अमेरिका-यूरोप छोड़कर अब भारत पढ़ने आएंगे दुनिया भर के छात्र, इकोनॉमिक सर्वे का बड़ा संकेत

इकोनॉमिक सर्वे में भारत को ग्लोबल एजुकेशन हब बनाने का रोडमैप तैयार. जानें कैसे विदेशी छात्रों के लिए आसान होगा वीजा और पढ़ाई, और भारत को क्या होगा फायदा.

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विदेशी छात्रों को भारत बुलाने के लिए नियमों में ढील दी जा रही है.

Economic Survey 2026 : गुरुवार को संसद में पेश हुए इकोनॉमिक सर्वे (Economic Survey) में सरकार ने साफ कर दिया है कि भारत खुद को एक 'इंटरनेशनल एजुकेशन हब' के रूप में तैयार कर रहा है. सरकार का मकसद है कि भारत की शिक्षा व्यवस्था इतनी शानदार हो कि दुनिया भर के टैलेंटेड छात्र यहां आएं और यहीं रहकर देश के विकास में योगदान दें.

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क्यों विदेशी छात्रों की पसंद बन रहा है भारत?

सर्वे के मुताबिक, नई शिक्षा नीति (NEP), UGC के नए नियम और विदेशों के साथ डिग्रियों की आपसी मान्यता (Mutual Recognition) ने भारत के एजुकेशन सिस्टम को काफी बदल दिया है. अब विदेशी यूनिवर्सिटीज भी भारत में अपने कैंपस खोल रही हैं, जैसे कि गुजरात की GIFT City में इसकी शुरुआत हो चुकी है.

भारत के पास दो सबसे बड़ी ताकतें हैं:

सस्ती पढ़ाई

यहां विदेशों के मुकाबले काफी कम खर्च में अच्छी शिक्षा मिलती है.

अंग्रेजी भाषा

भारत में अंग्रेजी में पढ़ाई आसान है, जो विदेशी छात्रों के लिए बहुत बड़ा प्लस पॉइंट है.

'एजुकेशन टूरिज्म' पर भी जोर

सरकार अब 'स्टडी इन इंडिया' अभियान के जरिए सिर्फ किताबी ज्ञान ही नहीं, बल्कि 'एजुकेशन-टूरिज्म' को भी बढ़ावा दे रही है. इसका मतलब है कि विदेशी छात्र यहां आकर भारत की पुरानी परंपराओं, दर्शन (Philosophy), आयुर्वेद, योग और कलाओं को करीब से जान सकेंगे.

सरकार का सुझाव है कि यूनिवर्सिटीज को छोटे समय के कोर्स शुरू करने चाहिए, जैसे-

  • समर स्कूल और सेमेस्टर एक्सचेंज प्रोग्राम.
  • योग, आयुर्वेद और हेरिटेज सर्टिफिकेट कोर्स.
  • गांवों को समझने के लिए 'रूरल इमर्शन लैब्स'. खास तौर पर ब्रिक्स (BRICS) देशों और 'ग्लोबल साउथ' (विकासशील देशों) के छात्रों को भारत लाने पर खास फोकस रहेगा.

वीजा और रहने की सुविधा होगी आसान

विदेशी छात्रों को भारत बुलाने के लिए नियमों में ढील दी जा रही है. सर्वे में कहा गया है कि वीजा प्रक्रिया को तेज और आसान बनाया जाएगा. साथ ही, छात्रों के रहने के लिए अच्छे हॉस्टल, हेल्थ इंश्योरेंस और पढ़ाई के बाद इंटर्नशिप की सुविधाओं को बेहतर किया जाएगा. इससे विदेशी छात्रों का अनुभव भारत में यादगार रहेगा.

डिप्लोमेसी और ग्लोबल स्टैंडर्ड

भारत सालों से 'इंडियन टेक्निकल एंड इकोनॉमिक कोऑपरेशन' प्रोग्राम के जरिए 160 देशों के 2 लाख से ज्यादा लोगों को ट्रेनिंग दे चुका है. सरकार का मानना है कि जब विदेशी यूनिवर्सिटीज भारत आएंगी, तो हमारे अपने कॉलेज भी उनके साथ कॉम्पिटिशन करेंगे और अपनी क्वालिटी सुधारेंगे. हालांकि, सरकार ने यह भी आगाह किया है कि हमें अपनी संस्कृति और परंपराओं को नहीं भूलना चाहिए.

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