Donation: मान्यतानुसार इन चीजों का दान करना हो जाता है व्यर्थ, जानें किन चीजों का दान नहीं किया जाता

Donation: पूर्णिमा, अमावस्या, एकदशी और विशेष तिथियों पर दान करना शुभ माना गया है. कहा जाता है कि ऐसा करने से ईश्वर का आशीर्वाद प्राप्त होता है.

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Donation: हिंदू धर्म में दान का विशेष महत्व है.

Donation: हिंदू धर्म में दान (Donation) का विशेष महत्व बताया गया है. पूर्णिमा (Purnima), अमावस्या (Amavasya), एकादशी (Ekadashi) और विशेष तिथियों पर दान (Daan) करना विशेष फलदायी माना गया है. मान्यता है प्रत्येक व्यक्ति को अपनी आय का कुछ अंश दान करना चाहिए. कहा जाता है कि ऐसा करने से ईश्वर का आशीर्वाद प्राप्त होता है. साथ ही जीवन में सुख और सौभाग्य की वृद्धि होती है. कहा जाता है कि अलग-अलग वस्तुओं का दान करने से अलग-अलग समस्याएं दूर हो जाती हैं. लेकिन बिना सोचे समझे दान करना भी नुकसानदेह हो सकता है. आइए धार्मिक मान्यतानुसार जानते हैं कि किन चीजों का दान नहीं करना चाहिए. 

धार्मिक पुस्तकें 

मान्यतानुसार, धार्मिक पुस्तकों का दान कभी भी ऐसे व्यक्ति को नहीं करना चाहिए जिन्हें पढ़ने में कोई रुचि ना हो. ऐसे लोग दान में दी गई धार्मिक पुस्तकों को बोझ समझकर उसे कचड़े या कबाड़खाने में डाल सकते हैं. काहा जाता है कि ऐसे में दान का पुण्य नहीं मिलता है. ऐसे में नास्तिक लोगों को धार्मिक पुस्तकों का दान नहीं करना चाहिए.

जूठे भोजन

शास्त्रों में भोजन या अन्न दान को सबसे बड़ा दान माना गया है. मान्यता है कि भूखे को भोजन कराने से भगवान प्रसन्न होते हैं. साथी भूखों की दुआएं भी मिलती हैं. कहा जाता है कि ऐसा करने से जीवन में सौभाग्य आता है. लेकिन कहा गया है कि किसी को भी जूठे भोजन का दान नहीं करना चाहिए. मान्यता है कि ऐसा करने से मां अन्नपूर्णा का अपमान होता है. 

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लक्ष्मीजी की मूर्ति

धार्मिक मान्यतानुसार मां लक्ष्मी धन और ऐश्वर्य की देवी हैं. कहा जाता है कि मां लक्ष्मी को कृपा हो जाए तो जीवन में धन की कमी नहीं होती है. मां लक्ष्मी की पूजा के बाद उनसे घर में निवास करने की प्रर्थना की जाती है. इसलिए माना जाता है कि मां लक्ष्मी की मूर्ति या तस्वीर का दान नहीं करना चाहिए. माना जाता है कि ऐसा करने से मां लक्ष्मी घर से चली जाती हैं. इसके अलावा लक्ष्मी-गणेश वाले चांदी के सिक्कों का दान भी नहीं किया जाता है. 

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पात्रों का दान

धार्मिक मान्यता है कि पात्रों का दान किसी भी सुखी-संपन्न व्यक्ति के बीच नहीं करना चाहिए. दरअसल मान्यता है कि सुखी-संपन्न व्यक्ति दान में दिए गए पात्र का सही इस्तेमाल नहीं कर सकता. ऐसे में दान का पुण्यफल प्राप्त नहीं होता है, ऐसी मान्यता है. इसलिए कहा जाता है कि किसी जरूरतमंदों को ही पात्रों का दान करना चाहिए. 

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(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.) 

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