Budget 2026: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में देश का बजट पेश कर दिया है. इस बजट में एक शब्द की सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है, और वो है 'बायो-फार्मा शक्ति'. सरकार ने इसके लिए 10,000 करोड़ रुपये का भारी-भरकम फंड रखा है. लेकिन सवाल यह है कि आखिर ये 'बायो-फार्मा' क्या है और इससे आपकी जिंदगी कैसे बदलेगी? आइए समझते हैं बिल्कुल आसान शब्दों में.
Budget 2026: भारत बनेगा बायो फार्मा का हब, बजट में तीन नाईपर इंस्टीट्यूट बनाने का ऐलान
क्या है बायो फार्मा - What is Bio Farm
आम तौर पर जो दवाइयां हम खाते हैं (जैसे पैरासिटामोल), वे केमिकल्स को मिलाकर लैब में बनाई जाती हैं. इन्हें हम 'फार्मा' कहते हैं. लेकिन 'बायो-फार्मा' (Biopharmaceuticals) इनसे अलग और एडवांस होती हैं. ये दवाइयां किसी केमिकल से नहीं, बल्कि जीवित चीजों (Living Organisms) जैसे कि बैक्टीरिया, यीस्ट या इंसानी कोशिकाओं (Cells) का इस्तेमाल करके बनाई जाती हैं.
असरदार इलाज
ये दवाइयां कैंसर, डायबिटीज और किडनी जैसी गंभीर बीमारियों के लिए रामबाण होती हैं.
कम साइड इफेक्टक्योंकि ये जैविक स्रोतों से बनती हैं, इसलिए शरीर इन्हें बेहतर तरीके से स्वीकार करता है.
भविष्य की तकनीकइसे ही 'बायो-फार्मा शक्ति' कहा जा रहा है, क्योंकि अब इलाज केमिकल्स से बढ़कर सेलुलर लेवल पर पहुxच गया है.
10 हजार करोड़ का भारी-भरकम फंड का एलान करते हुए वित्त मंत्री ने बताया कि अगले 5 सालों में इस सेक्टर के लिए 10,000 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे. इस पैसे का मुख्य उद्देश्य देश में 'जैविक' और 'जैव-सदृश' (Biosimilars) दवाओं के उत्पादन के लिए एक ऐसा इकोसिस्टम तैयार करना है, जहां दवाएं भारत में ही बनें और आम आदमी को सस्ती दरों पर मिल सकें. अभी ऐसी कई दवाएं हमें विदेशों से मंगानी पड़ती हैं जो बहुत महंगी होती हैं.