दिल्ली के स्कूलों के लिए तिहाड़ जेल के कैदी बनाएंगे 10 हजार बेंच, बाजार से होंगी 25 फीसदी सस्ती

तिहाड़ जेल द्वारा निर्मित डेस्क की गुणवत्ता लोक निर्माण विभाग (PWD) द्वारा उपयोग में लाए जा रहे फर्नीचर के समकक्ष है. अनुमानित रूप से यह विकल्प बाजार मूल्य की तुलना में लगभग 25 प्रतिशत अधिक किफायती है.

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तिहाड़ जेल के कौदी बनाएंगी स्कूली बेंच.
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  • दिल्ली सरकार ने तिहाड़ जेल को स्कूलों के लिए10 हजार डुअल डेस्क बनाने का कॉन्ट्रैक्ट दिया है.
  • तिहाड़ जेल में बने डेस्क की गुणवत्ता लोक निर्माण विभाग के फर्नीचर के बराबर है और ये बाजार से सस्ती होंगी.
  • इस परियोजना के लिए दिल्ली सरकार लगभग आठ करोड़ पच्चासी लाख रुपये खर्च करेगी.
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देश की कुख्यात तिहाड़ जेल में अब स्कूली बच्चों के लिए बेंच तैयार होंगी. अलग-अलग अपराधों में बंद कैदी इस काम को करेंगे. दिल्ली सरकार के स्कूलों में बेहतर सुविधा और बच्चों की सहूलियत के लिए तिहाड़ जेल के क़ैदी तैयार करीब 10 हज़ार बेंच करेंगे, वो भी बाज़ार के दाम से 25 फ़ीसदी सस्ता. दिल्ली सरकार की कैबिनेट ने राजधानी के सरकारी स्कूलों में फर्नीचर की कमी को दूर करने के उद्देश्य से तिहाड़ सेंट्रल जेल फैक्टरी से 10,000 डुअल डेस्क खरीदने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है. यह निर्णय मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में लिया गया.

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तिहाड़ जेल को मिलेंगे करीब 9 करोड़ रुपए 

तिहाड़ जेल के क़ैदियों को सुधारने और उनका पुनर्वास करने के लिए दिल्ली सरकार ने बड़ा ऑर्डर दिया है. तिहाड़ जेल में 10 हज़ार बेंच को बनाने की एवज़ में दिल्ली सरकार 8 करोड़ 95 लाख 40 हजार रुपये देगी. मुख्यमंत्री ने भी स्पष्ट किया है कि यह पहल कैदियों के पुनर्वास, सुधार और समाज में पुनर्स्थापना के उद्देश्य को पूरा करती है.

बाजार की तुलना में सस्ती होंगी तिहाड़ में बनीं बेंच

तिहाड़ जेल द्वारा निर्मित डेस्क की गुणवत्ता लोक निर्माण विभाग (PWD) द्वारा उपयोग में लाए जा रहे फर्नीचर के समकक्ष है. अनुमानित रूप से यह विकल्प बाजार मूल्य की तुलना में लगभग 25 प्रतिशत अधिक किफायती है. दिल्ली सरकार के शिक्षा मंत्री आशीष सूद के मुताबिक, दिल्ली सरकार राजधानी में कुल 1086 सरकारी स्कूल संचालित करती है.

127 स्कूलों के लिए 23,321 डुअल डेस्क की जरूरत

हाल के सालों में स्कूलों में छात्रों की संख्या लगातार बढ़ी है, साथ ही नई कक्षाओं का निर्माण भी हुआ है, इसके कारण डुअल डेस्क की कमी सामने आई. वास्तविक जरूरत जानने के लिए अप्रैल में एक विशेष सर्वे अभियान चलाया गया, जिसमें स्कूल प्रमुखों, जिला उपनिदेशकों और क्षेत्रीय निदेशकों से रिपोर्ट मंगाई गई. इस प्रक्रिया के बाद 127 स्कूलों के लिए 23,321 डुअल डेस्क की आवश्यकता सामने आई.

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