सुप्रीम कोर्ट में गजब नजारा, खड़े-खड़े CJI ने EWS कोटे से छात्र को दिलाई मेडिकल सीट

Supreme Court Medical Seat: हाईकोर्ट में याचिकाकर्ता छात्र ने 2 जुलाई 2024 की राजपत्र अधिसूचना को संविधान के अनुच्छेद 14 और 15(6) का उल्लंघन बताते हुए चुनौती दी थी, हालांकि याचिका खारिज हो गई.

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सुप्रीम कोर्ट ने दिलाई मेडिकल सीट

Supreme Court Medical Seat: सुप्रीम कोर्ट में हर कोई न्याय की आखिरी उम्मीद लेकर आता है. यही वजह है कि यहां कई ऐसे मामले आते हैं, जो काफी हैरान करने वाले होते हैं. ऐसा ही एक मामला मंगलवार 10 फरवरी को भी सामने आया, जब CJI सूर्यकांत की बेंच उठ रही थी, उसी समय एक छात्र ने खुद अपना पक्ष रखते हुए बहस की और करीब 10 मिनट खड़े-खड़े सुनवाई करते हुए CJI की बेंच ने फैसला सुना दिया. बेंच ने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी विशेष शक्तियों का प्रयोग करते हुए  राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) और मध्य प्रदेशय सरकार को आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के  NEET-योग्य अभ्यर्थी को MBBS में प्राविजनल दाखिला देने का निर्देश जारी कर दिया.

सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने दिया निर्देश

छात्र को अंतरिम राहत देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता को सत्र 2025-26 में उसकी EWS रैंक के अनुसार MBBS में प्राविजनल एडमिशन दिया जाए, बशर्ते वह निर्धारित शुल्क आदि जमा करे. चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस एनवी अंजारिया की बेंच ने यह आदेश पारित किया. कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता अथर्व चतुर्वेदी ने NEET परीक्षा दो बार पास की, लेकिन विभिन्न कारणों से उसे एडमिशन नहीं मिल पाया. 

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याचिकाकर्ता ने खुद अदालत में पेश होकर कहा कि निजी मेडिकल कॉलेजों में EWS आरक्षण लागू करने के लिए राज्य सरकार ने कोई नीति नहीं बनाई, जिसके कारण उसे सीट नहीं मिल पाई. इससे पहले मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने उसकी याचिका खारिज कर दी थी और राज्य को निजी मेडिकल कॉलेजों में EWS सीट बढ़ाने के लिए एक साल का समय दिया था, जो अभी पूरा नहीं हुआ था.

सीजेआई ने की कड़ी टिप्पणी

सुनवाई के दौरान राज्य के वकील ने कहा कि निजी कॉलेजों के संबंध में नीति पर विचार चल रहा है. इस पर मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा, अगर निजी कॉलेज आरक्षण नीति का पालन नहीं करते, तो उन्हें बंद कर दीजिए, ताला लगा दीजिए. आरक्षण नीति को कैसे नजरअंदाज किया जा सकता है? उन्होंने यह भी कहा कि इस प्रक्रिया के कारण छात्र का करियर खराब नहीं होना चाहिए.

राज्य की दलील से संतुष्ट नहीं हुआ कोर्ट

राज्य की ओर से यह दलील भी दी गई कि याचिकाकर्ता ने काउंसलिंग प्रक्रिया में शर्तों को जानते हुए भाग लिया था, इसलिए अब वह उसे चुनौती नहीं दे सकता, हालांकि पीठ इस तर्क से संतुष्ट नहीं हुई. दरअसल हाईकोर्ट में याचिकाकर्ता ने 2 जुलाई 2024 की राजपत्र अधिसूचना को संविधान के अनुच्छेद 14 और 15(6) का उल्लंघन बताते हुए चुनौती दी थी और बढ़ी हुई EWS सीट पर प्रवेश की मांग की थी. अब शीर्ष अदालत ने छात्र को अंतरिम राहत देते हुए अस्थायी प्रवेश का रास्ता खोल दिया है.

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