दिल्ली के आउटर नॉर्थ जिले की साइबर पुलिस ने एक ऐसे गिरोह का पर्दाफाश किया है, जो लोगों को उनके ही घरों में डिजिटल अरेस्ट कर करोड़ों रुपये ठग रहा था. दिल्ली पुलिस ने डिजिटल अरेस्ट, फर्जी IPO और ऑनलाइन ट्रेडिंग के नाम पर लोगों को ठगने वाले 6 आरोपियों को झारखंड से लेकर उत्तराखंड तक छापेमारी कर गिरफ्तार किया है. दिल्ली पुलिस के मुताबिक इस पूरे मामले में 89 शिकायतें सामने आईं, जिनमें करीब 10.6 करोड़ रुपये की ठगी हुई थी. डीसीपी आउटर नॉर्थ ने बताया कि इस पूरे ऑपरेशन की शुरुआत तब हुई, जब आउटर नॉर्थ जिले में साइबर ठगी की कुछ गंभीर शिकायतें दर्ज कराई गईं.
इन केस से समझिए कैसे ठगे गए लोग?
- केस-1 (डिजिटल अरेस्ट - FIR No. 16/2025): एक बुजुर्ग दंपत्ति ने शिकायत दर्ज कराई कि खुद को TRAI और CBI का अधिकारी बताने वाले ठगों ने वीडियो कॉल किया. ठगों ने मानसिक दबाव बनाकर करीब एक हफ्ते तक उन्हें डराए रखा और 20 लाख रुपये ठग लिए. जांच में पता चला कि पैसा झारखंड के रांची में शशिकांत कुमार के खाते में गया था.
- केस-2 (फर्जी IPO स्कैम - FIR No. 06/2025): ठगों ने एक पीड़ित को व्हाट्सएप ग्रुप के जरिए PM HDFC App में निवेश का लालच दिया गया. इस झांसे में आकर उससे 7.79 लाख रुपये ठगे गए. जांच रुड़की (उत्तराखंड) तक पहुंची.
- केस- 3 (ऑनलाइन ट्रेडिंग - FIR No. 38/2025): एक शिकायतकर्ता से ऑनलाइन स्टॉक ट्रेडिंग के नाम पर 1.88 लाख रुपये ठगे गए, जिसका लिंक दिल्ली के शाहदरा से मिला.
- केस-4 (SIM मिसयूज और डिजिटल अरेस्ट - FIR No. 11/2026): एक पीड़ित को सिम कार्ड के गलत इस्तेमाल का डर दिखाकर 8 लाख रुपये ट्रांसफर कराए गए. इस मामले में पुलिस ने 100% रिकवरी कर ली है.
पकड़े गए आरोपी क्या करते थे ?
- शशिकांत कुमार (रांची) - खातों का इंतजाम करता था.
- खालिद त्यागी (रुड़की) - म्यूल अकाउंट ऑपरेट करता था.
- सचिन मित्तल (शाहदरा) - ठगी का मुख्य लाभार्थी.
- आसिफ, नितिन सैनी और विरेंद्र मुखिया, ठगी की वारदात में सहयोग करते थे.
इस तरह डराकार करते थे डिजिटल अरेस्ट
पुलिस के अनुसार, गिरोह दो तरीकों से ठगी करता था. डिजिटल अरेस्ट में आरोपी खुद को पुलिस, CBI या TRAI अधिकारी बताकर वीडियो कॉल करते थे. पीड़ितों को यह कहकर डराया जाता था कि उनका आधार या सिम किसी अपराध में इस्तेमाल हुआ है. फर्जी वारंट दिखाकर उन्हें “डिजिटल अरेस्ट” बताया जाता और वेरिफिकेशन के नाम पर पैसे ट्रांसफर करवा लिए जाते.
आरोपियों से 19 लाख बरामद, ठगी से बचने के लिए क्या करें
पुलिस ने आरोपियों के पास से 19 लाख रुपये नकद, मोबाइल फोन, चेक बुक और पेन ड्राइव बरामद किए हैं. रकम को पीड़ितों को लौटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है. दिल्ली पुलिस ने लोगों को सलाह दी है कि कोई भी सरकारी एजेंसी कभी वीडियो कॉल पर डिजिटल अरेस्ट नहीं करती. डराने या धमकाने पर पैसा ट्रांसफर न करें. अनजान निवेश स्कीम और व्हाट्सएप टिप्स से सावधान रहें. ठगी होने पर तुरंत 1930 पर कॉल करें या www.cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें.













