकादशी व्रत में आंवले के पेड़ का महत्व
हिंदू मान्यता के अनुसार आंवले के पेड़ में भगवान विष्णु का वास होता है. पौराणिक मान्यता के अनुसार इस पवित्र पेड़ को भगवान विष्णु ने ब्रह्मा जी के साथ ही प्रकट किया था. मान्यता है कि फाल्गुन मास की एकादशी वाले दिन जो कोई व्यक्ति भगवान विष्णु के साथ आंवला के पेड़ की पूजा करता है, वह श्री हरि की कृपा से सभी सुखों को भोगता हुआ अंत में मोक्ष को प्राप्त होता है.
आमलकी एकादशी पर तुलसी पूजा का महत्व
हिंदू मान्यता के अनुसार जिस प्रकार पीपल और आंवले के पेड़ पर भगवान विष्णु का वास माना गया है, उसी तरह धन की देवी लक्ष्मी का स्वरूप तुलसी जी को माना जाता है. सनातन परंपरा में तुलसी जी को विष्णुप्रिया के नाम से पुकारा जाता है. ऐसे में आमलकी एकादशी वाले दिन आंवले के पेड़ की पूजा करने के साथ तुलसी जी की पूजा भी करनी चाहिए.
आमलकी एकादशी व्रत का उपाय
हिंदू मान्यता के अनुसार आमलकी एकादशी व्रत वाले दिन व्यक्ति को भगवान विष्णु के साथ आंवले के पेड़ की विशेष रूप से पूजा करते हुए उसकी कम से कम 7 बार परिक्रमा करनी चाहिए. इसी प्रकार इस दिन व्यक्ति को यथासंभव आंवले का पेड़ लगाना चाहिए या फिर दान करना चाहिए. आमलकी एकादशी व्रत पर शाम के समय आंवले के पेड़ के नीचे शुद्ध घी का दीया जलाना चाहिए.
आमलकी एकादशी का धार्मिक महत्व
हिंदू मान्यता के अनुसार आमलकी एकादशी का व्रत विधि-विधान से करने पर साधक को सैकड़ों यज्ञ करने के बराबर पुण्यफल प्राप्त होता है. आमलकी व्रत की पूजा भगवान विष्णु से सुख, सौभाग्य और आरोग्य का वरदान दिलाती है. इस व्रत के पुण्य प्रताप से साधक के जीवन से जुड़े सारे दुख, रोग और शोक दूर हो जाते हैं और लक्ष्मी संग नारायण की कृपा हर समय बनी रहती है.
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.)














