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एसी में डाली जाने वाली गैस कितने रुपये की आती है? जान लीजिए जवाब

AC gas Price : AC सर्विस के दौरान अक्सर टेक्नीशियन यह कह देते हैं कि गैस खत्म हो गई है और तुरंत रिफिलिंग जरूरी है. कई मामलों में बिना सही जांच के ही ग्राहकों से अतिरिक्त पैसे वसूले जाते हैं.

एसी में डाली जाने वाली गैस कितने रुपये की आती है? जान लीजिए जवाब
एसी की गैस कितने रुपये की आती है

AC Gas Price: गर्मी के मौसम में एयर कंडीशनर (AC) का इस्तेमाल तेजी से बढ़ जाता है. जैसे-जैसे तापमान चढ़ता है, वैसे-वैसे AC की डिमांड और सर्विसिंग भी बढ़ने लगती है. इस दौरान बेहतर कूलिंग के लिए लोग AC को सर्विस सेंटर या टेक्नीशियन के पास ले जाते हैं. हालांकि, इसी दौरान कई उपभोक्ता गैस रिफिलिंग के नाम पर गैर-जरूरी खर्च या ठगी का शिकार भी हो जाते हैं. एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर उपभोक्ता थोड़ी सतर्कता बरतें और सही जानकारी रखें, तो इस तरह के अतिरिक्त और बेवजह के खर्च से आसानी से बचा जा सकता है.

AC गैस के प्रकार और उनकी जानकारी

AC में ज्यादातर दो प्रकार की गैस का इस्तेमाल होता है. इनमें R32 और R410 शामिल हैं. नए मॉडल के AC में ज्यादातर R32 गैस का इस्तेमाल किया जाता है, जिसे ज्यादा एनर्जी एफिसिएंट और पर्यावरण के लिए बेहतर माना जाता है. ऐसे में गैस भरवाते समय यह पूछना जरूरी है कि आपके AC में कौन सी गैस डाली जा रही है.

गैस खत्म होने के नाम पर बढ़ता बिल

अगर AC की कूलिंग कम हो रही है, तो इसका मतलब यह नहीं कि गैस जरूर खत्म हो गई है. कई बार कूलिंग कॉयल, फिल्टर या दूसरे तकनीकी कारण भी जिम्मेदार हो सकते हैं. लेकिन AC सर्विस के दौरान अक्सर टेक्नीशियन यह कह देते हैं कि गैस खत्म हो गई है और तुरंत रिफिलिंग जरूरी है. कई मामलों में बिना सही जांच के ही ग्राहकों से अतिरिक्त पैसे वसूले जाते हैं. इसलिए किसी भी सर्विस से पहले मार्केट रेट और प्रोसेस की जानकारी होना जरूरी है.

गैस रिफिलिंग का खर्च कितना?

जानकारी के अनुसार, AC में गैस रिफिलिंग का सामान्य खर्च लगभग 1500 से 2500 रुपये के बीच होता है. यह कीमत लीकेज और AC की स्थिति पर निर्भर करती है. अगर कोई टेक्नीशियन इससे कहीं ज्यादा, जैसे 3000 या 4000 रुपये तक की मांग करता है, तो सतर्क रहने की जरूरत है.

एक्सपर्ट्स का मानना है कि AC की बेहतर परफॉर्मेंस के लिए साल में कम से कम दो बार सर्विस कराना जरूरी है. इससे न केवल मशीन की एफिशिएंसी बनी रहती है, बल्कि गैस लीकेज जैसी समस्याओं की संभावना भी कम हो जाती है.

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