दिल्‍ली में बिक रही थीं नकली पेरासिटामोल और जिंक, फर्जी दवा फैक्‍ट्री में पड़ी रेड, करोड़ों की दवाएं जब्‍त

दिल्ली पुलिस ने गया में एक फर्जी दवा फैक्ट्री का भंडाफोड़ किया, जहां नकली जिंक, एजीथ्रोमाइसिन टैबलेट और पैरासिटामोल पाउडर बरामद हुए.

विज्ञापन
Read Time: 3 mins
फटाफट पढ़ें
Summary is AI-generated, newsroom-reviewed
  • दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने नकली दवाओं की एक फैक्ट्री का पर्दाफाश किया
  • गिरोह ट्रामाडोल आधारित नकली दवाएं बना कर अवैध मेडिकल दुकानों के जरिए ऊंचे दामों पर बेच रहा था
  • गिरोह का मास्टरमाइंड अरुण को बिहार के गया से गिरफ्तार किया गया है और अब तक कुल नौ आरोपी पकड़े जा चुके हैं
क्या हमारी AI समरी आपके लिए उपयोगी रही?
हमें बताएं।
नई दिल्‍ली:

1 लाख नकली जिंक की गोलियां, 42 हजार नकली एजीथ्रोमाइसिन टैबलेट और 27 किलो पैरासिटामोल पाउडर... दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच टीम ने एक और  फर्जी दवा फैक्ट्री का भंडाफोड़ किया है. पुलिस के मुताबिक, यह गिरोह ट्रामाडोल आधारित नकली दवाएं तैयार कर बाजार में सप्लाई कर रहा था और लोगों की सेहत के साथ खिलवाड़ कर मोटा मुनाफा कमा रहा था. इस गिरोह के तार दिल्‍ली से बिहार तक फैले हुए हैं.

मास्‍टरमाइंड भी गिरफ्तार
  
दिल्ली पुलिस की एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स ने ड्रग नेटवर्क के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए दूसरी फर्जी दवा फैक्ट्री का पर्दाफाश किया है. इस कार्रवाई में गिरोह का मास्टर कोऑर्डिनेटर अरुण (59) को बिहार के गया से गिरफ्तार किया गया है. अब तक इस मामले में कुल 9 आरोपी पकड़े जा चुके हैं. पिछले हफ्ते गिरफ्तार किए गए आरोपी तनिष्क से पूछताछ में खुलासा हुआ कि वह गया निवासी अरुण के साथ मिलकर नकली दवाओं का कारोबार चला रहा था. इसके बाद पुलिस तुरंत गया पहुंची और जांच के बाद अरुण को दबोच लिया.

एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स को जांच में पता चला कि अरुण गया में बिना किसी वैध लाइसेंस के दवाएं बना रहा था. वहां न तो कोई मैन्युफैक्चरिंग केमिस्ट था और न ही एनालिटिकल केमिस्ट. ड्रग विभाग की टीम को मौके पर बुलाया गया, जहां भारी मात्रा में नकली दवाएं और मशीनें बरामद हुईं.

बरामदगी में क्या-क्या मिला

  • 1,19,800 नकली जिंक की गोलियां
  • 42,480 नकली एजीथ्रोमाइसिन टैबलेट
  • 27 किलो पैरासिटामोल पाउडर
  • 444 नकली इंजेक्शन (डिलोना एक्वा)


लगा रखा था दवा बनाने का पूरा सेटअप

पुलिस के मुताबिक, अरुण फैक्ट्री में तस्करी कर लाया गया 5 किलो से ज्यादा ट्रामाडोल पाउडर प्रोसेस कर गोलियां बनाता था. अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी कीमत 5 करोड़ रुपये से ज्यादा बताई जा रही है. इन गोलियों को अवैध मेडिकल दुकानों के जरिए ऊंचे दामों पर बेचा जाता था. कई जगह इनका इस्तेमाल हेरोइन की जगह किया जा रहा था. यह गिरोह कच्चा माल अवैध तरीके से मंगवाता था, फैक्ट्री में प्रोसेस करता था और फिर फर्जी मेडिकल फ्रंट और सप्लायर्स के जरिए अलग-अलग राज्यों में सप्लाई करता था. पूरा खेल गैरकानूनी तरीके से चल रहा था और आम लोगों की सेहत के साथ खिलवाड़ किया जा रहा था.

इस ऑपरेशन के दौरान पुलिस ने हजारों किलोमीटर का सफर तय किया, कई राज्यों में छापेमारी की और तकनीकी व मानव खुफिया जानकारी के आधार पर कार्रवाई की. अब तक दो फर्जी फैक्ट्रियां बंद कराई जा चुकी हैं और 9 आरोपी गिरफ्तार हो चुके हैं. डीसीपी संजीव कुमार यादव ने साफ कहा है कि जो लोग जनता की सेहत से खिलवाड़ करेंगे, उनके खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जाएगी.
 

Featured Video Of The Day
Netanyahu की जान को खतरा? Iran State TV ने जारी की 'Hit List', कहा- Wait for the Ababil Drone
Topics mentioned in this article