Delhi Crime News: दिल्ली के शकरपुर थाना पुलिस ने एक बेहद शातिर और टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करने वाले फर्जी रिकवरी एजेंट गैंग (Recovery Agent Gang) का पर्दाफाश किया है, जो सड़कों पर लोगों को रोककर खुद को बैंक का अधिकारी बताता था और फिर डराकर उनसे पैसे वसूलता था. यह गैंग खास तौर पर उन लोगों को निशाना बनाता था, जिनकी गाड़ियों पर EMI बकाया होती थी. इस मामले का खुलासा तब हुआ, जब केशव कुमार नाम के एक व्यक्ति ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई, जिसमें बताया कि 26 मार्च को विकास मार्ग, ITO के पास एक सफेद ब्रेजा कार में सवार बदमाशों ने उसे जबरन रोका और गाड़ी में बैठाकर मारपीट की. फिर जान से मारने की धमकी देकर उससे ₹18,000 ऑनलाइन ट्रांसफर करवा लिए.
डीसीपी पूर्वी दिल्ली राजीव कुमार के अनुसार, शिकायत मिलते ही शकरपुर थाना पुलिस हरकत में आ गई और तुरंत एक विशेष टीम का गठन किया. उसके बाद टीम टेक्निकल सर्विलांस, मोबाइल लोकेशन ट्रैकिंग और सीक्रेट इनफॉर्मर की मदद से आरोपियों तक पहुंच गई. जांच के दौरान एक अहम खुलासा यह हुआ कि यह गैंग Easy Recovery App नाम के मोबाइल एप्लिकेशन का इस्तेमाल करता था, जिसके जरिए वे उन वाहनों की जानकारी जुटाते थे, जिनकी EMI बकाया होती थी. इसके बाद ये आरोपी सड़कों पर ऐसे वाहन मालिकों की पहचान कर उन्हें रोकते और खुद को बैंक रिकवरी एजेंट बताकर उन पर दबाव बनाते थे.
वसूली का खतरनाक था गैंग का तरीका
इस गैंग का तरीका बेहद खतरनाक और सुनियोजित था. आरोपी बिना नंबर प्लेट वाली सफेद ब्रेज़ा कार में घूमते थे, ताकि उनकी पहचान न हो सके. जैसे ही उन्हें कोई टारगेट मिलता, वे उसे रोककर पहले बातचीत के जरिए डराते, फिर जबरन गाड़ी में बैठाकर उसे अलग ले जाते थे. वहां उसके साथ मारपीट, धमकी और मानसिक दबाव डालकर QR कोड या ऑनलाइन ट्रांसफर के जरिए पैसे वसूलते थे. पैसे मिलते ही आरोपी पीड़ित को छोड़ देते थे, जिससे कई लोग डर के कारण पुलिस तक नहीं पहुंच पाते थे.
यूपी के बागपुर के रहने वाले सभी आरोपी युवक
लगातार छापामारी और पुख्ता सबूतों के आधार पर पुलिस ने चार आरोपियों प्रिंस, आकाश उर्फ अक्कू, शिवम और टीटू उर्फ टिट्टू को गिरफ्तार कर लिया है. ये सभी उत्तर प्रदेश के बागपत जिले के रहने वाले हैं और उम्र 22 से 25 साल के बीच है. शुरुआती जांच में इनका कोई पुराना आपराधिक रिकॉर्ड सामने नहीं आया है, लेकिन पूछताछ में इन्होंने कई वारदातों में शामिल होने की बात कबूल की है. इससे अंदेशा है कि यह गैंग काफी समय से सक्रिय था.
5 मोबाइलों में मिले अहम सबूत
पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 5 मोबाइल फोन बरामद किए हैं, जिनमें उस ऐप के इस्तेमाल और ट्रांजैक्शन से जुड़े अहम डिजिटल सबूत मिले हैं. इसके अलावा वारदात में इस्तेमाल की गई सफेद ब्रेज़ा कार भी जब्त कर ली गई है. पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि इन मोबाइल फोन और ऐप के जरिए और कितने लोगों को निशाना बनाया गया और क्या इस गिरोह के पीछे कोई बड़ा नेटवर्क या फाइनेंशियल हैंडलर भी शामिल है.
टेक्नोलॉजी की अच्छी जानकारी, काम में थे प्रोफेशनल
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, यह गैंग बेहद प्रोफेशनल तरीके से काम करता था और आम लोगों की जानकारी व टेक्नोलॉजी का गलत फायदा उठाकर अपराध को अंजाम दे रहा था. फिलहाल पुलिस इस गिरोह के अन्य साथियों की तलाश में जुटी हुई है और साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि कहीं यह नेटवर्क दिल्ली-एनसीआर के बाहर भी तो सक्रिय नहीं था.
पुलिस की लोगों के लिए अपील
पुलिस ने आम जनता से खास अपील की है कि अगर कोई व्यक्ति सड़क पर खुद को बैंक या फाइनेंस कंपनी का रिकवरी एजेंट बताकर रोकता है तो उसकी बातों में न आएं. किसी भी तरह का भुगतान सड़क पर या दबाव में आकर न करें और तुरंत नजदीकी पुलिस स्टेशन या हेल्पलाइन नंबर पर संपर्क करें, ताकि ऐसे गिरोहों पर समय रहते कार्रवाई की जा सके.














