सरकारी स्कूलों के कुल बजट का महज आधा पैसा हुआ खर्च, संसदीय समिति की रिपोर्ट में चौंकाने वाला खुलासा

Education Budget: संसदीय समिति ने बताया है कि शिक्षा के लिए तय किए गए ₹62,660 करोड़ में से केवल 51.5% पैसा ही इस्तेमाल हो पाया है. इसके अलावा कई सरकारी योजनाओं के बजट में कटौती हुई है.

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Education Budget Report: एजुकेशन का पैसा नहीं हो पा रहा खर्च

Education Budget: केंद्र सरकार की तरफ से स्कूलों में शिक्षा के लिए जो बजट दिया गया था, उसका महज आधा पैसा ही खर्च हो पाया है. ये बात संसदीय समिति की रिपोर्ट में सामने आई है. समिति ने केंद्र सरकार की स्कूली शिक्षा योजनाओं में पैसा खर्च न होने पर चिंता जताई है. रिपोर्ट के मुताबिक, 13 फरवरी 2026 तक प्रमुख योजनाओं के लिए रखे गए बजट का केवल 51.5% हिस्सा ही इस्तेमाल हो पाया है. कांग्रेस सांसद दिग्विजय सिंह की अध्यक्षता वाली इस समिति ने अपनी रिपोर्ट में कई कमियों का जिक्र किया और चिंता जताई है. 

इतना था कुल बजट 

संसदीय समिति ने बताया है कि शिक्षा के लिए तय किए गए ₹62,660 करोड़ में से केवल 51.5% पैसा ही इस्तेमाल हो पाया है. इसके अलावा पीएम-पोषण (मिड-डे मील) और पीएम-श्री जैसी योजनाओं के बजट में भी कटौती की गई है. समग्र शिक्षा अभियान के ₹41,250 करोड़ में से सिर्फ 54.9% पैसा खर्च हुआ. यह योजना स्कूलों की मरम्मत और बच्चों की पढ़ाई सुधारने के लिए है. 

इसके अलावा मिड-डे मील के लिए ₹12,500 करोड़ का बजट था, जिसे घटाकर ₹10,600 करोड़ कर दिया गया. 'पीएम-श्री' स्कूलों और शिक्षकों की ट्रेनिंग (STARS) के बजट में भी भारी कटौती की गई है. सरकार का कहना है कि राज्यों की तरफ से देरी और कुछ राज्यों (जैसे पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु) को फंड न मिल पाने की वजह से यह कमी आई है. 

पश्चिम बंगाल को नहीं मिला कोई पैसा

संसदीय समिति ने चिंता जताई है कि पश्चिम बंगाल को 2023-24 से मिड-डे मील के लिए कोई पैसा नहीं मिला है. साथ ही, देशभर में इस योजना का लाभ लेने वाले बच्चों की संख्या 12.16 करोड़ से घटकर 10.99 करोड़ रह गई है. समिति ने सलाह दी है कि हर तीन महीने में समय पर इसका पैसा जारी किया जाए. 

इन बातों पर दिया गया जोर

NCERT किताबें: समिति ने कहा है कि कक्षा 9 से 12 की नई किताबें जल्दी छापी जाएं और ये क्षेत्रीय भाषाओं में भी उपलब्ध हों. NCERT में खाली पड़े 60% पदों को भरने की भी सलाह दी गई है. 

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स्कूल छोड़ना: बिहार, झारखंड और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में बच्चों (खासकर लड़कियों) के स्कूल छोड़ने की दर अभी भी चिंता का विषय है. इसके लिए खास योजना बनाने को कहा गया है. 

निपुण भारत (NIPUN): बच्चों को बुनियादी पढ़ाई सिखाने वाले इस मिशन को 2032 तक बढ़ाने और इसका बजट ₹2,500 करोड़ से बढ़ाकर ₹6,000 करोड़ करने का सुझाव दिया गया है. 

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साक्षरता (ULLAS): बुजुर्गों और अनपढ़ों को पढ़ाने के लिए ₹160 करोड़ के बजट को बहुत कम बताया गया है. 

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