Adhik Maas 2026: अधिक मास, मलमास और खरमास में क्या होता है अंतर? जानें इनका धार्मिक महत्व

Difference between Adhik Maas and Kharmas: पंचांग के अनुसार ​हिंदी महीनों में अधिकमास, मलमास और खरमास तीनों एक ही होते हैं? यदि ये अलग-अलग हैं तो आखिर इनका अपना महत्व क्या है? अधिकमास, मलमास, पुरुषोत्तम मास और खरमास के बीच का अंतर और धार्मिक महत्व को विस्तार से जानने के लिए जरूर पढ़ें ये लेख. 

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Adhik Mass And Kharmas Significance: अधिकमास और खरमास का अंतर एवं धार्मिक महत्व
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Adhik Maas Aur Kharmas Mein Kya Antar Hai: सनातन परंपरा में साल के सभी 12 मास यानि चैत्र, वैशाख, ज्येष्ठ, आषाढ़, श्रावण, भाद्रपद, अश्विन, कार्तिक, मार्गशीर्ष, पौष, माघ, और फाल्गुन का अपना एक अलग महत्व होता है. इन सभी मास के अलावा एक 13वां मास भी होता है जो हर तीन साल में एक बार आता है, जिसे अधिक मास के नाम से जाना जाता है. इन सभी मास में अक्सर लोगों को अधिकमास, मलमास और खरमास को लेकर भ्रम बना रहता है. यदि आप भी इन तीनों मास को लेकर कन्फ्यूज रहते है, तो आइए विस्तार से जानते हैं कि इन तीनों आखिर क्या अंतर और क्या धार्मिक महत्व है. 

अधिक मास क्या होता है? 

सबसे पहले आइए जानते हैं कि आखिर हिंदू कैलेंडर में अधिक मास का क्या महत्व होता है. पंचांग के अुनसार अधिक मास हर तीन साल में एक बार आता है. इसे सनातन परंपरा में मलमास और पुरुषोत्तम मास के नाम से भी जाना जाता है. जैसा कि अधिक मास के नाम से ही स्पष्ट होता है कि यह एक अतिरिक्त मास होता है, जो कि चंद्र और सौर वर्ष की गणना के बीच के होने वाले अंतर को संतुलित करने के लिए जोड़ा जाता है. अधिक मास को मलमास कहने के भी पीछे एक कारण है. अधिक मास को मलमास इसलिए कहा जाता है क्योंकि इस मास में सूर्य संक्रांति नहीं होती है. जिसके कारण यह ज्योतिष रूपसे मलिन माना जाता है.

चूंकि इस में शुभ काम की मनाही होती है, इसलिए इस मास का कोई भी देवता स्वामी नहीं बनना चाहता था, लेकिन जब ऋषियों ने श्रीहरि से प्रार्थना की तो उन्होंने इसे स्वयं का नाम देकर अपना लिया. तभी से से अधिक मास या फिर कहें मलमास को पुरुषोत्तम मास कहा जाने लगा. जगत के पालनहार भगवान विष्णु का नाम जुड़ जाने के बाद इस मास में की जाने वाली साधना-आराधना, जप-तप और दान आदि का धार्मिक-आध्यात्मिक महत्व बढ़ गया. 

खरमास क्या होता है?

पंचांग के अनुसार जहां अधिकमास या फिर कहें मलमास तीन साल में एक बार आता है, वहीं खरमास एक साल में दो बार आता है. पंचांग के अनुसार हर साल जब नवग्रहों के राजा सूर्य जब देवगुरु बृहस्पति की राशि धनु और मीन राशि में गोचर करते हैं तो खरमास लगता है. ज्योतिष के अनुसार इन दो महीने में लगने वाले खरमास के दौरान सूर्य देवता का तेज कम होता है. खरमास 30 दिन का होता है और इसके प्रारंभ होते ही सभी मांगलिक कार्य बंद हो जाते हैं.

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अधिक मास की तरह खरमास में भी भगवान श्री विष्णु  और उन्हीं का दिव्य स्वरूप माने जाने वाले भगवान सूर्य नारायण की पूजा का बहुत ज्यादा महत्व माना गया है. मान्यता है कि खरमास में भगवान श्री विष्णु और सूर्य देवता के मंत्रों का जप करने पर शीघ्र ही इन दोनों देवताओं का आशीर्वाद बरसता है और साधक को सुख-समृद्धि प्राप्त होती है. 

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